जीवन की राहों में आने वाली रुकावटें अक्सर इंसान की परीक्षा लेती हैं, लेकिन जिनका हौसला बुलंद हो, उनके लिए हर मुश्किल एक नया अवसर बन जाती है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इन दिनों कुछ ऐसा ही अनूठा माहौल देखने को मिला, जब देवभूमि उत्तराखंड के देवप्रयाग से आए मेधावी विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। यह संवाद केवल एक औपचारिक भेंट नहीं था, बल्कि आने वाली पीढ़ी को एक नया दृष्टिकोण देने वाला एक गहरा वैचारिक सत्र बन गया, जिसने बच्चों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी है।
भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण: सपनों को नई उड़ान
भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड के इन कुशाग्र बुद्धि वाले विद्यार्थियों को उत्तर प्रदेश की आबोहवा, संस्कृति और विकास यात्रा को करीब से देखने का अवसर मिला है। जब इन बच्चों ने लखनऊ की धरती पर कदम रखा और सूबे के मुखिया से उनकी सीधी बातचीत हुई, तो बच्चों की आंखें चमक उठीं। मुख्यमंत्री ने बड़े स्नेह के साथ सभी का परिचय प्राप्त किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उनका जोरदार स्वागत किया। इस दौरान बच्चों के चेहरे पर एक अलग ही आत्मविश्वास साफ झलक रहा था, जिसकी सराहना खुद मुख्यमंत्री ने खुले दिल से की।
मुख्यमंत्री ने बच्चों को संबोधित करते हुए एक बहुत ही गहरा और जीवनोपयोगी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास ही वह आंतरिक शक्ति है, जो इंसान को सबसे कठिन और विपरीत परिस्थितियों से जूझने का आत्मबल प्रदान करती है। अक्सर युवा वर्ग छोटी-मोटी असफलताओं या बाधाओं से घबरा जाता है, लेकिन हमें यह समझना होगा कि जीवन में चुनौतियों का आना स्वभाविक है।
"चुनौती को कभी भी एक लाइलाज समस्या मानकर टालिए मत, बल्कि अपनी बुद्धि और विवेक से उसे समाधान की दिशा में मोड़ने का प्रयास कीजिए। सकारात्मक सोच के साथ उठाया गया हर कदम कठिनाई को प्रगति में बदल देता है।"
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
'एग्जाम वॉरियर्स' और व्यावहारिक ज्ञान का महत्व
इस संवाद के दौरान शिक्षा और किताबों के महत्व पर भी विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि इन बच्चों को शहर के प्रसिद्ध गोमती बुक फेस्टिवल में घुमाया जाए। साथ ही, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिखित लोकप्रिय पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ इन सभी मेधावी विद्यार्थियों को भेंट स्वरूप उपलब्ध कराई जाए। उनका मानना है कि यह पुस्तक हर छात्र के जीवन में गीता की तरह मार्गदर्शक बन सकती है और परीक्षा के तनाव को दूर करने का अचूक नुस्खा है।
किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान की महता को समझाते हुए मुख्यमंत्री ने विज्ञान और गणित का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि लैब में किया जाने वाला प्रैक्टिकल और गणित के फॉर्मूलों की जितनी गहराई से विवेचना की जाएगी, विज्ञान उतना ही आसान और स्पष्ट होता चला जाएगा। केवल रट्टा मारने से विद्या नहीं आती, बल्कि उसका प्रयोग और आत्मसात करना ही असली शिक्षा है।
तकनीक का इस्तेमाल करें, उस पर निर्भर न हों
आज के इस आधुनिक दौर में तकनीक हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुकी है। ऐसे में बच्चों को डिजिटल युग के खतरों और फायदों से आगाह करना बेहद जरूरी था। मुख्यमंत्री ने तकनीक को आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया, लेकिन इसके साथ ही इसके दोहरे पहलुओं पर भी गंभीर चिंता जताई।
- स्मार्टफोन का सही इस्तेमाल: फोन पर घंटों समय बिताना केवल वक्त की बर्बादी है। इसके बजाय इसका उपयोग डिजिटल लाइब्रेरी, एआई (AI), चैटजीपीटी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), और रोबोटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों को सीखने के लिए किया जाना चाहिए।
- तकनीक पर निर्भरता हटाएं: हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि तकनीक को हम संचालित करें, न कि तकनीक हमें अपने इशारों पर नचाए। सोशल मीडिया और एआई का सकारात्मक उपयोग करियर को नई ऊंचाइयां दे सकता है।
- समय प्रबंधन (Time Management): जीवन का हर एक मिनट बेशकीमती है। पाठ्यक्रम, परिवार और खुद के लिए समय का सही बंटवारा करना ही सफल इंसान की पहचान है।
बदलता उत्तर प्रदेश: अयोध्या से काशी तक का सफर
उत्तराखंड से आए इन बच्चों को केवल किताबी बातें ही नहीं सिखाई गईं, बल्कि उन्हें उत्तर प्रदेश के पिछले एक दशक में हुए ऐतिहासिक बदलावों से भी रूबरू कराया गया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बच्चों को लखनऊ के ऐतिहासिक स्थलों के साथ-साथ धर्म और आस्था के प्रमुख केंद्र अयोध्या और काशी का भी भ्रमण कराया जाए।
बच्चों को यह बताया गया कि किस तरह पिछले 10 वर्षों में राज्य की तस्वीर बदली है। अयोध्या में अब भव्य और अलौकिक राम मंदिर का निर्माण हो चुका है, अत्याधुनिक एयरपोर्ट, फोरलेन सड़कें और बेहतरीन रेल कनेक्टिविटी ने इस शहर को ग्लोबल मैप पर ला खड़ा किया है। हरिद्वार की 'हर की पैड़ी' की तर्ज पर ही अयोध्या में 'राम की पैड़ी' को विकसित किया गया है।
इसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे भव्य श्री काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण ने तीर्थाटन को एक नया आयाम दिया है। एक समय था जब कॉरिडोर बनने से पहले तंग गलियों के कारण एक साथ बमुश्किल 10 लोग ही दर्शन कर पाते थे, लेकिन आज भव्य कॉरिडोर के निर्माण के बाद एक साथ 50,000 श्रद्धालु सुगमता से बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकते हैं। यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।
स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी
व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को जगाना भी इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था। मुख्यमंत्री ने बच्चों का आह्वान किया कि वे केवल अपने घर या स्कूल तक सीमित न रहें, बल्कि अपने गांव, शहर, तीर्थ स्थलों और शैक्षणिक संस्थानों को पूरी तरह स्वच्छ रखने का संकल्प लें। स्वच्छता को अपने स्वभाव में ढालना ही एक जिम्मेदार नागरिक का पहला कर्तव्य है।
कार्यक्रम के अंत में इस पूरे शैक्षिक टूर की रूपरेखा पर प्रकाश डाला गया। देवप्रयाग के विधायक विनोद कंडारी ने इस सफल आयोजन का पूरा श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देते हुए कहा कि उन्हीं की प्रेरणा और मार्गदर्शन से वे तीसरी बार उत्तर प्रदेश के मेधावी बच्चों को इस शानदार यात्रा पर लेकर आए हैं। इस प्रेरणादायक संवाद सत्र ने न केवल उत्तराखंड के इन नौनिहालों के ज्ञान के क्षितिज को फैलाया, बल्कि उनके भीतर एक नए भारत के निर्माण का संकल्प भी जगा दिया है।