महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मानचित्र पर एक ऐतिहासिक और गौरवशाली अध्याय जुड़ चुका है। बात जब स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और दूरदराज के इलाकों में चिकित्सा सुविधाओं की पहुँच की आती है, तो इस बार महाराष्ट्र के एक सीमावर्ती जिले ने पूरे सूबे में बाजी मार ली है। हम बात कर रहे हैं गोंदिया जिले की, जिसने साल 2026 की पहली तिमाही की स्वास्थ्य सूचकांक रैंकिंग (Health Index Ranking) में कुल 46.57 अंक हासिल करते हुए पूरे महाराष्ट्र में पहला स्थान अपने नाम किया है। यह उपलब्धि न सिर्फ प्रशासनिक इच्छाशक्ति को दर्शाती है, बल्कि उन जमीनी स्वास्थ्य कर्मियों के समर्पण का भी प्रमाण है जो संसाधन की कमी के बावजूद अपनी ड्यूटी को पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं।
पुणे में हुआ भव्य सम्मान समारोह
इस शानदार उपलब्धि के बाद शनिवार को महाराष्ट्र के पुणे शहर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान राज्य के स्वास्थ्य सेवा आयुक्त और राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान के अभियान संचालक संजय काटकर (भाप्रसे) ने गोंदिया के जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अभिजीत गोल्हार को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। यह सम्मान इस बात की गवाही दे रहा था कि जब नीयत साफ हो और काम करने का जज्बा हो, तो भौगोलिक और प्रशासनिक बाधाएं भी सफलता के आड़े नहीं आतीं।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा हर तीन महीने पर राज्य स्तर पर जिलों का कड़ा मूल्यांकन किया जाता है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी और जिला शल्य चिकित्सक द्वारा विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के निर्धारित उद्देश्यों, लक्ष्यों और सूचकांकों (Indices) की पूर्ति के आधार पर यह रैंकिंग तय होती है। इस बार के मूल्यांकन में गोंदिया के आंकड़ों ने बड़े-बड़े जिलों को पीछे छोड़ दिया।
किन जिलों को पछाड़कर गोंदिया बना नंबर वन?
महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी की गई पहली तिमाही की इस ताज़ा रैंकिंग में प्रतिस्पर्धा काफी कड़ी थी। आइए नजर डालते हैं शीर्ष पांच जिलों की स्थिति पर:
- गोंदिया: 46.57 अंक (पहला स्थान)
- नागपुर: 45.79 अंक (दूसरा स्थान)
- वर्धा: 45.17 अंक (तीसरा स्थान)
- अकोला: 44.39 अंक (चौथा स्थान)
- गढ़चिरोली: 44.14 अंक (पाँचवाँ स्थान)
नागपुर और वर्धा जैसे शैक्षणिक व चिकित्सकीय रूप से मजबूत जिलों को पीछे छोड़कर गोंदिया का शीर्ष पर पहुंचना इस बात का सुबूत है कि जिले की स्वास्थ्य प्रणाली ने पिछले कुछ महीनों में अभूतपूर्व सुधार किए हैं।
बुनियादी स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार
किसी भी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था उसकी जमीनी इकाइयों पर टिकी होती है। गोंदिया जिले में जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। वर्तमान में जिले के भीतर:
- 45 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC)
- 01 नागरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
- 263 स्वास्थ्य उपकेंद्र
- 04 आपला दवाखाना
- 17 नागरी स्वास्थ्यवर्धिनी उपकेंद्र
इन सभी माध्यमों से जिले के कोने-कोने तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में संतुलन बनाते हुए आम जनता तक डॉक्टर और दवा की पहुंच सुनिश्चित की गई है।
निःशुल्क जांच और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन
सरकारी योजनाओं का लाभ जब अंतिम व्यक्ति तक पहुंचता है, तभी असली विकास दिखाई देता है। गोंदिया जिला प्रशासन ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को अमली जामा पहनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। जिले में जिन प्रमुख योजनाओं और सेवाओं पर सबसे ज्यादा फोकस किया गया है, उनमें शामिल हैं:
- मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा
- परिवार नियोजन कार्यक्रम और किशोर स्वास्थ्य परामर्श
