राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के दो दिवसीय प्रवास पर पहुंच गए हैं। उनके इस दौरे का मुख्य उद्देश्य संगठन के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा करना और भावी रणनीतियों पर चर्चा करना है।
संघ प्रमुख का यह प्रवास संगठनात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अपने इस दौरे के दौरान डॉ. मोहन भागवत छत्तीसगढ़ प्रांत के चुनिंदा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। इन बैठकों में संगठन के विस्तार, अब तक हुए कार्यों के परिणामों और आगामी योजनाओं की रूपरेखा पर विस्तार से मंथन किया जा रहा है।
कोनी के सरस्वती शिशु मंदिर में चल रही हैं बैठकें
बिलासपुर पहुंचने के बाद संघ प्रमुख कोनी क्षेत्र में स्थित सरस्वती शिशु मंदिर पहुंचे, जहां उनके ठहरने की व्यवस्था की गई है। बैठकों का यह पूरा सत्र इसी परिसर में आयोजित किया जा रहा है। इन बैठकों में क्षेत्र स्तर, प्रांत स्तर और विभाग स्तर के चुनिंदा पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं। सभी पदाधिकारी अपने-अपने कार्यक्षेत्र की रिपोर्ट भी प्रस्तुत कर रहे हैं।
शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों और भावी योजनाओं पर फोकस
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वर्तमान में अपने स्थापना के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों का संचालन कर रहा है। बिलासपुर में चल रही इन बैठकों में मुख्य रूप से शताब्दी वर्ष के तहत अब तक आयोजित कार्यक्रमों की गहन समीक्षा की जा रही है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य में संघ के कामकाज को और अधिक गति देने, समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संपर्क बढ़ाने तथा भविष्य की कार्ययोजनाओं को धरातल पर उतारने को लेकर सीधी बातचीत हो रही है।
दो दिनों तक चलने वाले इस प्रवास के दौरान संघ प्रमुख कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन भी कर रहे हैं। इस संगठनात्मक संवाद से छत्तीसगढ़ में संघ की गतिविधियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।