काशी की पावन धरा पर इन दिनों अध्यात्म, वेदों की ऋचाओं और सनातन संस्कृति का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। पंचकोशी मार्ग स्थित प्रतिष्ठित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में आयोजित भव्य सहस्त्र चंडी महायज्ञ अपने आध्यात्मिक उत्कर्ष पर पहुंच चुका है। आयोजन के छठवें दिन का माहौल पूरी तरह से देवत्व और भक्ति के रंग में रंगा नजर आया, जहां देश के कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुतियां डालकर पुण्य लाभ कमाया।
छठवें दिन मां धूमावती के विशेष अनुष्ठान से सजा यज्ञ मंडप
महायज्ञ के छठे दिवस की शुरुआत बेहद खास और सख्त वैदिक परंपराओं के साथ हुई। दिन की पहली किरण के साथ ही यज्ञ परिसर में वेदी पूजन और सभी पवित्र स्तंभों का विधि-विधान से अर्चन किया गया। इस दौरान विद्वान आचार्यों के मंत्रोच्चार से संपूर्ण वातावरण ऊर्जावान हो उठा।
आज के मुख्य आकर्षण के रूप में महाविद्याओं में विशिष्ट स्थान रखने वाली मां धूमावती का विशेष पूजन-अनुष्ठान संपन्न हुआ। यज्ञाचार्य तेजमणि तिवारी की सुयोग्य देखरेख में विद्वान ब्राह्मणों ने पूर्ण निष्ठा और पारंपरिक नियमों के तहत अनुष्ठान की सभी प्रक्रियाएं पूरी कीं। हवन कुंड से उठती पवित्र अग्नि की लपटें और गूंजते वैदिक मंत्रों ने उपस्थित सभी लोगों के मन को प्रफुल्लित कर दिया।
जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती के सानिध्य में मिल रही है आध्यात्मिक ऊर्जा
यह पूरा विशाल महायज्ञ प्रख्यात संत जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन और सानिध्य में संपन्न हो रहा है। जानकारों का मानना है कि वर्तमान समय में इस तरह के बड़े अनुष्ठान सनातन वैदिक परंपरा, धर्म और हमारी प्राचीन आध्यात्मिक चेतना को जीवित रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।
महायज्ञ में प्रतिदिन अलग-अलग देवी-देवताओं का आह्वान, उनका पूजन और हवन किया जा रहा है। इस भव्य आयोजन की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें शिरकत करने के लिए केवल उत्तर प्रदेश या देश के अन्य राज्यों से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु और संत-महात्मा वाराणसी पहुंच रहे हैं।
भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम
मां धूमावती के विशेष पूजन के दौरान यज्ञ स्थल पर एक अदभुत और आलौकिक दृश्य देखने को मिला। हर कोई मां भगवती की आराधना में लीन नजर आया। साधु-संतों के सानिध्य में बैठकर आम श्रद्धालुओं ने भी अनुष्ठान का हिस्सा बनकर खुद को धन्य महसूस किया। यज्ञशाला के आसपास का पूरा इलाका शंखनाद और मंत्रों की गूंज से गुंजायमान रहा।
इस धार्मिक अनुष्ठान में देश-विदेश से कई विशिष्ट महानुभावों और संतों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर प्रमुख रूप से मिथिलेश दीक्षित (लखनऊ), डॉ. विनय मिश्रा अपनी धर्मपत्नी के साथ, भूटान के जयगांव से आए बाबूलाल मुवडा, सच्चिदानंद तिवारी, बृजभूषानंद सरस्वती, और रामलखन दास नागा सहित बड़ी संख्या में संत, महात्मा और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा
आचार्य और प्रबंधन समिति से मिली जानकारी के अनुसार, सहस्त्र चंडी महायज्ञ के आगामी दिनों में भी कई महत्वपूर्ण और दिव्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे। आने वाले दिनों में अन्य देवी-देवताओं के विशेष पूजन, सामूहिक हवन और महाआरती का आयोजन निर्धारित है, जिसमें भाग लेने के लिए और भी अधिक संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
वाराणसी में चल रहा यह महायज्ञ न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर सनातन संस्कृति की अखंडता और उसकी अटूट आस्था का एक जीवंत प्रमाण भी प्रस्तुत कर रहा है।