छत्रपति संभाजीनगर में इस साल गणेश विसर्जन का पावन पर्व सिर्फ भक्ति, श्रद्धा और गाजे-बाजे तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आगामी चुनावी सरगर्मियों और राजनीतिक ताकत के प्रदर्शन का एक बड़ा मंच भी बन गया। शहर की सड़कों पर जहां एक तरफ ढोल-ताशों की गूंज और 'गणपति बाप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ' के जयकारों से पूरा माहौल सराबोर था, वहीं दूसरी तरफ प्रमुख चौराहों पर सजे राजनीतिक होर्डिंग्स और स्वागत मंच कुछ और ही दास्तां बयां कर रहे थे। धार्मिक आस्था के इस सबसे बड़े अनुष्ठान में राजनीति का यह रंग शहरभर में चर्चा का विषय बना रहा।
विसर्जन यात्राओं में दिखा सियासी जमावड़ा
अनंत चतुर्दशी के मौके पर निकली भव्य विसर्जन शोभायात्रा के दौरान शहर के मुख्य मार्गों और विसर्जन स्थलों पर राजनीतिक दलों के दिग्गजों और स्थानीय नेताओं का भारी जमावड़ा देखा गया। जनसेवा और स्वागत के नाम पर लगाए गए बड़े-बड़े कटआउट और होर्डिंग्स ने साफ कर दिया कि नेता इस धार्मिक अवसर को अपने पाले में करने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते। कई प्रमुख स्थानों पर राजनीतिक दलों की तरफ से ऐसे भव्य पंडाल सजाए गए थे, जो किसी चुनावी रैली या जनसभा का अहसास करा रहे थे।
सत्तारूढ़ दलों से जुड़े नेताओं ने इस दौरान अपनी सरकारों की योजनाओं और भव्य व्यवस्थाओं का श्रेय लेने की पूरी कोशिश की, तो वहीं विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रशासन की व्यवस्थाओं और सुरक्षा इंतजामों में खामियां गिनाते हुए सरकार पर निशाना साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आम श्रद्धालुओं और शहर के प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि गणेशोत्सव हमारी साझी संस्कृति, सामाजिक समरसता और शुद्ध आस्था का प्रतीक है, लेकिन राजनीतिक दलों ने इसे अपने चुनावी समीकरण साधने और वोट बैंक मजबूत करने का जरिया बना लिया है।
41,482 प्रतिमाओं का हुआ दान और विसर्जन
राजनीतिक सरगर्मियों के बीच प्रशासनिक स्तर पर विसर्जन का यह महाअभियान बेहद शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ। महानगरपालिका के आंकड़ों के मुताबिक, शहरभर में बनाए गए कुल 47 प्रतिमा दान केंद्रों पर इस वर्ष रिकॉर्ड 41,482 गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन और दान किया गया। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम उठाते हुए नागरिकों ने उत्साह दिखाया।
- कुल विसर्जित प्रतिमाएं: 41,482
- प्रतिमाओं का दान: 18,358
- जल में विसर्जन: 23,124
महानगरपालिका कमिश्नर अमोल येडगे की अपील का असर साफ तौर पर दिखाई दिया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाने के लिए अपनी प्रतिमाएं सीधे जल में प्रवाहित करने के बजाय तय किए गए संकलन केंद्रों पर दान करना बेहतर समझा। खुद महानगरपालिका अधिकारी-कर्मचारी संगठन ने भी अपनी स्थापित गणेश प्रतिमा को जल में विसर्जित न करके दान केंद्र पर ही अनुकूल तरीके से समर्पित किया।
पर्यावरण और परंपरा का अनूठा संगम
राजनीतिक शोर-शराबे से इतर, शहर के कई गणेश मंडलों ने पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक परंपराओं का एक बेहतरीन उदाहरण भी पेश किया। नवीन छत्रपति संभाजीनगर श्री गणेश महासंघ की शोभायात्रा में इस बार रासायनिक गुलाल के इस्तेमाल पर पूरी तरह पाबंदी रही। इसके बजाय श्रद्धालुओं का स्वागत केवल फूलों की कोमल पंखुड़ियों से किया गया।
महासंघ से जुड़े विभिन्न मंडलों ने तेज आवाज वाले डीजे और कानफाड़ू ध्वनि-विस्तारक यंत्रों से तौबा करते हुए पारंपरिक ढोल, ताशों, लोकनृत्यों और झांझ-मंजीरों की थाप पर प्रस्तुतियां दीं। नियमों का पालन करने और पर्यावरण को सहेजने वाले इन समूहों को समापन पर विशेष प्रमाण पत्र देकर सम्मानित भी किया गया।
सामाजिक संदेश देती जीवंत झांकियां
विसर्जन जुलूस के दौरान शामिल की गईं झांकियां शहरवासियों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र रहीं। 'महागणपति विघ्नहर्ता समूह' ने अपनी झांकी के माध्यम से गोसंरक्षण और पशुओं के प्रति दया का गहरा संदेश दिया। इसी तरह गोगाबाबा क्रीड़ा समूह (बेगमपुरा), छत्रपति संभाजी क्रीड़ा समूह (पदमपुरा), और चाणक्य क्रीड़ा समूह ने जल संरक्षण, सूखा और गंभीर धार्मिक विषयों पर आधारित प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं। इन झांकियों को देखने के लिए सड़कों के दोनों किनारों पर भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा था।
प्रशासन और संगठनों द्वारा भव्य स्वागत
सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने में जुटी पुलिस और प्रशासन के प्रयासों की भी सराहना की गई। सिटी चौक स्थित पुलिस आयुक्त कार्यालय के साथ-साथ संभाजीपेठ इलाके में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की ओर से ढोल-गाजे-बाजे के साथ आ रहे गणेश मंडलों का जोरदार स्वागत किया गया। कार्यकर्ताओं ने समूहों के पदाधिकारियों को पुष्पहार पहनाए, स्मृतिचिह्न भेंट किए और पारंपरिक गमछा ओढ़ाकर उनका अभिनंदन किया।
इतना ही नहीं, जुलूस के लंबे मार्ग पर चलने वाले श्रद्धालुओं और कार्यकर्ताओं की सुविधा का पूरा ख्याल रखा गया। जगह-जगह खाने-पीने के स्टॉल लगाए गए जहां श्रद्धालुओं के लिए पूरी-भाजी, मसाला चावल और गरमागरम बड़ा पाव की मुफ्त व्यवस्था की गई थी, ताकि वे बिना किसी थकान के इस उत्सव का हिस्सा बन सकें।
प्रशासनिक सतर्कता और स्वच्छता का विशेष ध्यान
लाखों की संख्या में उमड़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। वहीं, महानगरपालिका की स्वच्छता टीमों ने विसर्जन मार्ग और पंडालों के आसपास युद्ध स्तर पर सफाई अभियान चलाया। विसर्जन स्थलों पर पर्याप्त रोशनी (लाइटिंग) की व्यवस्था की गई थी ताकि रात के समय भी किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
छत्रपति संभाजीनगर का यह गणेशोत्सव अंततः एक ऐसी दास्तान छोड़ गया, जहां एक तरफ अटूट आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं की महक थी, तो दूसरी तरफ आने वाले दिनों के राजनीतिक समीकरणों की सुगबुगाहट भी साफ महसूस की जा सकती थी।