वाराणसी के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व वाले क्षेत्र सीर गोवर्धनपुर में इन दिनों विकास के दावों की कलई खुलती नजर आ रही है। संत शिरोमणि गुरु रविदास की जन्मस्थली के समीप बने भव्य रविदास पार्क के ठीक सामने सड़क की बदहाली ने स्थानीय लोगों, स्कूली बच्चों और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का जीना मुहाल कर दिया है। सड़क पर लंबे समय से जमा सीवर का गंदा पानी और उसमें बने गहरे गड्ढे किसी बड़े हादसे को दावत दे रहे हैं। स्थिति यह है कि इस मार्ग से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है।
अदृश्य गड्ढे और गंदे पानी का दलदल
इस मार्ग की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि सड़क पर जलभराव के कारण गड्ढों का अनुमान लगाना असंभव हो जाता है। सीवर के काले और बदबूदार पानी के नीचे छिपे ये गहरे गड्ढे दोपहिया वाहन चालकों, ई-रिक्शा चालकों और साइकिल सवारों के लिए रोजाना दुर्घटना का कारण बन रहे हैं। वाहन अचानक इन गड्ढों में धंस जाते हैं, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर पलट जाते हैं और लोग चोटिल हो जाते हैं। कई बार राहगीरों के कपड़े और जरूरी सामान गंदे पानी में गिरकर खराब हो चुके हैं। स्थानीय दुकानदारों और निवासियों का कहना है कि अब यह यहां की रोजमर्रा की तस्वीर बन चुकी है, जिसे बदलने के लिए प्रशासन गंभीर दिखाई नहीं दे रहा है।
संक्रामक बीमारियों का मंडराता खतरा
सड़क पर महीनों से रुके हुए सीवर के पानी ने अब महामारी जैसी आशंकाओं को जन्म दे दिया है। तेज धूप निकलते ही इस गंदे पानी से उठने वाली भीषण दुर्गंध ने आसपास के लोगों का रहना दूभर कर दिया है। मक्खी-मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, जिससे इलाके में मलेरिया, डेंगू, और टाइफाइड जैसी जल जनित और संक्रामक बीमारियों का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय लोग अपने घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने को मजबूर हैं, लेकिन इसके बावजूद सड़न की बदबू कम नहीं होती।बच्चों और मरीजों के लिए दोहरी मुसीबत
रविदास पार्क और मंदिर के आसपास का यह क्षेत्र शिक्षा का भी एक प्रमुख केंद्र है। यहाँ के स्थानीय निवासी अशोक कुमार के अनुसार, सड़क के इर्द-गिर्द छोटे बच्चों के चार से पांच विद्यालय संचालित होते हैं। रोजाना सुबह और छुट्टी के समय सैकड़ों मासूम बच्चों को इसी दूषित पानी और कीचड़ भरे रास्ते से होकर अपने स्कूल जाना पड़ता है। बच्चों के कंधों पर भारी-भरकम बस्ते होते हैं और ऐसे में पैर फिसलने पर उनके गंभीर रूप से चोटिल होने का डर हर पल बना रहता है।
सिर्फ स्कूली बच्चे ही नहीं, बल्कि यह मार्ग चिकित्सा के लिहाज से भी अत्यंत संवेदनशील है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), सुंदरलाल चिकित्सालय और अत्याधुनिक ट्रॉमा सेंटर की ओर आने-जाने वाले एम्बुलेंस और मरीजों के तीमारदार भी इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। गंभीर मरीजों को लेकर जा रही गाड़ियों का इन गड्ढों में फंस जाना उनकी जान पर भारी पड़ सकता है, लेकिन इस आपातकालीन स्थिति की गंभीरता को भी जिम्मेदार अधिकारी समझने को तैयार नहीं हैं।जब पानी में बैठकर किया गया अनोखा विरोध
प्रशासनिक तंत्र की नींद तोड़ने के लिए स्थानीय स्तर पर विभिन्न प्रयास किए जा चुके हैं। कुछ समय पहले राजनीतिक कार्यकर्ता अमन यादव ने अनोखा विरोध प्रदर्शन करते हुए सड़क पर भरे सीवर के गंदे पानी में बैठकर स्नान किया था और शासन-प्रशासन के खिलाफ रोष प्रकट किया था। इस अनोखे विरोध के बाद हरकत में आए प्रशासन ने पानी निकालने के लिए आनन-फानन में पंप तो लगवा दिया, लेकिन वह महज एक खानापूर्ति साबित हुआ। पंप हटाए जाने के कुछ ही दिनों बाद हालात फिर से जस के तस हो गए और सड़क पर दोबारा गंदा पानी जमा हो गया। जनता का आरोप है कि प्रशासन केवल तात्कालिक राहत देता है, जबकि उन्हें एक स्थायी समाधान की दरकार है।
जिम्मेदारों की खामोशी पर उठ रहे सवाल
क्षेत्रीय जनता और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इस गंभीर समस्या से जुड़े तमाम प्रार्थना पत्र स्थानीय पार्षद से लेकर विधायक, महापौर और नगर आयुक्त तक को सौंपे जा चुके हैं। हर बार केवल आश्वासन की घुट्टी पिलाई जाती है, जमीन पर धरातल पर कोई सुधार दिखाई नहीं देता। सीर गोवर्धनपुर में संत रविदास की जयंती के अवसर पर देश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में श्रद्धालु और वीआईपी मेहमान आते हैं। यदि समय रहते इस सीवर और सड़क की समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो यह धार्मिक नगरी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर भी शर्मिंदगी का विषय बन सकता है।
जनता की प्रमुख मांगें
- सड़क पर लगातार बह रहे सीवर के पानी को रोकने के लिए तत्काल पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
- गहरे हो चुके गड्ढों को भरकर सड़क की नए सिरे से मजबूत मरम्मत कराई जाए।
- वर्षा जल और सीवर निकासी के लिए एक बेहतर ड्रेनेज सिस्टम (Drainage System) का निर्माण हो।
- लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति न हो।
फिलहाल, सीर गोवर्धनपुर के नागरिक हर दिन दुर्घटनाओं के साये में जीने को मजबूर हैं। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस खबर के सामने आने के बाद कितनी जल्दी हरकत में आता है और कब तक आम जनता को इस नरकीय जीवन से मुक्ति मिलती है।