धार्मिक नगरी काशी की अपनी एक अलग ही ऊर्जा है, जहां हर सुबह हर हर महादेव के उद्घोष के साथ होती है। इसी आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक बार फिर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने अपने इस दौरे के दौरान सबसे पहले काशी के कोतवाल कहे जाने वाले बाबा कालभैरव के दरबार में हाजिरी लगाई और उसके बाद विश्व प्रसिद्ध श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचकर विधि-विधान से बाबा के चरणों में शीश नवाया। उनका यह दौरा पूरी तरह से आध्यात्मिक और लोक कल्याण की भावना से ओत-प्रोत रहा, जिसने एक बार फिर सनातन आस्था की जीवंत तस्वीर पेश की है।
काशी कोतवाल के दरबार में मुख्यमंत्री ने लगाई हाजिरी
सता सितंबर 2026 के इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वाराणसी दौरा बेहद खास रहा। अपनी परंपरा और आध्यात्मिक जड़ों से जुड़ाव के लिए पहचाने जाने वाले मुख्यमंत्री सबसे पहले शहर के कोतवाल बाबा कालभैरव के प्राचीन मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने पारंपरिक रूप से विधिवत पूजा-अर्चना की और आरती में हिस्सा लिया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काशी आने वाले हर श्रद्धालु को सबसे पहले बाबा कालभैरव से अनुमति लेनी पड़ती है, और मुख्यमंत्री ने भी इस प्राचीन परंपरा का पूरी श्रद्धा के साथ निर्वहन किया। मंदिर के गर्भगृह में पहुंचकर उन्होंने बाबा कालभैरव के चरणों में शीश नवाया और उत्तर प्रदेश की ढाई करोड़ से अधिक जनता की सुख-शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति के लिए विशेष प्रार्थना की। इस दौरान मंदिर परिसर में मौजूद पुजारियों और संतों ने भी मंत्रोच्चार के बीच उनका स्वागत किया और आशीर्वाद दिया।
श्री काशी विश्वनाथ धाम में किया रुद्राभिषेक और पूजन
बाबा कालभैरव के दर्शन करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीधे श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे। भव्य और दिव्य रूप ले चुके काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के रास्ते जब मुख्यमंत्री गर्भ गृह की ओर बढ़े, तो वहां मौजूद श्रद्धालुओं ने हर हर महादेव के जयकारे लगाने शुरू कर दिए।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर मुख्यमंत्री ने बाबा विश्वनाथ का षोडशोपचार पूजन किया। उन्होंने दूध, जल और बेलपत्र अर्पित कर भोलेनाथ की आराधना की। इस दौरान उन्होंने देश और दुनिया भर में रह रहे देशवासियों के कल्याण की कामना की। मंदिर के अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश को विकास के नए आयामों तक पहुँचाने और राज्य के हर नागरिक के जीवन में खुशहाली लाने के लिए बाबा से आशीर्वाद मांगा।
काशी के विकास कार्यों की समीक्षा और संतों से संवाद
धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह दौरा प्रशासनिक और विकासात्मक दृष्टियों से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दर्शन-पूजन के पश्चात, मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की और काशी में चल रहे विकास कार्यों की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की।
- प्रमुख बिंदु:
- बाबा कालभैरव मंदिर में विधि-विधान से आरती और दर्शन।
- श्री काशी विश्वनाथ धाम के गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना।
- प्रदेश की जनता के कल्याण और राज्य की समृद्धि के लिए प्रार्थना।
- स्थानीय विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था की समीक्षा।
उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सावन और आगामी त्योहारों के मद्देनजर काशी आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। सुरक्षा व्यवस्था से लेकर साफ-सफाई और ट्रैफिक मैनेजमेंट तक हर मोर्चे पर मुस्तैदी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
सनातन संस्कृति और आस्था का संदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जब भी वाराणसी दौरा होता है, वह हमेशा राजनीति से परे भारतीय सनातन संस्कृति के मूल स्वरूप को प्रदर्शित करता है। एक संत से मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ का यह रूप न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक एकता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण संदेश देता है।
मंदिरों में दर्शन के दौरान आम जनता के प्रति उनका आत्मीय स्वभाव भी देखने को मिला। मंदिर मार्ग पर खड़े लोगों का उन्होंने हाथ जोड़कर अभिवादन किया। काशी के लोगों का मानना है कि जब देश और प्रदेश का मुखिया खुद अपनी आस्था के केंद्रों पर शीश नवाकर लोक कल्याण की कामना करता है, तो उससे पूरे समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
फिलहाल, मुख्यमंत्री का यह दौरा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया है और उनके द्वारा किए गए इन विशेष अनुष्ठानों से काशीवासियों और प्रदेश के लोगों में एक नया उत्साह देखने को मिल रहा है।