धमतरी नगर निगम क्षेत्र में राजस्व वसूली की प्रक्रिया को तेज करते हुए स्थानीय प्रशासन ने बड़े बकायेदारों के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में निगम ने संपत्तिकर के 70 सबसे बड़े बकायादारों को छत्तीसगढ़ नगर निगम अधिनियम के तहत धारा 174 का अंतिम नोटिस जारी किया है। इन सभी करदाताओं को अपना बकाया टैक्स जमा करने के लिए 30 दिन का स्पष्ट समय दिया गया है। निर्धारित अवधि के भीतर भुगतान न होने की स्थिति में संबंधित मकानों को कुर्क करने की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
धमतरी नगर निगम प्रशासन लंबे समय से राजस्व घाटे से जूझ रहा है, जिसे पाटने के लिए हाल ही में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकों में अधिकारियों को कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे। निगम के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, शहर भर से विभिन्न मदों में कुल 12 करोड़ 58 लाख 90 हजार रुपये का राजस्व वसूल किया जाना शेष है। इसमें अकेले संपत्तिकर की बकाया राशि 4 करोड़ 23 लाख 81 हजार रुपये है। निगम ने कुल 349 ऐसे डिफॉल्टरों की सूची तैयार की है, जिन पर भारी भरकम राशि बकाया है। इनमें से शुरुआती चरणों में धारा 173 के तहत नोटिस भेजे जा चुके हैं, और अब सबसे बड़े 70 डिफॉल्टरों को धारा 174 के तहत अंतिम चेतावनी दी गई है।
व्यापारिक परिसरों पर भी निगम की सख्ती
केवल आवासीय संपत्तियों तक ही यह कार्रवाई सीमित नहीं है, बल्कि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भी निगम का डंडा चला है। नगर निगम की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत शहर में कुल 550 दुकानें संचालित की जा रही हैं। इनमें से 27 दुकानदारों ने पिछले तीन वर्षों से किसी प्रकार का कर नहीं चुकाया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए निगम ने प्रशासनिक अमले के साथ मिलकर इनमें से 7 दुकानों को तुरंत प्रभाव से सील कर दिया है। इस अचानक की गई कार्रवाई का असर अन्य दुकानदारों पर भी देखा गया, जिसके परिणामस्वरूप महज तीन दिनों के भीतर निगम के खाते में 32 लाख रुपये की राजस्व वसूली हुई है।
जलकर न चुकाने वालों के कट रहे कनेक्शन
संपत्तिकर और दुकान किराए के साथ-साथ जलकर की वसूली के मोर्चे पर भी निगम ने सख्ती बढ़ा दी है। जिन उपभोक्ताओं ने लंबे समय से अपने नल का जलकर जमा नहीं किया है, उनके पानी के कनेक्शन काटे जा रहे हैं। अभियान के तहत नगर निगम की टीमों ने अब तक 7 से अधिक उपभोक्ताओं के नल कनेक्शन विच्छेदित कर दिए हैं। इसके अलावा, अन्य बकायादारों को भी चेतावनी दी गई है कि वे समय रहते अपना बकाया बिल भर दें, अन्यथा उन्हें भी इसी तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। निगम अधिकारियों का कहना है कि शहर के विकास कार्यों और बुनियादी सुविधाओं के सुचारू संचालन के लिए समय पर राजस्व का भुगतान अनिवार्य है, और यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक शत-प्रतिशत वसूली का लक्ष्य पूरा नहीं हो जाता।