देशभर में आधुनिक जीवनशैली के कारण पनप रही स्वास्थ्य समस्याओं और बीमारियों के बढ़ते ग्राफ को रोकने के लिए अब देश के शीर्ष चिकित्सक और नीति निर्धारक एक साझा मंच पर आ चुके हैं। हाल ही में राजधानी नई दिल्ली में आयुर्वेद और वेलनेस ब्रांड 'कायू रिचुअल्स' की ओर से एक विशेष वेलनेस कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। इस उच्चस्तरीय कार्यक्रम में देश के जाने-माने डॉक्टरों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और हेल्थकेयर आंत्रप्रेन्योर ने हिस्सा लिया। कॉन्क्लेव का मुख्य केंद्र बिंदु केवल बीमारियों का इलाज ढूंढना नहीं, बल्कि 'प्रिवेंटिव हेल्थकेयर' यानी निवारक स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देना रहा ताकि समस्याओं के गंभीर होने से पहले ही उनकी रोकथाम की जा सके।
इलाज से बेहतर है रोकथाम: क्यों है प्रिवेंटिव हेल्थकेयर की जरूरत?
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अनजाने में कई ऐसी आदतों को अपना रहे हैं जो उनके शरीर को अंदर से खोखला कर रही हैं। कॉन्क्लेव में उपस्थित विशेषज्ञों ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि लोग अक्सर छोटी-मोटी शारीरिक समस्याओं या शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में किसी बड़ी बीमारी का रूप ले लेते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक समाज में 'रिएक्टिव' (बीमारी होने के बाद इलाज) अप्रोच के बजाय 'प्रोएक्टिव' (बीमारी होने से पहले सतर्कता) अप्रोच नहीं अपनाई जाएगी, तब तक स्वास्थ्य के मोर्चे पर स्थिति को संभालना चुनौतीपूर्ण बना रहेगा।
एम्स आयुर्वेद के सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रवीण के.एस., दिल्ली सरकार के आयुष विभाग के सीएमओ डॉ. अभिषेक साहा, वरिष्ठ प्रजनन एवं आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. अंशिका लेखी, होम्योपैथ एवं जीवनशैली विशेषज्ञ डॉ. निश्चल गुप्ता और कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. जागृति राम जैसे दिग्गजों ने मंच साझा करते हुए उन विषयों पर खुलकर बात की जिन पर अमूमन समाज में बात करने से बचा जाता है।
महिला स्वास्थ्य और छुपी हुई चुनौतियां: मेनोपॉज से लेकर आईवीएफ तक
इस कॉन्क्लेव का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े वे संवेदनशील मुद्दे रहे, जिन पर पारंपरिक रूप से पर्दा डाल दिया जाता है। विशेषज्ञों ने विशेष रूप से मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति), इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ), हार्मोनल असंतुलन, यौन स्वास्थ्य और मानसिक तनाव जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा की।
कार्यक्रम के दौरान कायू रिचुअल्स की संस्थापक और प्रख्यात हेल्थकेयर उद्यमी प्रीति चौधरी ने अपने निजी अनुभव साझा करते हुए एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने रखा। उन्होंने बताया कि दिल्ली में महज छह किलोमीटर की एक छोटी सी यात्रा के दौरान उन्होंने करीब 16 आईवीएफ सेंटर देखे। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि आज के दौर में फर्टिलिटी और जीवनशैली से जुड़ी जटिलताएं किस खतरनाक रफ्तार से बढ़ रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब समाज में इस तरह की समस्याएं प्रत्यक्ष रूप से सामने हैं, तो इनसे मुंह मोड़ने के बजाय 'जिम्मेदार संवाद' की शुरुआत करनी होगी।
पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का संगम
कार्यक्रम के दौरान ब्रांड की संस्थापक प्रीति चौधरी ने अपने 18 वर्षों के अंतरराष्ट्रीय फार्मास्युटिकल और रेगुलेटरी अनुभवों का जिक्र किया। यूके की न्यूकैसल अपॉन टाइन यूनिवर्सिटी से इंडस्ट्रियल बायोटेक्नोलॉजी में मास्टर्स करने वाली प्रीति चौधरी ने अपने नवजात बेटे के गंभीर न्यूरोलॉजिकल संक्रमण से उबरने के संघर्षों से प्रेरणा लेकर इस वेलनेस ब्रांड की नींव रखी थी। उनका मानना है कि केवल आधुनिक दवाइयां या केवल पारंपरिक नुस्खे ही काफी नहीं हैं, बल्कि दोनों का बेहतरीन तालमेल ही भविष्य के स्वास्थ्य का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
इस अवसर पर ब्रांड ने अपने तीन नए वेलनेस उत्पाद भी लॉन्च किए, जो पूरी तरह से आयुर्वेद के प्राचीन ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक शोधों के संतुलन पर आधारित हैं।
Gen-Z और युवाओं के बीच खुलकर बात करने की संस्कृति जरूरी
आज की नई पीढ़ी यानी जेन-जी (Gen-Z) और युवा वर्ग एक ऐसी दुनिया में सांस ले रहा है जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल स्क्रीन उनकी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। इस कारण उनमें शारीरिक गतिविधियों की कमी, स्लीप साइकिल का बिगड़ना, खराब खानपान और अत्यधिक मानसिक तनाव (Anxiety) आम बात हो गई है।
विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति जताई कि युवाओं तक सही और प्रामाणिक जानकारी पहुंचाने के लिए हमें ऐसे सुरक्षित डिजिटल और सामाजिक मंच तैयार करने होंगे जहां वे बिना किसी झिझक या सामाजिक संकोच के अपनी मानसिक और यौन समस्याओं पर बात कर सकें। जब तक युवा खुलकर अपनी समस्याओं को साझा नहीं करेंगे, तब तक वर्जनाओं (Taboos) की दीवारें नहीं टूटेंगी और वे समय पर सही चिकित्सीय मदद लेने से चूकते रहेंगे।
वर्ष 2047 के विकसित भारत का रोडमैप: स्वस्थ नागरिक
कॉन्क्लेव का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि वर्ष 2047 तक एक 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने की असली नींव देश के स्वस्थ नागरिक ही रख सकते हैं। इसके लिए सरकार, चिकित्सा जगत और वेलनेस इंडस्ट्री को मिलकर एक ऐसा तंत्र विकसित करना होगा जिसमें गांव से लेकर शहर के हर वर्ग तक स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बहुत ही सरल और सहज भाषा में पहुंचे।
विशेषज्ञों ने आम जनता से अपील की कि वे अपनी जीवनशैली में योग, संतुलित आहार, समय पर मेडिकल जांच और मानसिक शांति को प्राथमिकता दें ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ और खुशहाल समाज सौंपा जा सके।