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सावधान! चटपटी पानी पूरी के शौकीन, स्वाद के नाम पर क्या खा रहे हैं आप?

सावधान! चटपटी पानी पूरी के शौकीन, स्वाद के नाम पर क्या खा रहे हैं आप?

भारत की गलियों से लेकर बड़े महानगरों के चौराहों तक, अगर किसी एक फूड आइटम ने दिलों पर राज किया है, तो वह निश्चित रूप से पानी पूरी है। मुंह में पानी ला देने वाला इसका स्वाद हर उम्र के व्यक्ति को अपनी ओर खींच लेता है। बच्चे हों या बुजुर्ग, शाम ढलते ही ठेलों पर लगने वाली भीड़ इस बात की गवाही देती है कि यह व्यंजन हमारे खान-पान का कितना अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन क्या आपने कभी उस एक सेकेंड के स्वाद के पीछे छिपे कड़वे सच के बारे में सोचा है? जब आप चटकारे लेकर गोलगप्पे खा रहे होते हैं, तो क्या आपको अंदाजा होता है कि आपके शरीर के अंदर क्या जा रहा है?

स्वाद का महाबाजार और रोजाना का करोड़ों का कारोबार

मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर ग्वालियर की ही मिसाल ले लीजिए। यहां के लोगों की जुबान पर पानी पूरी का ऐसा जादू है कि शहर के लोग रोजाना केवल इस एक चीज पर 25 से 30 लाख रुपए खर्च कर देते हैं। आंकड़े बताते हैं कि शहर के चप्पे-चप्पे पर करीब 4 हजार से ज्यादा छोटे-बड़े ठेले और स्टॉल सजे रहते हैं। सुबह से लेकर देर रात तक चलने वाले इस कारोबार में लाखों लोगों की रोजाना आवाजाही होती है। लेकिन जैसे-जैसे इस बाजार का दायरा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इसके पीछे छिपे स्वास्थ्य जोखिमों के बादल भी गहरे होते जा रहे हैं। स्वाद की इस अंधी दौड़ में सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह खड़ा होता है कि जो पानी पूरी हम चाव से खा रहे हैं, उसकी गुणवत्ता और शुद्धता का स्तर क्या वाकई भरोसेमंद है?

इमली की जगह खतरनाक एसिड का खेल

पानी पूरी की जान उसका खट्टा-मीठा पानी होता है। पारंपरिक रूप से इस पानी को स्वादिष्ट बनाने के लिए इमली, पुदीना, नींबू, और विभिन्न मसालों का उपयोग किया जाता था। इमली का खट्टापन प्राकृतिक होता था जो पाचन के लिहाज से भी नुकसानदेह नहीं होता था। लेकिन आज के इस प्रतिस्पर्धी दौर में मुनाफे की खातिर कई जगह नियमों को ताक पर रख दिया गया है।

रिपोर्ट्स और स्थानीय जानकारों की मानें तो पानी में तेजी से खटास बढ़ाने और उसे लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए अब इमली की जगह रासायनिक पदार्थों यानी एसिड का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। ये एसिड इतने खतरनाक होते हैं कि कुछ ही बूंदों में पानी को अत्यधिक खट्टा कर देते हैं। लागत को कम करने और मुनाफा कई गुना बढ़ाने का यह शॉर्टकट आम जनता की सेहत पर भारी पड़ रहा है। पेट की गंभीर बीमारियों से लेकर लिवर और किडनी तक पर इन केमिकल्स का बुरा असर पड़ सकता है.

साफ-सफाई की अनदेखी और जानलेवा लोकेशन

खराब गुणवत्ता वाले पानी और केमिकल्स के अलावा, इन ठेलों की लोकेशन और हाइजीन (स्वच्छता) की स्थिति भी बेहद डरावनी है। शहर के कई हिस्सों में ये ठेले सीधे तौर पर खुले नालों, गंदे पानी की निकासी के रास्तों या अत्यधिक धूल-मिट्टी वाले चौराहों के पास लगाए जाते हैं।

  • हाइजीन से जुड़े मुख्य खतरे:
  • ठेलों के आसपास बहता गंदा पानी और मक्खियों का भारी जमावड़ा।
  • बिना ढके हुए बर्तन जिनमें पानी और मसाले रखे जाते हैं।
  • हाथ धोने के लिए साफ पानी की अनुपलब्धता और गंदे हाथों से परोसना।
  • बर्फ के नाम पर अशुद्ध और गैर-उपभोक्ता श्रेणी के पानी से बने सिल्लियों का इस्तेमाल।

पेट की बीमारियां और स्वास्थ्य पर प्रभाव

डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के असुरक्षित स्ट्रीट फूड का सेवन करने से टाइफाइड, पीलिया (जॉन्डिस), दस्त, उल्टी और फूड पॉइजनिंग जैसी गंभीर समस्याएं आम हो जाती हैं। बच्चों और युवाओं का इम्यून सिस्टम इसे झेलने की कोशिश तो करता है, लेकिन लगातार ऐसे दूषित पदार्थों के सेवन से आंतों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। जिन रसायनों और एसिड का इस्तेमाल पानी को खट्टा करने के लिए किया जा रहा है, वे पेट की अंदरूनी परत को जला सकते हैं, जिससे एसिडिटी और अल्सर जैसी पुरानी बीमारियां जन्म ले सकती हैं।

प्रशासनिक सुस्ती और जिम्मेदारी

त्योहारों या किसी बड़ी शिकायत के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) कभी-कभार औचक निरीक्षण कर औपचारिकता पूरी कर लेता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि रोजाना लगने वाले हजारों ठेलों की नियमित और सख्त जांच आज भी नदारद है। जब तक खाद्य पदार्थों की बिक्री करने वालों के लिए कड़े नियम और लाइसेंस अनिवार्य नहीं किए जाएंगे, तब तक इस अवैध और सेहत से खिलवाड़ करने वाले कारोबार पर लगाम कसना नामुमकिन सा लगता है।

क्या होना चाहिए विकल्प?

इसका मतलब यह नहीं है कि आप अपने पसंदीदा स्वाद से हमेशा के लिए तौबा कर लें। जरूरत है तो बस थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता की।

  • सड़क किनारे किसी भी ऐसी जगह पानी पूरी खाने से बचें जहां साफ-सफाई का बिल्कुल भी ध्यान न रखा जाता हो।
  • कोशिश करें कि प्रतिष्ठित या हाइजीनिक फूड आउटलेट्स से ही स्ट्रीट फूड का आनंद लें।
  • घर पर ही शुद्ध और प्राकृतिक सामग्री से पानी पूरी का पानी तैयार करना सबसे सुरक्षित विकल्प है।
  • स्थानीय प्रशासन से मांग करें कि वह ठेलों पर पानी और सामग्री की गुणवत्ता की नियमित जांच करे।

स्वाद का आनंद लेना हर किसी का अधिकार है, लेकिन वह अधिकार आपकी सेहत की कीमत पर नहीं होना चाहिए। अगली बार जब आप ठेले पर खड़े होकर पानी पूरी का पत्तल अपने हाथ में लें, तो एक बार यह जरूर सोच लें कि आपका स्वाद कहीं आपकी सेहत पर भारी तो नहीं पड़ रहा है।

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अल्का सिंह

अल्का सिंह

Senior Content Writer (स्वास्थ्य एवं लाइफस्टाइल)

अल्का सिंह स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़े विषयों पर गहन शोध के साथ लेखन करती हैं। उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को केवल सामान्य जानकारी ही नहीं, बल...

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