साइबर ठगों के हौसले किस हद तक बुलंद हो चुके हैं, इसकी एक डरावनी बानगी महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से सामने आई है। यहाँ आधुनिक तकनीक और डर का ऐसा मनोवैज्ञानिक खेल खेला गया कि एक 67 वर्षीय बुजुर्ग महिला को घंटों तक अपने ही घर में 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest) की स्थिति में रखा गया। शातिर ठगों ने आधार कार्ड के दुरुपयोग और आतंकी फंडिंग जैसे गंभीर मामलों में फंसाने का खौफ दिखाकर महिला से कुल 13 लाख रुपये ऐंठ लिए। यह घटना न सिर्फ साइबर सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे अपराधी अब समाज के वरिष्ठ नागरिकों को अपना सबसे आसान निशाना बना रहे हैं।
क्या था पूरा मामला? जानिए कैसे बुना गया ठगी का जाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित महिला एक बैंक से सेवानिवृत्त (Retired Bank Employee) हैं। कुछ दिन पहले उनके पास एक अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल और फोन आया। फोन करने वाले खुद को देश की जानी-मानी जांच एजेंसियों और टेलीकॉम डिपार्टमेंट के वरिष्ठ अधिकारी बता रहे थे। उन्होंने बेहद आक्रामक और गंभीर लहजे में महिला से कहा कि उनके नाम पर जारी एक आधार कार्ड का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों के लिए किया गया है।
ठगों ने इतनी सफाई और पेशेवर अंदाज में बात की कि बुजुर्ग महिला एक पल के लिए पूरी तरह सहम गईं। कॉलर ने आगे दावा किया कि यह मामला सिर्फ कागजों की हेराफेरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध अंतरराष्ट्रीय आतंकी फंडिंग (Terrorist Funding) से जुड़ा हुआ है। यह सुनते ही महिला के पैरों तले जमीन खिसक गई।
'डिजिटल अरेस्ट' का खौफ: न बाहर जाने की इजाजत, न किसी से बात करने की छूट
साइबर अपराधियों ने पीड़ित महिला को मानसिक रूप से पूरी तरह अपने नियंत्रण में लेने के लिए 'डिजिटल अरेस्ट' के मनोवैज्ञानिक पैंतरे का इस्तेमाल किया। ठगों ने महिला को सख्त निर्देश दिए कि वे अगले कई घंटों तक अपने घर से बाहर नहीं निकलेंगी और न ही इस बारे में अपने किसी भी रिश्तेदार, पड़ोसी या यहाँ तक कि परिवार के अन्य सदस्यों से बात करेंगी।
ठग लगातार वीडियो कॉल के जरिए उन पर नजर रखे हुए थे। महिला को यह यकीन दिला दिया गया कि अगर उन्होंने इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया या किसी को कुछ बताया, तो उन्हें और उनके परिवार को तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा और भारी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। अकेलेपन और उम्र के इस पड़ाव पर अचानक आए इस वज्रपात से महिला मानसिक तनाव और भारी दहशत में आ गईं।
जांच के नाम पर बैंक खाते से ट्रांसफर कराए 13 लाख रुपये
डर के आगोश में आ चुकी बुजुर्ग महिला को ठगों ने विश्वास दिलाया कि अगर वे अपनी बेगुनाही साबित करना चाहती हैं, तो उन्हें अपने बैंक खातों में जमा पूरी रकम को 'सत्यापन' (Verification) के लिए सरकार या जांच एजेंसी के बताए गए सुरक्षित खातों में ट्रांसफर करना होगा। ठगों ने यह भी भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद यह पैसा तुरंत उनके खाते में वापस लौटा दिया जाएगा।
घबराहट और किसी अनहोनी के डर से महिला ने बिना किसी से सलाह किए, अपनी गाढ़ी कमाई और रिटायरमेंट की जीवनभर की बचत में से 13 लाख रुपये साइबर ठगों द्वारा बताए गए दो अलग-अलग बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए।
ठगी का अहसास और पुलिस में शिकायत
पैसे ट्रांसफर करने के बाद जब ठगों ने वीडियो कॉल काट दी और उनके फोन बंद आने लगे, तब बुजुर्ग महिला को अहसास हुआ कि उनके साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है। होश उड़ने के बाद उन्होंने तुरंत अपने परिजनों को इस पूरी घटना की जानकारी दी। परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई और वे तुरंत स्थानीय साइबर पुलिस स्टेशन पहुंचे।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की संबंधित धाराओं के तहत अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस उन बैंक खातों की डिटेल खंगाल रही है जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे, साथ ही उन मोबाइल नंबरों और आईपी एड्रेस की लोकेशन भी ट्रैक की जा रही है जिनका इस्तेमाल इस वारदात को अंजाम देने के लिए किया गया था।
साइबर ठगी से बचने के लिए बेहद जरूरी सावधानियां
यह अकेली ऐसी घटना नहीं है। देश भर में इन दिनों 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। आइए जानते हैं कि इस तरह के साइबर अपराधियों से खुद को और अपने परिवार को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है:
- कोई एजेंसी 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती: भारत में सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स या पुलिस जैसी कोई भी जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर पूछताछ या डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान नहीं रखती है। कानून की अपनी एक स्थापित प्रक्रिया होती है।
- व्यक्तिगत या बैंक विवरण साझा न करें: फोन पर कभी भी अपना आधार कार्ड नंबर, पैन कार्ड, बैंक खाता विवरण, ओटीपी (OTP) या पासवर्ड किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।
- धमकी मिलने पर घबराएं नहीं: यदि कोई आपको गिरफ्तारी या आतंकी गतिविधियों में फंसाने की धमकी देता है, तो तुरंत घबराएं नहीं। बल्कि फोन काट दें और अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या परिवार के सदस्यों से संपर्क करें।
- साइबर हेल्पलाइन का उपयोग करें: यदि आपके साथ किसी भी प्रकार की ऑनलाइन धोखाधड़ी हो जाती है, तो तुरंत आधिकारिक साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। समय रहते दी गई सूचना से ठगों के खातों को फ्रीज कराया जा सकता है।
निष्कर्ष: तकनीक ने हमारी जिंदगी जितनी आसान बनाई है, साइबर अपराधियों ने उसके जरिए ठगी के रास्ते उतने ही खतरनाक कर लिए हैं। विशेष रूप से बुजुर्गों और वरिष्ठ नागरिकों को जागरूक करना आज के समय की सबसे बड़ी मांग है। परिवार के युवाओं का यह कर्तव्य बनता है कि वे अपने घर के बुजुर्गों को इस तरह के नए साइबर फ्रॉड के बारे में समय-समय पर जानकारी देते रहें ताकि कोई भी शातिर ठग उनकी मेहनत की कमाई पर डाका न डाल सके।