छत्रपती संभाजीनगर में इन दिनों शहर के संपत्तिधारकों के लिए एक बड़ी राहत मानी जाने वाली 'गुंठेवारी योजना' प्रशासनिक पेचीदगियों और कथित बिचौलियों के चलते मुसीबत का सबब बनती जा रही है। योजना के तहत संपत्तिधारकों को 50 प्रतिशत सुविधाओं का लाभ देने के फैसले के बाद, अब जमीनी स्तर पर प्रक्रिया के नाम पर आम जनता की भारी आर्थिक लूट किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। स्थिति यह है कि कागजी कार्रवाई और फाइल तैयार करवाने के एवज में मनमाने ढंग से पैसों की मांग की जा रही है, जिससे योजना का मूल उद्देश्य ही धूमिल होता नजर आ रहा है।
क्या है पूरा मामला और क्यों मचा है बवाल?
हाल ही में छत्रपती संभाजीनगर महानगरपालिका क्षेत्र में गुंठेवारी के अंतर्गत आने वाली संपत्तियों को नियमित करने और उनका कानूनी दायरा तय करने की प्रक्रिया शुरू हुई है। सरकार और प्रशासन के स्तर पर यह कदम शहर के सुनियोजित विकास और नागरिकों को उनके आशियाने का वैध हक दिलाने के लिए उठाया गया था। हालांकि, जैसे ही यह प्रक्रिया अमलीजामा पहनाने लगी, वैसे ही इसके क्रियान्वयन में गंभीर खामियां और भ्रष्टाचार की परतें उधड़ने लगीं।
आरोप है कि गुंठेवारी के तहत अपनी संपत्ति की फाइल तैयार करवाने वाले नागरिकों से इंजीनियर और वास्तुविद (Architects) अपनी मनमानी फीस वसूल रहे हैं। यह राशि मामूली नहीं, बल्कि 50 हजार रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक पहुंचाई जा रही है। एक आम मध्यमवर्गीय परिवार के लिए इतनी भारी-भरकम रकम चुकाना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है, जिसके चलते जनता में भारी रोष व्याप्त है।
कांग्रेस का आक्रामक रुख, मनपा प्रशासन को घेरा
इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए सीधे तौर पर महानगरपालिका प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस का साफ कहना है कि यदि गरीबों और मध्यम वर्ग को राहत देने वाली योजना ही लूट का जरिया बन जाए, तो ऐसी व्यवस्था का कोई औचित्य नहीं रह जाता है।
शहर अध्यक्ष एडवोकेट सैयद अकरम के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल हाल ही में महानगरपालिका कार्यालय पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने मनपा की अतिरिक्त आयुक्त कल्पिता पिंपले से मुलाकात कर उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा और इस पूरे खेल पर तत्काल अंकुश लगाने की कड़ी मांग की।
ज्ञापन में उठाई गईं प्रमुख और अहम मांगें
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल द्वारा मनपा प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में कई ऐसे व्यावहारिक मुद्दे उठाए गए हैं, जो सीधे तौर पर आम जनता के हितों से जुड़े हैं। इन मांगों को यदि प्रशासन मान लेता है, तो संपत्तिधारकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है:
- शुल्क की अधिकतम सीमा तय हो: फाइल तैयार करने के नाम पर वसूले जा रहे 50 हजार से 1 लाख रुपये तक के शुल्क को पूरी तरह से नियंत्रित किया जाए। इसे घटाकर मात्र 5 से 10 हजार रुपये के बीच निश्चित किया जाना चाहिए।
- आधिकारिक आवक-जावक रजिस्टर शुरू हो: गुंठेवारी के लिए संपत्तिधारकों द्वारा जमा किए जाने वाले आवेदनों का पारदर्शी रिकॉर्ड रखने के लिए मनपा में एक अलग आवक-जावक रजिस्टर की व्यवस्था की जाए।
- पारदर्शी चालान प्रक्रिया: फाइल तैयार करने वाले इंजीनियर या वास्तुविद द्वारा संपत्तिधारक से केवल निर्धारित वैध शुल्क ही लिया जाए। फाइल तैयार होने के बाद उसे सीधे संपत्तिधारक को सौंपा जाए और मनपा के चालान की राशि नागरिक खुद अपने हाथों से जमा करें, ताकि अतिरिक्त वसूली की कोई गुंजाइश ही न बचे।
- दस्तावेजों की जांच एक बार में हो: फाइलों की स्क्रूटनी के नाम पर नागरिकों को बार-बार मनपा के चक्कर न लगवाए जाएं। छानबीन के दौरान यदि कोई कमी निकलती है, तो उसकी पूरी जानकारी एक ही पत्र में दी जाए और उसे सुधारने के लिए पर्याप्त समय प्रदान किया जाए।
आम जनता की परेशानी और अधिकारियों की चुप्पी
छत्रपती संभाजीनगर के कई इलाकों में संपत्तिधारकों का कहना है कि वे महीनों से अपनी फाइलें पास कराने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। एक तरफ जहां सरकार प्रक्रियाओं को सरल बनाने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत नजर आती है। दस्तावेजों की कमियां निकालकर फाइल को अटकाए रखना और फिर बिचौलियों के माध्यम से सौदा तय करने की पुरानी संस्कृति आज भी बदस्तूर जारी है।
अतिरिक्त आयुक्त को ज्ञापन सौंपते समय प्रतिनिधिमंडल में शामिल नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इन भ्रष्ट तौर-तरीकों पर रोक नहीं लगाई गई, तो कांग्रेस पार्टी को मजबूरन व्यापक जन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
योजना का उद्देश्य और भविष्य की राह
गुंठेवारी योजना मूल रूप से उन तमाम अनधिकृत और अर्ध-विकसित बस्तियों के लिए संजीवनी बूटी की तरह है, जहां लोग दशकों से अपने घरों के वैध कागजात पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस योजना का उद्देश्य शहर के बुनियादी ढांचे को सुधारना और नागरिकों को उनके मालिकाना हक का सम्मान देना है।
लेकिन यदि बिचौलियों और कुछ भ्रष्ट पेशेवरों की वजह से यह योजना आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाती है, तो इसका सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने पर बुरा असर पड़ेगा। अब देखना यह होगा कि महानगरपालिका प्रशासन कांग्रेस के इस ज्ञापन और जनता के आक्रोश पर कितना गंभीर रुख अपनाता है और क्या वाकई इन शुल्कों को सीमित कर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाता है या नहीं।
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में एड. सैयद अकरम के अलावा इब्राहीम पठाण, इकबालसिंग गील, सुरेश पवार, राहुल सिरसाट, खंडारे, राम लोखंडे, मोहम्मद जाकेर और हकीम पटेल समेत कई प्रमुख कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में मांग की है कि प्रशासन को बिना किसी देरी के इस दिशा में सख्त दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।