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नेपाल बाढ़ में फंसे मुंबई के डॉक्टर मिलिंद चितले, 61 यात्रियों का अब तक नहीं मिला सुराग

नेपाल बाढ़ में फंसे मुंबई के डॉक्टर मिलिंद चितले, 61 यात्रियों का अब तक नहीं मिला सुराग

हिमालय की गोद में आध्यात्मिक शांति की तलाश में निकली एक पवित्र यात्रा पलभर में किसी बड़े विध्वंस की दास्तान बन जाएगी, शायद ही किसी ने ऐसा सोचा होगा। नेपाल-तिब्बत सीमा पर हाल ही में कुदरत का ऐसा कहर बरपा कि मुंबई के जाने-माने चिकित्सक और अनुभवी पर्वतारोही डॉ. मिलिंद चितले समेत उनका पूरा तीर्थयात्री दल लापता हो गया। इस भयंकर आपदा के कई दिन बीत जाने के बावजूद, घटनास्थल से किसी भी तरह की राहत भरी खबर सामने नहीं आ पाई है, जिससे परिजनों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।

कंचनजंघा फतह करने वाले अनुभवी पर्वतारोही हैं डॉ. चितले

मुंबई के अंधेरी इलाके के रहने वाले डॉ. मिलिंद चितले सिर्फ एक प्रतिष्ठित डॉक्टर ही नहीं, बल्कि देश के जाने-माने और अनुभवी पर्वतारोही भी हैं। उन्होंने अपने करियर में दुनिया की कई कठिन चोटियों को फतह किया है, जिसमें कंचनजंघा जैसी बेहद खतरनाक चोटी भी शामिल है। डॉ. चितले 'हिल्स एंड ट्रेल्स' नामक टूर कंपनी के संस्थापक हैं और पिछले करीब तीन दशकों से हिमालयी अभियानों से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। इस बार भी वे अपनी पत्नी के साथ इस बड़े मानसरोवर यात्रा दल का नेतृत्व कर रहे थे, लेकिन प्रकृति के इस भयंकर तांडव ने सब कुछ बदलकर रख दिया।

79 लोगों का बड़ा दल निकला था कैलाश मानसरोवर यात्रा पर

मिली जानकारी के अनुसार, डॉ. मिलिंद चितले अपनी ट्रेकिंग कंपनी के माध्यम से हर साल कैलाश मानसरोवर यात्रा का आयोजन करते हैं। इस बार 22 अगस्त को मुंबई के अंधेरी, विलेपार्ले, ठाणे, कोल्हापुर, पुणे और नागपुर के अलावा देश के विभिन्न हिस्सों से कुल 60 पर्यटक इस पवित्र यात्रा के लिए काठमांडू रवाना हुए थे।

इस ग्रुप की विविधता बेहद खास थी। इसमें 60 भारतीय पर्यटकों के अलावा डॉ. चितले के अमेरिका से आए 5 दोस्त, न्यूजीलैंड से आए 2 मित्र और नेपाल के 12 स्थानीय गाइड व लीडर शामिल थे। इस तरह कुल 79 लोगों का यह कारवां कैलाश मानसरोवर की कठिन और आध्यात्मिक चढ़ाई के लिए आगे बढ़ रहा था। इस समूह में कई नामी-गिरामी एमडी, सर्जन और मेडिकल विशेषज्ञ भी शामिल थे, जो इस यात्रा का हिस्सा बने थे।

पासपोर्ट वेरिफिकेशन के दौरान आया महाप्रलय

यात्रा के तय शेड्यूल के मुताबिक, 23 अगस्त को काठमांडू पहुंचने के बाद इस दल को दो दिनों के लिए मौसम के अनुकूल होने (Acclimatization) और बेसिक ट्रेकिंग के अभ्यास के लिए रोका गया था। इसके बाद सभी सदस्य आगे बढ़ते हुए 25 अगस्त की रात नेपाल-तिब्बत सीमा के करीब पहुंचे।

घटना वाले दिन यानी 26 अगस्त को सुबह करीब 8:30 बजे यह पूरा ग्रुप चीन की सीमा में प्रवेश करने के लिए नेपाल-चीन बॉर्डर पर बने इमिग्रेशन सेंटर पहुंचा। सभी पर्यटक अपने पासपोर्ट वेरिफिकेशन और बॉर्डर क्रॉसिंग की जरूरी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए बहुमंजिला इमारत के अंदर मौजूद थे।

ठीक इसी दौरान, सुबह लगभग 9:30 से 10:30 बजे के बीच कुदरत का ऐसा प्रलय आया जिसने सब कुछ नेस्तनाबूद कर दिया। अचानक आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने इस इमिग्रेशन और कस्टम बिल्डिंग को अपनी जोरदार चपेट में ले लिया। देखते ही देखते पूरी बहुमंजिला सरकारी इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई और पूरा ग्रुप अंदर ही फंसकर रह गया।

वायरल वीडियो और रेस्क्यू ऑपरेशन की जमीनी हकीकत

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक इमारत के ढहने और बाढ़ के पानी में बहने का वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद हड़कंप मच गया। हादसे की सूचना मिलते ही नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और आपदा राहत-बचाव दल की विभिन्न एजेंसियां तुरंत हरकत में आ गईं और मौके पर पहुंच कर राहत कार्य शुरू किया गया।

हालांकि, बचाव कार्यों में सबसे बड़ी बाधा वहां जमा भारी मलबा बन रहा है। घटनास्थल पर 50 से 60 फीट गहरा कीचड़ और भारी-भरकम चट्टानों व पत्थरों का मलबा जमा हो चुका है। इस वजह से भारी मशीनों और रेस्क्यू टीमों को अंदर तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

परिजन लगा रहे हैं केंद्र सरकार से गुहार

जैसे-जैसे हादसे को दिन बीतते जा रहे हैं, वैसे-वैसे मलबे में दबे लोगों के सुरक्षित बचने की उम्मीदें बेहद क्षीण होती जा रही हैं। नेपाल सरकार के स्थानीय अधिकारियों ने भी यह आशंका जताई है कि इतने भारी-भरकम और गहरे मलबे के नीचे फंसे लोगों का जीवित बचना चमत्कारी ही माना जाएगा।

दूसरी ओर, मुंबई और देश के अन्य हिस्सों में अपने घरों पर बैठे लापता पर्यटकों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। वे लगातार सदमे में हैं और भारत सरकार तथा विदेश मंत्रालय से अपील कर रहे हैं कि नेपाल प्रशासन पर दबाव बनाकर रेस्क्यू ऑपरेशन को और ज्यादा तेज किया जाए, ताकि किसी भी तरह अपने परिजनों की कोई पुख्ता जानकारी मिल सके।

यात्रियों की सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल

इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर से हिमालयी क्षेत्रों में होने वाली ऐसी कठिन तीर्थयात्राओं के दौरान सुरक्षा मानकों और मौसम की सटीक भविष्यवाणी न मिल पाने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बहरहाल, पूरा देश और पीड़ित परिवार इस समय सिर्फ एक ही चमत्कार की दुआ कर रहा है कि किसी तरह सब सुरक्षित बाहर आ जाएं।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

Writer (स्थानीय खबरें)

निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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