महाराष्ट्र का ऐतिहासिक और औद्योगिक रूप से महत्वपूर्ण जिला छत्रपति संभाजीनगर इस वर्ष गंभीर सूखे की चुनौती का सामना कर रहा है। मानसून की बेरुखी के चलते जिले में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे जल संकट और कृषि क्षेत्र पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर इच्छाशक्ति मजबूत हो तो आपदा को भी अवसर में बदला जा सकता है, और यही मिसाल पेश कर रहे हैं जिले के जिलाधिकारी विनय गौडा जी. सी.। सूखे की इस भीषण चुनौती के बीच भी जिले की विकास यात्रा को थमने नहीं दिया जाएगा, बल्कि इसे और तेज रफ्तार दी जाएगी।
हाल ही में मीडिया हाउस के संपादकीय विभाग के साथ एक विस्तृत और अनौपचारिक चर्चा के दौरान, जिलाधिकारी विनय गौड़ा ने आगामी समय के लिए संभाजीनगर का एक व्यापक और विजनरी रोडमैप देश के सामने रखा। इस रोडमैप में कृषि, उद्योग, रोजगार, बुनियादी ढांचा, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे तमाम अहम सेक्टर शामिल हैं, जिन पर युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि सूखे के साये के बीच संभाजीनगर किस तरह विकास की नई इबारत लिखने जा रहा है।
8 हजार एकड़ में नया औद्योगिक विस्तार और युवाओं के लिए रोजगार
संभाजीनगर को औद्योगिक हब के रूप में नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रशासन ने जमीन की कमी को दूर करने का पुख्ता इंतजाम कर लिया है। वर्तमान में जिले में टोयोटा, जेएसडब्ल्यू और आथर जैसी दिग्गज और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रोजेक्ट्स पर काम तेजी से चल रहा है, जिनके जल्द ही कमर्शियल उत्पादन शुरू करने की उम्मीद है। इन बड़ी कंपनियों के आने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार केार के अनगिनत द्वार खुलेंगे।
औद्योगिक भूमि की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए घारदोन और गाडीवाट क्षेत्र में लगभग 8 हजार एकड़ जमीन पर एक विशाल नया औद्योगिक क्षेत्र प्रस्तावित किया गया है। इसके अलावा, आरापूर में भी 750 हेक्टेयर भूमि पर नया इंडस्ट्रियल जोन विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। राहत की बात यह है कि इस योजना के लिए आधे से अधिक किसानों ने स्वेच्छा से अपनी जमीन देने पर सहमति जता दी है, जो प्रशासन और जनता के बीच आपसी भरोसे को दर्शाता है।
कौशल प्रशिक्षण पर विशेष जोर
सिर्फ फैक्ट्रियां लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि स्थानीय युवाओं को उनके अनुकूल ढालना भी जरूरी है। इसे ध्यान में रखते हुए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) के क्लस्टर के लिए 238 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश को मंजूरी मिल चुकी है। ऑटोमोबाइल सेक्टर की दिग्गज कंपनी 'बेलराइज इंडस्ट्रीज' इसमें प्रमुख औद्योगिक भागीदार के रूप में अपनी भूमिका निभा रही है। आईटीआई, आईटी और ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़े विशेष कोर्स के जरिए युवाओं को ट्रेंड किया जाएगा, ताकि उन्हें तुरंत रोजगार मिल सके।
18 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड बदलेगा यातायात की तस्वीर
शहर के भीतर बढ़ते ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए एक और बड़ा फैसला लिया गया है। कैम्ब्रिज चौक से वालूज तक लगभग 18 किलोमीटर लंबे उन्नत मार्ग (Elevated Road) के निर्माण का प्रस्ताव अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
यातायात में बाधा बनने वाले प्रमुख बॉटलनेक्स (Bottlenecks) की पहचान कर ली गई है। विशेष तौर पर गोलवाडी से वालूज मार्ग पर चार ऐसे प्रमुख बाधा बिंदु सामने आए हैं, जिन्हें सुधारा जाएगा। इसके साथ ही, बिडकीन बाईपास और इस पूरे रूट पर आने वाले अन्य गांवों के लिए बाईपास का सर्वे भी तेजी से किया जा रहा है, ताकि लंबी दूरी के वाहनों को शहर के अंदर न आना पड़े और आवाजाही पूरी तरह सुगम हो सके।
अजंता से घृष्णेश्वर तक पर्यटन को मिलेगा नया पंख
छत्रपति संभाजीनगर अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और पर्यटन के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। अजंता-एलोरा की गुफाएं, ऐतिहासिक दौलताबाद का किला, भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर और पैठण जैसी जगहों पर देश-विदेश से पर्यटक खिंचे चले आते हैं। प्रशासन अब इन सभी पर्यटन केंद्रों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने की योजना पर काम कर रहा है।
- बुनियादी सुविधाएं: पर्यटन स्थलों तक पहुंचने के लिए गुणवत्तापूर्ण सड़कें, निरंतर बिजली और पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
- परिवहन और सुरक्षा: बेहतर बस कनेक्टिविटी और मजबूत सुरक्षा तंत्र से पर्यटकों का अनुभव और बेहतर होगा।
- घृष्णेश्वर और आगामी कुंभ मेला: आगामी कुंभ मेले के मद्देनजर घृष्णेश्वर मंदिर परिसर में विकास कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सभी कार्य समय पर पूरा करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
