धार्मिक नगरी वाराणसी में एक बार फिर मां गंगा के तेवर बदलते नजर आ रहे हैं। पिछले कई दिनों से लगातार आ रही गिरावट के बाद अब गंगा का जलस्तर अचानक बढ़ने लगा है। इस बदलाव ने एक तरफ जहां प्रशासन की धड़कनों को बढ़ा दिया है, वहीं तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के माथे पर भी चिंता की लकीरें खींचनी शुरू कर दी हैं। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जलस्तर में आधे सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे हालात पर पैनी नजर रखी जा रही है।
केंद्रीय जल आयोग के ताजा आंकड़े क्या कहते हैं?
केंद्रीय जल आयोग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार की सुबह 8 बजे वाराणसी में गंगा का जलस्तर 69.29 मीटर रिकॉर्ड किया गया। इस समय नदी का पानी लगातार ऊपर की ओर चढ़ रहा था। जलस्तर बढ़ने की यह रफ्तार भले ही बहुत तेज नहीं है, लेकिन लगातार जारी रहने वाला बढ़ाव अपने आप में स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों के लिए सतर्क होने का संकेत है।
आंकड़ों पर गौर करें तो राजघाट पर गंगा का चेतावनी स्तर (Warning Level) 70.262 मीटर और खतरे का निशान (Danger Mark) 71.262 मीटर निर्धारित किया गया है। इस लिहाज से देखा जाए, तो वर्तमान जलस्तर अभी चेतावनी बिंदु से लगभग 0.97 मीटर नीचे है। हालांकि, मौजूदा स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन जिस प्रकार पानी ऊपर आ रहा है, उससे नदी के मिजाज को लेकर आशंकाएं बनी हुई हैं।
ऐतिहासिक उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) से कितनी दूरी?
वाराणसी में गंगा के पिछले रिकॉर्ड्स पर नजर डालें तो नदी का उच्चतम बाढ़ स्तर (Highest Flood Level - HFL) 73.901 मीटर दर्ज किया गया है। इस ऐतिहासिक स्तर की तुलना में वर्तमान जलस्तर अभी काफी नीचे है, लेकिन नदी के व्यवहार में अचानक आए इस बदलाव को लेकर जल संसाधन और सिंचाई विभाग पूरी तरह से मुस्तैद हो गए हैं। जानकारों का मानना है कि ऊपरी इलाकों या पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली बारिश का असर मैदानी इलाकों की नदियों पर सीधा पड़ता है, जिसके कारण जलस्तर में इस तरह के उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं।
प्रशासन और घाटों पर बढ़ाई गई निगरानी
गंगा के जलस्तर में हो रही इस अचानक वृद्धि को देखते हुए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। घाटों और नदी के आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई है। स्थानीय प्रशासन द्वारा एनडीआरएफ (NDRF) और जल पुलिस के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
- निगरानी दल सक्रिय: सभी प्रमुख घाटों पर जल पुलिस और गोताखोरों को मुस्तैद कर दिया गया है।
- तटीय इलाकों में मुनादी: निचले इलाकों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
- 24 घंटे मॉनिटरिंग: केंद्रीय जल आयोग की तकनीकी टीम हर घंटे जलस्तर के आंकड़ों को अपडेट कर रही है।
निचले इलाकों और नाव चालकों की बढ़ी मुश्किलें
गंगा के पानी में बढ़ोतरी का सबसे पहला असर घाटों पर होने वाली गतिविधियों और नाव संचालन पर पड़ता है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट जैसे प्रमुख श्मशान घाटों पर भी अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, नाव चालकों को हिदायत दी गई है कि वे तेज बहाव और बढ़ते पानी के बीच पर्यटकों को लेकर गहरे पानी में न जाएं।
यदि आने वाले दिनों में यह बढ़ाव इसी रफ्तार से जारी रहा, तो निचले इलाकों के खेतों और अस्थायी निर्माणों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, मौसम विभाग और जल आयोग के पूर्वानुमान के अनुसार अभी किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं जताई गई है, फिर भी एहतियात के तौर पर सभी विभागों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी
वाराणसी घूमने आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों से अपील की गई है कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। स्नान करते समय गहरे पानी में जाने से बचें और नाव की सवारी के दौरान लाइफ जैकेट का अनिवार्य रूप से उपयोग करें। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और पल-पल की रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है।