उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दोनों दलों ने हमेशा से मुसलमानों को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया है और उन्हें समाज में नफरत फैलाना सिखाया है।
सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने बयान जारी करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी और समाजवादी पार्टी ने कभी भी समाज में भाईचारे और सौहार्द की बात नहीं की। उनका मुख्य उद्देश्य हमेशा से भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ अल्पसंख्यकों को भड़काना और उनका राजनीतिक लाभ उठाना रहा है। इसी राजनीतिक रणनीति के तहत अब तक मुस्लिम समुदाय का इस्तेमाल किया जाता रहा है, लेकिन अब लोग इनकी असलियत समझने लगे हैं।
विश्वविद्यालयों के दौरों पर खड़े किए सवाल
मंत्री राजभर ने विपक्षी दलों के नेताओं के विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के दौरों पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इन परिसरों में जाकर जिस प्रकार की बातें की जा रही हैं और नेताओं द्वारा उनका समर्थन किया जा रहा है, उससे साफ जाहिर होता है कि ये लोग प्रदेश में नफरत की राजनीति को बढ़ावा दे रहे हैं। ऐसे कृत्य युवाओं के बीच वैचारिक द्वेष पैदा करने का काम कर रहे हैं।
अखिलेश यादव की 'एआई राजनीति' पर तंज
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर व्यक्तिगत हमला बोलते हुए राजभर ने उनकी सोशल मीडिया पर सक्रियता और एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित वीडियो बनाने की शैली पर तंज कसा। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि अखिलेश यादव को एआई वीडियो बनाने का इतना ही शौक है, तो उन्हें अपनी पार्टी का नाम 'समाजवादी' से बदलकर 'एआई-वादी' रख लेना चाहिए। राजभर ने व्यंग्य करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सैफई महोत्सव आयोजित न कर पाने का मलाल अब वह एआई के माध्यम से पूरा कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों से सत्ता से बाहर रहने के बावजूद अखिलेश यादव ने जनता के बीच जाने के बजाय अपने आपको एसी कमरों और मोबाइल स्क्रीन तक सीमित रखा है। उन्होंने कहा कि धरतीपुत्र कहे जाने वाले दिवंगत मुलायम सिंह यादव के सिद्धांतों के विपरीत आज उनकी पार्टी को एआई वाली नौटंकी तक सीमित कर दिया गया है। स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव ने इस दल की स्थापना जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया, आचार्य नरेंद्र देव, कर्पूरी ठाकुर, चौधरी चरण सिंह और जनेश्वर मिश्रा जैसे दिग्गजों के आदर्शों पर की थी, जिसे मौजूदा नेतृत्व ने सोशल मीडिया के मनोरंजन का साधन बना दिया है।
जमीनी राजनीति और 2027 के विधानसभा चुनाव का दावा
राजभर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वास्तविक राजनीति मोबाइल स्क्रीन पर नाच-गाना करने या एआई रील बनाने से नहीं चलती, बल्कि गांव, गरीब और किसानों के बीच जाकर पसीना बहाने से होती है। यदि सपा प्रमुख चाहते तो पिछले एक दशक में प्रदेश के कोने-कोने में जाकर जनता की समस्याओं से रूबरू हो सकते थे, लेकिन उन्होंने आरामदेह जीवन को चुना।
गैर-यादव पिछड़ों और बहुजन समाज का जिक्र करते हुए सुभासपा अध्यक्ष ने कहा कि अब यह वर्ग भली-भांति जागरूक हो चुका है और अखिलेश यादव के किसी भी झांसे में नहीं आने वाला है। अति पिछड़े और बहुजन समाज को ऐसा नेतृत्व नहीं चाहिए जो खेत-खलिहान और जनता का साथ छोड़कर इंटरनेट पर मनोरंजन करे। मंत्री ने पूर्ण विश्वास जताया कि आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में राज्य की गरीब और मेहनतकश जनता इस प्रकार की वर्चुअल राजनीति का ऐसा करारा जवाब देगी कि सपा के चुनाव चिह्न 'साइकिल' के पुर्जे तक बिखर जाएंगे।