नई दिल्ली के लोधी रोड स्थित प्रतिष्ठित चिन्मय मिशन ऑडिटोरियम में शनिवार, 19 सितंबर 2026 को एक अत्यंत गरिमामयी और वैचारिक रूप से समृद्ध आयोजन संपन्न हुआ। अवसर था 'भारतीय धरोहर' संस्था की ओर से आयोजित बहुप्रतीक्षित 'भारतीय धरोहर सम्मान समारोह-2026' का। इस कार्यक्रम में देश के कोने-कोने से आए प्रख्यात विद्वानों, शोधकर्ताओं, साहित्यकारों और विचारकों का जमावड़ा लगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने शिरकत की, जबकि इसकी अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने की।
भारत के अमरत्व का स्रोत उसकी ज्ञान परंपरा: गजेंद्र सिंह शेखावत
समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भारतीय संस्कृति की अंतर्निहित शक्ति और उसकी ऐतिहासिक निरंतरता पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश के सामाजिक जीवन में विभिन्न आयोजनों में जाने का अवसर मिलता है, किंतु आज का यह अनुष्ठान उन सभी से अलग, विशिष्ट और वैचारिक गहराई से परिपूर्ण है। आज हम उस चिरंतन और शाश्वत ज्ञान परंपरा के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए एकत्र हुए हैं, जिसने सदियों से इस राष्ट्र को जीवंत रखा है।
शेखावत ने अपने संबोधन में इतिहास के पन्नों को टटोलते हुए कहा कि भारत की अतुलनीय आर्थिक समृद्धि, बौद्धिक संपदा, उन्नत ज्ञान-विज्ञान और भव्य स्थापत्य कला को देखने व सीखने के लिए प्राचीन काल से ही दुनियाभर के यात्री, जिज्ञासु विद्यार्थी और खोजकर्ता इस भूमि पर आए। हालांकि, इसके साथ ही कई ऐसे आक्रांता भी आए जिनका एकमात्र उद्देश्य इस महान संस्कृति को लूटना और इसे नेस्तनाबूद करना था।
उन्होंने आगे कहा, "जब वे विदेशी आक्रांता तलवारों और हथियारों के बल पर भारत के अमरत्व और इसकी मूल चेतना को नहीं मिटा सके, तो उन्होंने सुनियोजित षड्यंत्र रचे। उन्होंने नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वप्रसिद्ध ज्ञान केंद्रों को आग के हवाले कर दिया, ताकि हमारी बौद्धिक रीढ़ टूट जाए। बाद में भी इस ज्ञान को दूषित करने के अनगिनत प्रयास किए गए, लेकिन भारत की सनातन ज्ञान परंपरा और राष्ट्र की सामूहिक चेतना इतनी प्रबल थी कि हर बार इन कुत्सित प्रयासों को मुँह की खानी पड़ी।"
तीन मूर्धन्य मनीषियों को मिला 'भारतीय धरोहर सम्मान-2026'
इस भव्य समारोह में भारतीय ज्ञान-विज्ञान, संस्कृति, आयुर्वेद और शोध के क्षेत्र में असाधारण एवं विशिष्ट योगदान देने वाले देश के तीन दिग्गज मनीषियों को 'भारतीय धरोहर सम्मान-2026' से अलंकृत किया गया। इस वर्ष के पुरस्कार विजेताओं का चयन उनकी लंबी और समर्पित साधना को ध्यान में रखकर किया गया था:
- प्रो. रामेश्वर मिश्र 'पंकज': प्रख्यात चिंतक, दार्शनिक और लेखक प्रो. मिश्र को इतिहास और साहित्य के क्षेत्र में उनके अप्रतिम योगदान के लिए इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया। उन्हें एक लाख रुपये की नकद सम्मान राशि, पारंपरिक अंगवस्त्र और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। प्रो. मिश्र वर्तमान में भोपाल स्थित हिन्दू विद्या केन्द्र के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं और वे पूर्व में गांधी विद्या संस्थान तथा धर्मपाल शोध पीठ जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी महती सेवाएं दे चुके हैं।
- प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान: श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र के कुलपति प्रो. धीमान को आयुर्वेद अनुसंधान, नेत्र-विज्ञान (ऑप्थैल्मोलॉजी) और औषधि मानकीकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। वे केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) के महानिदेशक के रूप में भी देश की चिकित्सा सेवा कर चुके हैं।