- विभिन्न चरणबद्ध टीकाकरण अभियान
- आरसीएच (RCH) ऑनलाइन पोर्टल पर शत-प्रतिशत पंजीयन
- क्षय रोग (Tuberculosis) नियंत्रण अभियान
- आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क और सुलभ जांचें
- सुरक्षित प्रसूति तथा प्रसूति पूर्व व पश्चात नियमित फॉलोअप
- आपातकालीन 108 और 102 एंबुलेंस सेवा की त्वरित उपलब्धता
- प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान
इन सभी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन के पीछे जिला स्तरीय समन्वय समिति की कड़ी निगरानी रही है। जिलाधीश मंदार पत्की और मुख्य कार्यकारी अधिकारी झेनिथ दॉतुला के कुशल मार्गदर्शन ने इन योजनाओं को गति देने का काम किया है।
चुनौतियां बड़ी थीं, लेकिन इरादे उससे भी मजबूत
यह सफलता इतनी आसान नहीं थी। गोंदिया जिले की भौगोलिक स्थिति को समझें तो यह महाराष्ट्र की पूर्वी सीमा पर स्थित एक ऐसा क्षेत्र है जो आदिवासी बहुल, नक्सल प्रभावित और सघन जंगलों से घिरा हुआ है। ऐसे दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रूप से चलाना किसी चुनौती से कम नहीं होता।
सबसे बड़ी बाधा यह थी कि स्वास्थ्य विभाग में कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से रिक्त चल रहे थे। इसके बावजूद, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने हार नहीं मानी। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी झेनिंग दोंतुला (झेनिथ दॉतुला) ने इस पूरी प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मैनपावर की कमी के बाद भी उनकी टीम ने एक ठोस कार्ययोजना (Planning) के तहत काम किया।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कहा, "जिले में बड़ी संख्या में पद रिक्त होने के बावजूद हमारे डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और पूरी प्रशासनिक टीम ने नियोजनबद्ध तरीके से काम किया। यह सफलता किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरी टीम के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। आने वाले समय में हमारा जोर जनसहभागिता (Public Participation) को और अधिक बढ़ाने पर होगा, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और अधिक सुधारा जा सके।"
अधिकारियों की मेहनत और नियमित समीक्षा बनी जीत की कुंजी
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अभिजीत गोल्हार ने इस सफलता के पीछे के सीक्रेट को साझा करते हुए बताया कि नियमित संवाद और मॉनिटरिंग ही इस छलांग का मुख्य कारण रही है। तहसील स्तर पर लगातार समीक्षा बैठकें आयोजित की गईं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का औचक और प्रत्यक्ष निरीक्षण किया गया। इसके अलावा, ऑनलाइन माध्यमों से भी लगातार काम की समीक्षा होती रही।
डॉ. गोल्हार ने कहा, "जब आप मैदान पर उतरकर खुद समस्याओं को देखते हैं और अपने स्टाफ के साथ मिलकर उनका समाधान निकालते हैं, तो परिणाम अपने आप सकारात्मक आने लगते हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के निर्धारित लक्ष्यों को समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए हमने टीम को प्रेरित किया और आज उसका फल पूरे राज्य के सामने है।"
भविष्य की राह और जनता से उम्मीदें
नंबर वन का ताज हासिल करने के बाद अब गोंदिया जिला प्रशासन की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है। इस मुकाम को बनाए रखना और इसमें और अधिक सुधार करना अगली बड़ी चुनौती होगी। जिला स्वास्थ्य विभाग अब ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य प्रति जागरूकता बढ़ाने और डिजिटल हेल्थ आईडी जैसी पहलों को और तेजी से लागू करने की योजना बना रहा है।
गोंदिया की यह कहानी उन सभी क्षेत्रों के लिए एक प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी या भौगोलिक दुश्वारियों का रोना रोते हैं। यह साबित हो चुका है कि यदि सही दिशा में सही समय पर नेतृत्व मिल जाए, तो सबसे कठिन परिस्थितियों में भी स्वर्णिम सफलता हासिल की जा सकती है। गोंदिया के इस मॉडल से अब राज्य के अन्य जिले भी सीख लेने की कोशिश कर रहे हैं।
