भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (BIRC) 2026 में किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें सीधे वैश्विक बाजारों से जोड़ने पर जोर दिया गया है।
नई दिल्ली में आयोजित भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (BIRC) 2026 में दुनिया भर से आए कृषि विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और निर्यातकों ने हिस्सा लिया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत के चावल किसानों को पारंपरिक खेती के दायरे से बाहर निकालकर मूल्यवर्धित (वैल्यू एडेड) उत्पादों, आधुनिक मिलिंग तकनीक और वैश्विक व्यापार के अवसरों से जोड़ना है। देश दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक और निर्यातक होने के बावजूद, अधिकांश किसानों को उनकी उपज का उचित और बड़ा आर्थिक लाभ नहीं मिल पाता है। इस सम्मेलन में इसी अंतर को पाटने के लिए ठोस रणनीतियों पर चर्चा की गई।
धान प्रोसेसिंग और उप-उत्पादों से अतिरिक्त कमाई
विशेषज्ञों ने सम्मेलन के दौरान धान की प्रोसेसिंग को किसानों और मिलर्स के लिए मुनाफे का बड़ा जरिया बताया। केवल चावल बेचने के बजाय इसके उप-उत्पादों (बाय-प्रोडक्ट्स) के व्यावसायिक इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया। चर्चा के दौरान बताया गया कि धान के पुआल से बायोगैस तैयार की जा सकती है, जबकि चावल की भूसी से प्रोटीन और उच्च गुणवत्ता वाला तेल निकाला जा सकता है। इसके अलावा, चावल से एथेनॉल उत्पादन और इसके लिए कच्चे माल की उपलब्धता पर भी तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह के बड़े उपक्रमों के लिए पर्याप्त निवेश और भूमि की उपलब्धता जैसी कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं, जिनका समाधान ढूंढना जरूरी है।
मिलिंग तकनीक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वालिटी कंट्रोल
चावल मिलिंग सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने और लागत में कटौती के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाने की सलाह दी। मिलिंग प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), उन्नत मशीनों और सख्त क्वालिटी कंट्रोल मानकों को शामिल करने पर बल दिया गया। चावल की बेहतर रिकवरी और उसकी गुणवत्ता को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए किसानों और मिलर्स को अच्छी किस्म के धान का चयन करने, उसकी नमी (मॉइस्चर) को नियंत्रित रखने और अत्याधुनिक मिलिंग तकनीक का उपयोग करने के निर्देश दिए गए।
वैश्विक बाजार की स्थिति और निर्यात क्षमता
ग्लोबल मार्केट में भारतीय चावल की हिस्सेदारी लगभग 45 प्रतिशत है। इस वर्ष अलनीनो के प्रभाव के चलते दुनिया के कई हिस्सों में चावल उत्पादन को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। इसके बावजूद, सम्मेलन में मौजूद विशेषज्ञों ने आश्वस्त किया कि भारत की मजबूत घरेलू सप्लाई और पर्याप्त बफर स्टॉक देश को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखने में पूरी तरह सक्षम बनाते हैं। भारत की सालाना चावल निर्यात क्षमता 2 से 2.5 करोड़ मीट्रिक टन आंकी गई है। वैश्विक बाजार में वियतनाम से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए भारतीय निर्यातकों को गैर-बासमती चावल के निर्यात को और अधिक सुदृढ़ करने पर मंथन करना होगा।
IREF के मंच पर जुटे 150 से अधिक देशों के प्रतिनिधि
इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) की ओर से आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 150 से अधिक देशों के खरीदार, सप्लायर्स, कृषि विशेषज्ञ और वैज्ञानिक एक मंच पर एकत्र हुए। इस महासम्मेलन के माध्यम से भारतीय किसानों को सीधे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के संपर्क में लाने और निर्यात की बारीकियों से अवगत कराने के रास्ते सुझाए गए। किसानों को यह समझाया गया कि यदि वे उच्च गुणवत्ता वाले धान की खेती पर ध्यान दें, आधुनिक तकनीकों को अपनाएं और प्रोसेसिंग यूनिट्स से जुड़ें, तो वे वैश्विक बाजार की मांग के अनुरूप अपनी आय में कई गुना वृद्धि कर सकते हैं।