- प्रो. बलवंत सिंह राजपूत: प्रख्यात भौतिक विज्ञानी और कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. राजपूत को आधुनिक विज्ञान और प्राचीन भारतीय ज्ञान-परंपरा के बीच सुंदर समन्वय स्थापित करने के लिए मरणोपरांत यह गौरवशाली सम्मान प्रदान किया गया। मंच पर उनके पुत्रों ने अत्यंत भावुक माहौल में यह सम्मान ग्रहण किया। क्वांटम फील्ड थ्योरी के मर्मज्ञ प्रो. राजपूत के छह दशकों लंबे शोध-जीवन में 400 से अधिक उच्च-स्तरीय शोधपत्र प्रकाशित हुए थे।
वर्तमान समाज के संकट और टूटते परिवार: राम बहादुर राय
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं आईजीएनसीए के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने आज के आधुनिक समाज के समक्ष उत्पन्न हो रही गंभीर विसंगतियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज समाज के सामने सबसे बड़ा और भयावह संकट टूटते हुए संयुक्त परिवार और छोटी-छोटी बातों पर भड़कने वाली हिंसा व हत्याएं हैं।
अपने संबोधन में उन्होंने वर्ष 1942 के स्वतंत्रता संग्राम के दिनों का स्मरण करते हुए जेल में बंद एक गांधीवादी कवि की प्रसिद्ध कविता 'देना अखबार देना' का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में सुबह जब अखबार खोले जाते हैं, तो उसमें छपने वाली हिंसा, अपराध और अमानवीयता की खबरें देखकर यह गहरी चिंता होती है कि हमारा समाज आखिर किस दिशा में आगे बढ़ रहा है।
श्री राय ने कहा कि ऐसे निराशाजनक दौर में 'भारतीय धरोहर' जैसी संस्थाएं समाज को आपस में पिरोने, जोड़ने और उसकी सांस्कृतिक जड़ों को बचाने का एक बहुत बड़ा और सराहनीय अभियान चला रही हैं। उन्होंने इस बात पर भी विशेष बल दिया कि आज के समय में अधिकांश सांस्कृतिक और सामाजिक संस्थान सरकारी अनुदानों की बैसाखियों पर जीवित रहते हैं, लेकिन 'भारतीय धरोहर' की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह से स्वयं वित्त-पोषित (Self-funded) रहकर भारतीय ज्ञान संपदा के संरक्षण व संवर्द्धन का कठिन कार्य निष्ठा से कर रही है।आयुर्वेद की प्रामाणिकता और प्रधानमंत्री मोदी के प्रयास
पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और आयुर्वेद पर चर्चा करते हुए वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में आयुर्वेद का अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) स्थापित करके पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को एक नया और वैश्विक फलक प्रदान किया है। हालांकि, उन्होंने बाजार में आयुर्वेद के नाम पर बिकने वाले मिलावटी उत्पादों और फर्जी दावों को लेकर आम जनता को अत्यधिक सजग रहने की सलाह दी। उन्होंने 'धूतपापेश्वर' जैसी 150 वर्षों से अधिक पुरानी और अत्यंत प्रामाणिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली का उदाहरण देते हुए कहा कि गुणवत्ता और विश्वसनीयता ही किसी परंपरा को अमर बनाती है।
समारोह के दौरान वक्ताओं ने इस बात को पुरजोर तरीके से रेखांकित किया कि 'भारतीय धरोहर' संस्था पिछले 21 वर्षों से लगातार प्राचीन भारत की बहुमूल्य ज्ञान-विज्ञान परंपरा को आधुनिक समाज और शासन तंत्र के सम्मुख बेहद वैज्ञानिक, प्रामाणिक और व्यवस्थित स्वरूप में प्रस्तुत करने का सराहनीय कार्य कर रही है। यह आयोजन इस बात का प्रमाण था कि आधुनिकता की अंधी दौड़ के बीच भी भारत की बौद्धिक और सांस्कृतिक धारा अपनी पूरी ऊर्जा के साथ प्रवाहित हो रही है।