छत्तीसगढ़ में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे को एक नया आयाम देने की तैयारी तेजी से चल रही है। राज्य में गांवों की तस्वीर बदलने के लिए 'विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)' यानी वीबी-जीरामजी के दायरे को काफी बड़ा कर दिया गया है। अब इस योजना के तहत होने वाले अनुमेय कार्यों की संख्या 318 से बढ़ाकर सीधे 375 कर दी गई है। सरकार के इस कदम से गांवों में रोजगार के नए अवसर तो पैदा होंगे ही, साथ ही स्थाई संपत्तियों के निर्माण से ग्रामीण इलाकों का विकास भी तेजी से गति पकड़ेगा।
इस पूरे बदलाव और विस्तार पर अपनी बात रखते हुए उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने खुशी जताई है। उन्होंने बताया कि कार्यों की इस सूची में जल संरक्षण से लेकर सड़क निर्माण, स्कूल भवनों का कायाकल्प, पंचायत भवन, आजीविका के साधन, कृषि, पशुपालन और आपदा प्रबंधन जैसी महत्वपूर्ण चीजों को शामिल किया गया है। राज्य सरकार ने इस महत्वाकांक्षी मिशन को धरातल पर उतारने के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में पूरे 4 हजार करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रावधान किया है, जो ग्रामीण इलाकों की तकदीर बदलने में मील का पत्थर साबित हो सकता है.
असमर्थ श्रमिकों के लिए मजदूरी में बढ़ोतरी और केंद्र से मिला फंड
ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले अकुशल श्रमिकों के लिए भी खुशखबरी है। सरकार ने उनकी दैनिक मजदूरी दर को 261 रुपये से बढ़ाकर अब सीधा 300 रुपये प्रतिदिन कर दिया है। इससे सीधे तौर पर लाखों ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने भी इस मिशन के प्रभावी संचालन के लिए छत्तीसगढ़ को 3,354.85 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन जारी कर दिया है।
उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'विकसित भारत 2047' की परिकल्पना में गांवों को विकास की धुरी या केंद्रीय इकाई के रूप में देखा गया है। इसी विजन को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ में गांवों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए जमीनी स्तर पर काम किया जा रहा है।
क्यूआर कोड से मिलेगी कार्यों की पूरी जानकारी
पारदर्शिता और आधुनिकता को अपनाते हुए सरकार ने इन सभी 375 अनुमेय कार्यों को बेहद व्यवस्थित तरीके से बांटा है। इन्हें कुल 4 मुख्य श्रेणियों और 30 उप-श्रेणियों के अंतर्गत रखा गया है। इन कार्यों में 68 प्रकार के व्यक्तिगत कार्य, 99 प्रकार के मरम्मत और रखरखाव के काम शामिल हैं, इसके अलावा समूह और सामुदायिक उपयोगिता से जुड़े प्रोजेक्ट्स को भी जगह मिली है। सबसे खास बात यह है कि आम जनता या हितग्राही अब एक क्यूआर कोड के जरिए इन सभी 375 कार्यों की पूरी जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।
स्कूलों की सुधरेगी स्थिति, 2027 तक हर बालिका के लिए शौचालय का लक्ष्य
वीबी-जीरामजी मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय विद्यालयों की दशा सुधारने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करते हुए शौचालयों की मरम्मत, नए अतिरिक्त कक्षों का निर्माण, साइंस लैब, रसोई शेड, बाउंड्री वॉल (परिसर की दीवार) और खेल मैदान जैसे विकास कार्य कराए जाएंगे।
योजना के तहत एक बेहद कड़ा और तय लक्ष्य रखा गया है। इसके अनुसार, आगामी 26 जनवरी 2027 तक ग्रामीण इलाकों के सभी शासकीय विद्यालयों में कुल 6,671 बालिका शौचालयों का निर्माण युद्ध स्तर पर पूरा कर लिया जाएगा ताकि छात्राओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
हर गांव में मुक्तिधाम और प्रतीक्षालय का निर्माण
राज्य सरकार गांवों में बुनियादी सामुदायिक सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार नए कदम उठा रही है। इसी कड़ी में हर गांव में आधुनिक सुविधाओं से युक्त मुक्तिधाम के निर्माण का संकल्प लिया गया है। वर्तमान में राज्य के 6,524 गांवों में प्रतीक्षालय और मुक्तिधाम के निर्माण पर तेजी से काम चल रहा है।
इसके साथ ही, राज्य में गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए जल संरक्षण को सबसे ऊपर रखा गया है। इसके तहत राज्यभर के 10 हजार से अधिक बंद या खराब पड़े (डिफंक्ट) बोरवेल्स में सैंड फिल्टर और रिचार्ज संरचनाएं तैयार की जाएंगी, ताकि भूजल का पुनर्भरण (Groundwater Recharge) बेहतर तरीके से हो सके।
चार मुख्य श्रेणियों में बंटे हैं ये 375 कार्य
सरकार द्वारा तय किए गए इन 375 कार्यों को कुल चार अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया है ताकि हर क्षेत्र का संतुलित विकास हो सके:
- जल संरक्षण और जल सुरक्षा: इसमें नहर निर्माण, बाढ़ नियंत्रण चैनल, चेकडैम, भूमिगत डाइक, तालाबों का जीर्णोद्धार, परकोलेशन टैंक, रिचार्ज पिट, सिंचाई कुएं, ड्रिप सिंचाई चैनल, वनीकरण, पौधरोपण और रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग शामिल हैं।
- ग्रामीण अधोसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर): इसके अंतर्गत ग्रामीण सड़कें, पुलिया, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, पुस्तकालय, स्कूल भवन, श्मशान घाट, कब्रिस्तान, सॉलिड-लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट, सौर ऊर्जा व्यवस्था और बायोगैस प्लांट जैसे कार्य आते हैं।
- आजीविका और स्थानीय आय के साधन: इसमें कौशल विकास केंद्र, स्वयं सहायता समूहों के लिए वर्कशेड, ग्रामीण हाट बाजार, कोल्ड स्टोरेज, वर्मी कम्पोस्ट इकाइयां, डेयरी, पशु आश्रय और मत्स्य पालन से जुड़ी संरचनाएं बनाई जाएंगी।
- आपदा प्रबंधन और चरम मौसम से मुकाबला: इसके तहत चक्रवात और बाढ़ आश्रय गृह, तटबंध, रिटेनिंग वॉल, बाढ़ सुरक्षा दीवार, वन अग्नि प्रबंधन और आपदा के बाद सड़कों का पुनर्स्थापन जैसे कार्य किए जाएंगे।
महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा
इस मिशन के तहत महिला समूहों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। स्व-सहायता समूहों के वास्ते अलग से वर्कशेड और कम्युनिटी लेवल की गतिविधियों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किए जाने से ग्रामीण महिलाओं को अपनी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए बेहतर जगह और संसाधन मिल सकेंगे। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
अंत में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने जोर देकर कहा कि वीबी-जीरामजी केवल मजदूरों को काम देने भर की योजना नहीं है, बल्कि यह गांवों की आर्थिक क्षमता को कई गुना बढ़ाने, प्रकृति और जल स्रोतों का संरक्षण करने, स्थानीय आजीविका को धार देने और टिकाऊ ग्रामीण अधोसंरचना खड़ी करने का एक बहुत बड़ा जरिया है। सरकार इन 375 कार्यों के जरिए रोजगार को सीधे परिसंपत्ति निर्माण से जोड़कर एक विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव रख रही है।