छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के सबसे बड़े वित्तीय संस्थानों में शुमार जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, जगदलपुर ने अपनी वित्तीय मजबूती का एक नया और शानदार अध्याय लिखा है। हाल ही में संपन्न हुई बैंक की 78वीं वार्षिक आमसभा में एक ऐसा ऐलान किया गया है, जिसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों से जुड़ी सहकारी संस्थाओं में नई ऊर्जा भर दी है। तमाम चुनौतियों और विपरीत परिस्थितियों को पार करते हुए बैंक ने इस वित्तीय वर्ष में लगभग 19 करोड़ रुपये का बंपर शुद्ध मुनाफा अर्जित किया है। बैंक के बोर्ड ने इस शानदार मुनाफे का एक चौथाई हिस्सा, यानी पूरे 25 प्रतिशत की राशि सीधे तौर पर सहकारी समितियों को बोनस के रूप में बांटने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
वार्षिक आमसभा में गूंजी सहकारिता की सफलता की कहानी
शनिवार को आयोजित इस 78वीं वार्षिक आमसभा में न केवल बैंक के बैलेंस शीट की चमक दिखाई दी, बल्कि सहकारिता के जरिए आम किसानों और ग्रामीण अंचल के विकास की ठोस रूपरेखा भी तैयार की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में बैंक के अध्यक्ष दिनेश कश्यप, उपाध्यक्ष श्रीनिवास मिश्रा, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता शिवनारायण पाण्डेय के साथ-साथ क्षेत्र के दूर-दराज से आए प्रगतिशील किसान, विभिन्न सहकारी समितियों के प्रतिनिधि और बैंकिंग सेक्टर से जुड़े तमाम दिग्गज मौजूद रहे।
बैठक की शुरुआत में बैंक की मौजूदा वित्तीय सेहत और पिछले साल के मुकाबले आए सुधार पर विस्तार से चर्चा की गई। बैंक के शीर्ष नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है, बल्कि इसके पीछे अंशधारी सदस्यों, किसानों, अमानतदारों, ग्राहकों और बैंक के समर्पित अधिकारियों व कर्मचारियों की सामूहिक मेहनत का पसीना लगा है।
"सभी के मिले-जुले सहयोग और दूरदर्शी मार्गदर्शन से हमारा बैंक सहकारिता की मूल भावना को जीवित रखते हुए कृषकों और ग्रामीण इलाकों की आर्थिक तरक्की में अपनी भूमिका बेहद प्रभावी ढंग से निभा रहा है। यह मुनाफा हम सबका है।" - दिनेश कश्यप, अध्यक्ष
समितियों की आर्थिक स्थिति को मिलेगी संजीवनी
बैंक के उपाध्यक्ष श्रीनिवास मिश्रा ने आमसभा के दौरान वित्तीय आंकड़ों को रखते हुए बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में बैंक ने लगभग 19 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है। इस लाभ में से 25 प्रतिशत राशि को सहकारी समितियों को बोनस के तौर पर देने के प्रस्ताव पर बोर्ड ने मुहर लगा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से सीधे तौर पर उन जमीनी स्तर की समितियों को मजबूती मिलेगी, जो गांव-गांव तक बैंकिंग और कृषि ऋण जैसी सेवाएं पहुंचाने का काम करती हैं। बोनस के रूप में मिलने वाली यह राशि समितियों के बुनियादी ढांचे को सुधारने और उनके दैनिक कामकाज को वित्तीय मोर्चे पर एक नई रफ्तार देगी।
ऋण वसूली और आगामी धान खरीद की पुख्ता तैयारियां
किसी भी वित्तीय संस्थान की रीढ़ उसकी ऋण वसूली (Recovery) होती है। आमसभा में कृषि ऋण और अन्य तरह के कर्जों की वसूली की मौजूदा स्थिति की भी बारीकी से समीक्षा की गई। बैंक प्रबंधन ने स्वीकार किया कि पिछले वर्षों के मुकाबले रिकवरी के आंकड़े सुधरे हैं, लेकिन अभी भी शत-प्रतिशत वसूली के लक्ष्य को भेदना बाकी है। आने वाले दिनों में इस प्रक्रिया को और अधिक कड़ाई और पारदर्शिता के साथ लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही, छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े कृषि उत्सव यानी आगामी धान खरीदी सीजन को लेकर भी बैठक में व्यापक मंथन हुआ। किसानों को अपनी फसल बेचने के दौरान किसी भी प्रकार की कतारों, तकनीकी बाधाओं या भुगतान में देरी का सामना न करना पड़े, इसके लिए अभी से पुख्ता इंतजाम करने पर जोर दिया गया। धान खरीदी केंद्रों पर छांव, पानी, तौल मशीनों और कंप्यूटरीकृत व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद रखने के निर्देश समितियों को दिए गए हैं ताकि समूची प्रक्रिया पूरी तरह सुचारू रूप से चल सके।
कर्मचारियों के नियमितीकरण और नई भर्तियों पर बड़ा अपडेटबैंकिंग सेवाओं का दायरा बढ़ाने और गांवों के अंतिम छोर तक आधुनिक सुविधाएं पहुंचाने में मैनपावर (कर्मचारियों) की कमी एक बड़ा रोड़ा रही है। इस गंभीर विषय पर बोलते हुए उपाध्यक्ष श्रीनिवास मिश्रा ने एक राहत भरी खबर साझा की। उन्होंने बताया कि बैंक में लंबे समय से अटके मामलों को सुलझाते हुए 114 कर्मचारियों को नियमित करने की प्रक्रिया वर्तमान में तेजी से आगे बढ़ रही है।
इसके अलावा, शासन स्तर पर छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) के माध्यम से लगभग 100 नए पदों पर सीधी भर्ती का प्रस्ताव भी शासन को भेजा जा चुका है। इन नई नियुक्तियों के बाद बैंक की कार्यक्षमता में जबरदस्त इजाफा होने की पूरी उम्मीद है।
सहकारी समितियों को सशक्त बनाना मुख्य प्राथमिकता
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता शिवनारायण पाण्डेय ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि सहकारी समितियां असल में पूरी बैंकिंग व्यवस्था की सबसे अहम और मजबूत कड़ी हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जब तक ये समितियां आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और मजबूत नहीं होंगी, तब तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं और ऋण नीतियां पूरी क्षमता के साथ धरातल पर नहीं उतर सकतीं। समितियों की आय बढ़ाना और उन्हें व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाना ही सरकार और बैंक का मुख्य ध्येय होना चाहिए।भविष्य की कार्ययोजना और उम्मीदें
जगदलपुर केंद्रीय सहकारी बैंक की यह 78वीं आमसभा महज एक सालाना बैठक तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने आने वाले समय के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार कर दिया है। 19 करोड़ का मुनाफा और उस पर समितियों को मिलने वाला 25 प्रतिशत बोनस इस बात का प्रमाण है कि यदि नीयत साफ हो और प्रबंधन मजबूत हो, तो सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण भारत की तकदीर और तस्वीर दोनों को बदला जा सकता है। आने वाले महीनों में देखना दिलचस्प होगा कि बैंक इन योजनाओं को कितनी तेजी से जमीन पर उतार पाता है।