स्वास्थ्य और तकनीकी क्षेत्र में लगातार आ रहे बड़े बदलावों के बीच अब मेडिकल एजुकेशन को भी पूरी तरह से अपग्रेड किया जा रहा है। इसी कड़ी में फार्मेसी की पढ़ाई को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक ढालने के लिए एक बेहद अहम कदम उठाया गया है। अब बी-फार्मा (B.Pharm) के नए पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मेडिकल डिवाइसेज जैसे आधुनिक और उभरते हुए क्षेत्रों को शामिल कर लिया गया है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य देश के भावी फार्मासिस्टों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर, उन्हें आधुनिक तकनीक और इंडस्ट्री की डिमांड के अनुसार पूरी तरह तैयार करना है।
हाल ही में रांची स्थित सरला बिरला विश्वविद्यालय (SBU) के फार्मेसी विभाग और फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI), नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष एक दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य फोकस नए पाठ्यक्रम को देश भर के शिक्षण संस्थानों में प्रभावी ढंग से लागू करना और शिक्षकों को इसकी बारीकियों से अवगत कराना था।
बदलती तकनीक के साथ कदमताल कर रही है फार्मेसी शिक्षा
कार्यक्रम के दौरान फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) के अध्यक्ष डॉ. मोंटुकुमार एम. पटेल ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज का दौर पूरी तरह से टेक्नोलॉजी और डेटा का है। इसलिए, मेडिकल और फार्मेसी शिक्षा को भी समय के साथ बदलना बेहद जरूरी है।
डॉ. पटेल ने कहा, "फार्मेसी शिक्षा को बदलती तकनीकी और औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की सख्त आवश्यकता थी। इसी को ध्यान में रखते हुए नए बी-फार्मा पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मेडिकल डिवाइसेज जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों को प्रमुखता से शामिल किया गया है।" उन्होंने यह भी बताया कि इस नए पाठ्यक्रम से शिक्षकों को भली-भांति परिचित कराने और इसके सफल क्रियान्वयन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) चलाए जा रहे हैं, ताकि जमीनी स्तर पर इसका पूरा लाभ छात्रों तक पहुंच सके।
शिक्षकों की भूमिका पर रहा विशेष जोर
इस उच्च स्तरीय कार्यक्रम में अकादमिक जगत और नीति निर्माताओं ने भी शिरकत की। कार्यक्रम में मौजूद राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप वर्मा ने एनईपी-2020 (राष्ट्रीय शिक्षा नीति) के परिप्रेक्ष्य में अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी नई शिक्षा नीति या पाठ्यक्रम की सफलता अंततः शिक्षकों के कंधों पर टिकी होती है।
डॉ. प्रदीप वर्मा ने कहा, "नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तैयार किए गए इस नए बी-फार्मा पाठ्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन में हमारे शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। जब शिक्षक खुद आधुनिक तकनीक और एआई आधारित टूल्स से लैस होंगे, तभी वे अपने छात्रों को इंडस्ट्री के हिसाब से तैयार कर पाएंगे।"
संकट के समय फार्मासिस्टों का योगदान और कौशल विकास
कार्यक्रम के दौरान कोरोना महामारी (Covid-19 Pandemic) के दौर को भी याद किया गया। विश्वविद्यालय के महानिदेशक प्रोफेसर गोपाल पाठक ने उस चुनौतीपूर्ण समय का जिक्र करते हुए कहा कि महामारी के दौरान हमारे फार्मासिस्टों ने फ्रंटलाइन वर्कर्स की तरह काम किया और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को संभाला। उन्होंने कहा कि समय बदल रहा है और मेडिकल साइंस में नित नए अनुसंधान हो रहे हैं, ऐसे में हमारे पाठ्यक्रम भी समय के साथ अपडेट होने चाहिए।
सरला बिरला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सी. जगनाथन ने अपने संबोधन में कहा कि पीसीआई (PCI) द्वारा लाया गया यह नया पाठ्यक्रम फार्मेसी की पढ़ाई को पूरी तरह से स्किल-बेस्ड (कौशल आधारित) और टेक-ओरिएंटेड (तकनीक उन्मुख) बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा।
नए पाठ्यक्रम के मुख्य आकर्षण और लाभ:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ट्रेनिंग: छात्रों को ड्रग डिस्कवरी और डेटा एनालिसिस में एआई के इस्तेमाल की जानकारी मिलेगी।
- मेडिकल डिवाइसेज का ज्ञान: आधुनिक मेडिकल उपकरणों की कार्यप्रणाली और उनके निर्माण की तकनीकी बारीकियां सिखाई जाएंगी।
- कौशल आधारित शिक्षा: केवल थ्योरी के बजाय प्रैक्टिकल और इंडस्ट्री-ओरिएंटेड लर्निंग पर जोर दिया जाएगा।
- वैश्विक स्तर पर अवसर: इस पाठ्यक्रम से निकलने वाले छात्र ग्लोबल हेल्थकेयर मार्केट में आसानी से कंपीट कर सकेंगे।
इस फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ प्रोफेसर, विभाग के अध्यक्ष और शैक्षणिक स्टाफ के सदस्य मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में माना कि शिक्षा के क्षेत्र में यह बदलाव देश के युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगा। आने वाले दिनों में इस पाठ्यक्रम के लागू होने से न सिर्फ फार्मेसी की पढ़ाई का स्तर सुधरेगा, बल्कि देश को अत्यधिक कुशल फार्मास्युटिकल प्रोफेशनल्स भी मिलेंगे।