वाराणसी में देव दीपावली और गंगा घाटों के शहर के रूप में पहचान रखने वाला यह ऐतिहासिक नगर इन दिनों प्रकृति के एक अलग ही तेवर से रूबरू हो रहा है। मॉनसून के इस दौर में गंगा और वरुणा नदी का बढ़ता जलस्तर अब तटीय इलाकों के लिए चिंता का सबब बनता जा रहा है। हालात यह हैं कि प्रशासन ने किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए कमर कस ली है और युद्ध स्तर पर राहत व बचाव कार्य शुरू कर दिए गए हैं।
गंगा और वरुणा के बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई धड़कनकेंद्रीय जल आयोग (CWC) की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, शनिवार शाम चार बजे गंगा नदी का जलस्तर 70.12 मीटर दर्ज किया गया। जानकारों और प्रशासन के रिकॉर्ड के अनुसार, गंगा नदी का चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर पर है, जबकि खतरे का निशान 71.26 मीटर तय किया गया है। वहीं, इस नदी का उच्चतम बाढ़ स्तर (Highest Flood Level) 73.90 मीटर रहा है। हालांकि जलस्तर अभी खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन जिस तेजी से यह ऊपर की ओर बढ़ रहा है, उसने वरुणा नदी के तटीय इलाकों के बाशिंदों की नींद उड़ा दी है। वरुणा का पानी किनारों को लांघकर रिहायशी इलाकों में दाखिल होने लगा है, जिससे जलभराव की गंभीर स्थिति पैदा हो गई है11 मोहल्ले और वार्ड आंशिक रूप से प्रभावित
प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, वाराणसी जनपद के लगभग 11 मोहल्ले और वार्ड आंशिक रूप से बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। मुख्य रूप से वरुणा नदी के उफान के कारण कुल 328 परिवारों के 1388 लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। जैसे-जैसे पानी गलियों और घरों की ओर बढ़ रहा है, जिला प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को तुरंत सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाने का सिलसिला तेज कर दिया है ताकि किसी भी तरह की जनहानि से बचा जा सके।13 राहत शिविरों में हो रही है मेहमाननवाजी जैसे इंतजाम
विस्थापित हुए लोगों के लिए जिला प्रशासन ने पूरी मानवीय संवेदना के साथ व्यवस्थाएं की हैं। शहर में वर्तमान समय में कुल 13 बाढ़ राहत शिविर पूरी क्षमता के साथ क्रियाशील हैं। इन शिविरों में कुल 219 प्रभावित परिवारों के 935 लोग शरण लिए हुए हैं।
प्रशासन का दावा है कि इन राहत शिविरों में शरण लेने वाले नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जा रही है। यहां निम्नलिखित सुविधाएं प्रमुख रूप से सुनिश्चित की गई हैं:
- भोजन व्यवस्था: दिन में तीन समय पौष्टिक और ताजा भोजन की थाली परोसी जा रही है।
- पेयजल और स्वच्छता: पीने के लिए शुद्ध पेयजल और शिविरों के भीतर व आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
- बिस्तर और प्रकाश: पर्याप्त मात्रा में गद्दे, चादर, कंबल और निर्बाध बिजली के लिए प्रकाश की मुकम्मल व्यवस्था है।
- विशेष देखभाल: बच्चों के लिए दूध, बुजुर्गों व महिलाओं के लिए फल और आवश्यक चिकित्सीय सामग्री की उपलब्धता हर समय सुनिश्चित की गई है।
- राशन किट: जो परिवार अपने घरों के आसपास ही ऊपरी मंजिलों पर हैं या जिन्हें घर के लिए सामग्री चाहिए, उनके लिए पर्याप्त संख्या में राशन किट तैयार रखी गई हैं।
32 नावों के सहारे चल रहा है रेस्क्यू ऑपरेशन
जलभराव वाले इलाकों में आम जनजीवन थम सा गया है। लोगों को रोजमर्रा के कार्यों के लिए आने-जाने और राहत सामग्री पहुंचाने वास्ते कुल 32 नावों को युद्ध स्तर पर लगाया गया है। जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें इन नावों के जरिए जलभराव वाले क्षेत्रों में पेट्रोलिंग कर रही हैं। जो लोग पानी के बीच अपने घरों में फंसे हुए हैं, उन्हें इन नावों की मदद से सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों तक पहुंचाया जा रहा है। नाविकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे नौकायन के दौरान सभी सुरक्षा मानकों (जैसे लाइफ जैकेट पहनना आदि) का कड़ाई से पालन करें।
प्रशासनिक अमला मैदानी स्तर पर मुस्तैद
स्थिति की नजाकत को भांपते हुए प्रशासनिक अधिकारी लगातार मैदानी दौरों पर हैं। वरिष्ठ अधिकारी खुद तटीय क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर रहे हैं और कई जगहों पर नाव के जरिए नदी मार्ग से भी हालात का जायजा लिया जा रहा है।
इस पूरे आपदा प्रबंधन अभियान को सफल बनाने के लिए कई विभागों को एक मंच पर लाया गया है:
- पुलिस विभाग और जल पुलिस (सुरक्षा और आवागमन के लिए)
- स्वास्थ्य विभाग (मोबाइल मेडिकल टीमों और दवाओं के वितरण के लिए)
- नगर निगम (सफाई, चूना छिड़काव और जल निकासी के लिए)
- एनडीआरएफ और एसडीआरएफ (आपातकालीन बचाव कार्यों के लिए)
सतर्कता ही बचाव का सबसे बड़ा हथियारअपर जिलाधिकारी (वि./रा.) ने मीडिया और आम जनता से बातचीत में अपील की है कि लोग अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन का पूरा सहयोग करें। गंगा और वरुणा के जलस्तर पर पल-पल की निगाह रखी जा रही है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान और केंद्रीय जल आयोग के लाइव डाटा के आधार पर अगले कुछ घंटों की रणनीतियां तय की जा रही हैं। यदि जलस्तर में और अधिक वृद्धि होती है, तो निचले इलाकों को पूरी तरह खाली कराने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के लिए अतिरिक्त संसाधन पहले से ही रिज़र्व रखे गए हैं।
वाराणसी में जिला प्रशासन की यह तत्परता दर्शाती है कि किसी भी प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए सरकारी तंत्र पूरी तरह सक्रिय है। आम नागरिकों की सुरक्षा और उनके सम्मान की रक्षा के लिए प्रशासन का यह कड़ा पहरा तब तक जारी रहेगा जब तक नदियां पूरी तरह से अपने सामान्य प्रवाह पर वापस नहीं लौट आतीं।
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