64 प्रतिशत बारिश ने बढ़ाई चिंता, लेकिन जलसंधारण से होगा मुकाबला
इस वर्ष मानसून के दौरान जिले में केवल 64 प्रतिशत ही बारिश दर्ज की गई है, जिसके कारण लगभग 40 प्रतिशत तक की भारी वर्षा की कमी (Rainfall Deficit) पैदा हो गई है। जायकवाडी बांध को छोड़कर जिले के बाकी सभी मध्यम और लघु जल परियोजनाओं में 40 प्रतिशत से भी कम पानी बचा है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर इन बांधों के शेष पानी को पूरी तरह से पीने के लिए आरक्षित कर दिया है।
फसलों के नुकसान का आकलन करने के लिए फसल सर्वेक्षण का काम तेजी से चल रहा है और अब तक लगभग 40 प्रतिशत क्षेत्र का सर्वे पूरा किया जा चुका है। कुल 7 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में यह सर्वेक्षण जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। वहीं, ग्रामीण इलाकों में आजीविका संकट से निपटने के लिए रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS) के तहत फिलहाल 15 हजार से अधिक मजदूर काम कर रहे हैं, और इसे बढ़ाकर 50 हजार से ज्यादा नागरिकों को रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है।
सूखे की इस मार से निपटने के लिए सबसे बड़ा हथियार जलसंधारण (Water Conservation) को बनाया गया है। जिला नियोजन समिति (DPC) के फंड का अधिकतम हिस्सा नाला गहरीकरण, नाला चौड़ीकरण, नए तालाबों के निर्माण और पुराने बांधों से गाद निकालने के कार्यों पर खर्च किया जाएगा। इसके साथ ही, आगामी फरवरी महीने तक पशुओं के लिए चारे की कोई कमी न हो, इसकी पुख्ता व्यवस्था भी की जा रही है।
शिक्षा और स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव
सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने के लिए एक अनूठी पहल की शुरुआत की जा रही है। 'नवोदय विद्यालय' की तर्ज पर जिले के दो सरकारी स्कूलों को आपस में मिलाकर एक अत्याधुनिक कैंपस विकसित किया जाएगा। इन मॉड्यूलर स्कूलों में उच्च प्रशिक्षित शिक्षक, आधुनिक लैब्स, बड़े भवन और शानदार खेल के मैदान जैसी तमाम सुविधाएं मिलेंगी। एक स्कूल के आधुनिकीकरण पर लगभग 8 से 10 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
दूसरी ओर, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और उप-स्वास्थ्य केंद्रों की कमियों को दूर करके उन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। इसके अलावा, प्रमुख राज्य मार्गों (State Highways) के पास अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस ट्रॉमा केयर और अस्पताल विकसित करने की भी रूपरेखा तैयार की गई है।
सरकारी जमीन पर शिकंजा और ऐतिहासिक भूमि अभिलेखों की जांच
प्रशासन ने पारदर्शिता और कानून का राज स्थापित करने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया है। जिले में वर्ष 1950 से लेकर अब तक के तमाम भूमि अभिलेखों की गहराई से जांच की जा रही है। अब तक कुल 14,642 भूखंडों का सर्वे पूरा किया जा चुका है।
इस व्यापक जांच के दौरान 3,500 से अधिक मामले 'शर्तभंग' (Violation of Land Conditions) के पाए गए हैं। इन सभी मामलों पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से कब्जाई गई या शर्तों का उल्लंघन करने वाली सरकारी जमीनों को वापस सरकार के नाम दर्ज कराया जा रहा है। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी जमीनों की स्पष्ट सीमाएं तय करके वहां चेतावनी और सूचना पट लगाए जा रहे हैं ताकि भविष्य में अतिक्रमण न हो सके।
कृषि योजनाओं में देश के टॉप-10 जिलों में शुमार
चुनौतियों के बीच संभाजीनगर प्रशासन ने कई मोर्चों पर शानदार सफलता भी हासिल की है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जिले में लगभग 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरे किए जा चुके हैं। आवासहीनों को राहत देते हुए लाभार्थियों को पांच ब्रास रेत बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही है।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के बेहद प्रभावी और सफल क्रियान्वयन के मामले में छत्रपति संभाजीनगर ने देश के सर्वश्रेष्ठ 10 जिलों में अपना नाम दर्ज कराया है। इस राष्ट्रीय उपलब्धि के लिए जिलाधिकारी विनय गौडा जी. सी. को आगामी 12 अक्टूबर को दिल्ली में केंद्र सरकार द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। गौरतलब है कि इससे पहले वर्ष 2022 में जब वे चंद्रपुर जिले के जिलाधिकारी थे, तब भी उन्हें राज्य के 'सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारी' के पुरस्कार से नवाजा जा चुका है।
संकट चाहे जितना भी बड़ा क्यों न हो, अगर प्रशासनिक इच्छाशक्ति और दूरदर्शिता मजबूत हो तो हर चुनौती को पार किया जा सकता है। संभाजीनगर का यह नया रोडमैप इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि जिला सूखे के कठिन दौर से गुजरने के बावजूद विकास के पथ पर बिना रुके, बिना थके लगातार आगे बढ़ता रहेगा।