छत्तीसगढ़ में किसानों की सुविधा के विस्तार के लिए राज्य सरकार ने धान खरीदी व्यवस्था में एक बड़ा कदम उठाते हुए 360 नए उपार्जन केंद्र स्वीकृत किए हैं। इन नए केंद्रों के जुड़ने से अब प्रदेशभर में धान खरीदी केंद्रों की कुल संख्या बढ़कर 3100 हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में लिए गए इस निर्णय से राज्य के दो लाख से अधिक किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों की परेशानियां कम होंगी।
पारंपरिक रूप से धान बेचने के लिए किसानों को दूरदराज के केंद्रों तक लंबी दूरियां तय करनी पड़ती थीं, जिससे भारी परिवहन खर्च और समय की बर्बादी होती थी। नए उपार्जन केंद्रों के ग्रामीण क्षेत्रों के करीब खुलने से किसानों के समय और पैसे दोनों की बचत होगी। इसके साथ ही, मौजूदा केंद्रों पर लगने वाली लंबी कतारें भी कम होंगी, जिससे तौल और गुणवत्ता परीक्षण जैसी प्रक्रियाएं अधिक तेजी से पूरी की जा सकेंगी।
खरीदी से पहले ट्रायल रन और तैयारियां
राज्य सरकार ने आगामी धान खरीदी सत्र की सभी प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं। किसी भी तकनीकी बाधा या व्यवधान से बचने के लिए समितियों में 2 से 5 नवंबर के बीच ट्रायल रन आयोजित किया जाएगा। इस अभ्यास का उद्देश्य खरीदी प्रक्रिया शुरू होने से पहले सॉफ़्टवेयर, डेटा एंट्री या तौल उपकरणों में आने वाली कमियों को समय रहते दूर करना है।
किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए समितियों के अनावश्यक चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए डिजिटल व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। सरकार द्वारा शुरू किए गए 'तुंहर टोकन' मोबाइल एप के माध्यम से किसान घर बैठे 24 घंटे ऑनलाइन टोकन प्राप्त कर सकेंगे। इस व्यवस्था से उपार्जन केंद्रों पर लगने वाली अनावश्यक भीड़भाड़ से पूरी तरह निजात मिलने की संभावना है। किसानों को 10 नवंबर से टोकन मिलने शुरू हो जाएंगे।
खरीदी की समय-सारणी
आधिकारिक घोषणा के अनुसार, छत्तीसगढ़ में इस वर्ष धान खरीदी की शुरुआत 15 नवंबर 2026 से होगी और यह प्रक्रिया 15 जनवरी 2027 तक निरंतर जारी रहेगी। शासन स्तर पर यह प्राथमिकता तय की गई है कि किसानों को उनकी उपज का भुगतान समय पर प्राप्त हो सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि अन्नदाताओं की संतुष्टि और उनकी आर्थिक सुदृढ़ता सरकार का मुख्य लक्ष्य है।