प्रशासनिक गलियारों में जब किसी बड़े अधिकारी के औचक निरीक्षण की खबरें सामने आती हैं, तो महकमे में हड़कंपमच जाना स्वाभाविक है। कुछ ऐसा ही नजारा तब देखने को मिला जब एक जिले की तेज-तर्रार जिलाधिकारी ने बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे ग्रामीण इलाके के एक सरकारी स्कूल का रुख कर लिया। मामला बिहार के जहानाबाद जिले से जुड़ा है, जहां की डीएम ने क्लासरूम के अंदर जाकर न सिर्फ जमीनी हकीकत परखी, बल्कि बच्चों के साथ बैठकर सरकारी मिड-डे मील का स्वाद भी चखा। इस दौरान स्कूल की कई ऐसी खामियां उजागर हुईं, जिन्हें देखकर प्रशासनिक अमला भी हैरान रह गया।
मखदुमपुर मध्य विद्यालय में अचानक पहुंचीं डीएम
जहानाबाद की जिलाधिकारी श्रीमती छिरिड़ वाई भूटिया ने प्रशासनिक कसावट लाते हुए मखदुमपुर स्थित मध्य विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। अमूमन जब कोई वरिष्ठ अधिकारी स्कूल पहुंचता है, तो व्यवस्थाएं रातों-रात दुरुस्त कर दी जाती हैं, लेकिन इस बार मामला बिल्कुल अलग था। डीएम के अचानक स्कूल परिसर में कदम रखते ही शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गए। बिना किसी तामझाम के सीधे कक्षाओं और परिसर का जायजा लेने पहुंचीं डीएम ने सबसे पहले बच्चों की उपस्थिति और मध्याह्न भोजन व्यवस्था की पड़ताल की।
निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा बच्चों की उपस्थिति को लेकर सामने आया। विद्यालय के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार स्कूल में कुल 948 बच्चे नामांकित (Enrolled) हैं, लेकिन जब धरातल पर गिनती हुई तो हकीकत कुछ और ही बयां कर रही थी। स्कूल में उस दिन केवल 558 बच्चे ही उपस्थित पाए गए। यानी करीब 400 बच्चे स्कूल से नदारद थे। वहीं दूसरी ओर, विद्यालय में तैनात कुल 20 शिक्षकों में से 17 शिक्षक मौके पर मौजूद मिले। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की अनुपस्थिति पर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी व्यक्त की और स्कूल के प्रधानाध्यापक तथा शिक्षकों को कड़ी फटकार लगाई।
बच्चों के बीच बैठकर खाया मिड-डे मील, जांची गुणवत्ता
औचक निरीक्षण के दौरान सबसे दिलचस्प पल तब आया जब डीएम छिरिड़ वाई भूटिया सीधे बच्चों के बीच जमीन पर बैठ गईं। उन्होंने किसी वीआईपी ट्रीटमेंट की परवाह किए बिना बच्चों के साथ ही परोसे जा रहे मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) को थाली में लिया और उसकी गुणवत्ता की खुद जांच की। भोजन चखने के बाद उन्होंने रसोई की साफ-सफाई और खाने के स्वाद को लेकर भी पड़ताल की। हालांकि भोजन की गुणवत्ता तो ठीक पाई गई, लेकिन इसके रखरखाव और प्रबंधन से जुड़े कागजात में बड़ी लापरवाही सामने आई।
एमडीएम पंजियों का नहीं था सही संधारण
जब निरीक्षण टीम ने मिड-डे मील से जुड़े दस्तावेजों और रजिस्टरों की जांच की, तो प्रशासनिक लापरवाही की परतें उधड़ने लगीं। मध्याह्न भोजन योजना से संबंधित पंजियां (Registers) मौके पर अपडेट या संधारित नहीं पाई गईं। राशन के उठाव, रोजाना बनने वाले भोजन की मात्रा और बच्चों की संख्या का हिसाब रखने वाले रजिस्टर अद्यतन न मिलने पर डीएम ने भारी असंतोष जताया। उन्होंने तुरंत प्रभाव से प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण (Show Cause Notice) मांगने का निर्देश संबंधित शिक्षा अधिकारियों को दिया।
शौचालय की खराब साफ-सफाई पर फूटा गुस्सा
किताबी शिक्षा और मिड-डे मील के बाद जब जिलाधिकारी की नजर स्कूल परिसर के शौचालयों पर पड़ी, तो उनका पारा चढ़ गया। विद्यालय में बने शौचालयों की साफ-सफाई की व्यवस्था बेहद दयनीय और अस्वच्छ पाई गई। बच्चों के स्वास्थ्य के साथ इस तरह की लापरवाही को बेहद गंभीरता से लेते हुए डीएम ने स्कूल प्रबंधन और संबंधित महकमे के अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया कि विद्यालय परिसर और विशेष रूप से बच्चों के उपयोग वाले क्षेत्रों में स्वच्छता से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए सख्त निर्देश
बच्चों की कम उपस्थिति, अपूर्ण पंजियों और साफ-सफाई के मोर्चे पर फैली अव्यवस्था को लेकर डीएम ने शिक्षकों और स्कूल प्रशासन के साथ लंबी चर्चा की। उन्होंने अध्यापकों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे केवल कागजी खानापूर्ति न करें, बल्कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करें कि छात्र-छात्राएं नियमित रूप से विद्यालय आएं। अभिभावकों से संपर्क साधकर बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा गया।
आगे भी जारी रहेगा औचक निरीक्षण का सिलसिला
प्रशासन की तरफ से साफ कर दिया गया है कि सरकारी विद्यालयों की दशा सुधारने और शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने के लिए यह औचक निरीक्षण अभियान सिर्फ एक शुरुआत है। आने वाले दिनों में जिले के अन्य ग्रामीण और शहरी इलाकों के स्कूलों में भी इस तरह की औचक जांच की जाएगी ताकि लापरवाह कर्मियों पर नकेल कसी जा सके। डीएम के इस कड़े रुख से पूरे जिले के शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और शिक्षकों के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि अब किसी भी तरह की कोताही सहन नहीं की जाएगी।