वाराणसी की एक स्थानीय अदालत ने चर्चित मामले में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने और गर्भपात कराने के आरोपी को जमानत दे दी है। इस मामले ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि कानूनी गलियारों में भी खासी सुर्खियां बटोरी हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को रिहा करने का निर्देश दिया है, जिसके बाद से इस मामले के विभिन्न पहलुओं पर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। आइए जानते हैं कि आखिर इस पूरे मामले में अदालत ने क्या कुछ संज्ञान लिया और बचाव पक्ष ने क्या मुख्य तर्क रखे।
चौबेपुर थाने में दर्ज हुआ था गंभीर धाराओं में मामला
यह पूरा कानूनी विवाद उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के चौबेपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सरसौल से जुड़ा हुआ है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस मामले में थाना चौबेपुर में एफआईआर संख्या 429/2026 दर्ज की गई थी। इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की बेहद गंभीर धाराओं, विशेषकर धारा 69 और धारा 89 के तहत आरोप तय किए थे।
अभियोजन पक्ष की तरफ से जो कहानी सामने आई थी, उसके मुताबिक पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपी सूरज उर्फ सूरज कुमार ने उसे शादी का झांसा दिया। इस झूठे आश्वासन के सहारे आरोपी ने करीब पांच वर्षों की लंबी अवधि तक उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए रखे। पीड़िता की शिकायत में यह भी गंभीर आरोप शामिल था कि इस पांच साल के दौरान उसका चार बार गर्भपात भी कराया गया, जिसने इस मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया था।
अदालत में एफटीसी (प्रथम) कुलदीप सिंह की अदालत का फैसला
इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई वाराणसी की एफटीसी (प्रथम) कुलदीप सिंह की अदालत में चल रही थी। दोनों पक्षों के वकीलों की लंबी जिरह और तर्कों के आदान-प्रदान के बाद अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी ग्राम सरसौल (थाना चौबेपुर) निवासी सूरज उर्फ सूरज कुमार को 50-50 हजार रुपए की दो जमानतों और इतने ही राशि के बंधपत्र (Bond) प्रस्तुत करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश पारित किया है।
अदालत की इस कार्रवाई के दौरान आरोपी के पक्ष को मजबूती से रखने के लिए वकीलों की एक टीम मौजूद थी। बचाव पक्ष की ओर से योग्य अधिवक्ता आनन्द कुमार सिंह, प्रदीप कुमार मिश्रा और निधि श्रीवास्तव ने अदालत में अपना पक्ष रखा और तमाम कानूनी बिंदुओं को उठाया।
बचाव पक्ष के तीखे तर्क: 'आरोपों को बताया गया पूरी तरह निराधार'
सुनवाई के दौरान अदालत में बचाव पक्ष ने अभियोजन पक्ष के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि आरोपी सूरज कुमार पूरी तरह से निर्दोष है और उसे इस आपराधिक मुकदमे में जानबूझकर फंसाया गया है। बचाव पक्ष की दलीलों में कई ऐसे चौंकाने वाले तथ्य रखे गए जिन्होंने मामले की दिशा को ही बदल दिया।
वकीलों ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि 35 वर्षीय पीड़िता अपने वास्तविक वैवाहिक जीवन से पूरी तरह असंतुष्ट चल रही थी। इसके अलावा, वह आरोपी पर लगातार इस बात का दबाव बना रही थी कि वह उससे शादी करे और उसे देश से बाहर यानी दुबई लेकर चला जाए। जब आरोपी ने इन मांगों को पूरा करने में असमर्थता जताई, तो यह विवाद इस कानूनी मुकदमे में तब्दील हो गया।
गर्भपात और मेडिकल परीक्षण से जुड़े अहम बिंदु
बचाव पक्ष ने अदालत का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया कि पीड़िता द्वारा जो गर्भपात के संबंध में गंभीर आरोप लगाए गए हैं, उनके समर्थन में कोई भी पुख्ता चिकित्सीय दस्तावेज (Medical Documents) अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया है। बिना किसी मेडिकल रिपोर्ट या प्रमाण के ऐसे आरोप टिक नहीं सकते।
इसके साथ ही, वकीलों ने यह भी एक अहम तथ्य रखा कि पीड़िता ने इस मामले में अपना मेडिकल परीक्षण (Medical Examination) करवाने से भी साफ इनकार कर दिया था, जो कि इस तरह के मामलों में जांच का एक अहम हिस्सा माना जाता है।
लंबे समय तक साथ रहने के तथ्य पर भी हुई गहराई से चर्चा
इस मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की तह तक जाने के लिए पीड़िता और उसकी मां द्वारा दिए गए बयानों का बारीकी से अवलोकन और विश्लेषण किया। बचाव पक्ष के अनुसार, इन बयानों से यह साफ तौर पर उजागर हुआ कि आरोपी और पीड़िता पिछले करीब चार से पांच वर्षों से एक किराए के मकान में पति-पत्नी की तरह पूरी सहमति और साथ रह रहे थे।
कानूनी जानकारों का मानना है कि लंबे समय तक आपसी सहमति से एक साथ रहने और बाद में उपजे विवादों के ऐसे मामलों में अदालतें सभी साक्ष्यों, बयानों और परिस्थितियों का बहुत ही बारीकी से मूल्यांकन करती हैं। फिलहाल, अदालत के इस आदेश के बाद आरोपी को शर्तों के आधार पर जमानत मिल गई है, लेकिन इस मामले की आगामी कानूनी प्रक्रियाएं अभी जारी रहेंगी।
निष्कर्ष
वाराणसी न्यायालय का यह फैसला इस बात को रेखांकित करता है कि अदालतों में किसी भी आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के दस्तावेजों, बयानों और तर्कों की कितनी बारीकी से जांच की जाती है। चूंकि मामला BNS की गंभीर धाराओं से जुड़ा है, इसलिए आने वाले दिनों में इस मुकदमे की सुनवाई और भी दिलचस्प होने की संभावना है।