उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक ऐसा नायाब और हाई-टेक तरीका निकाला था, जिसके बारे में जानकर आपके भी होश उड़ जाएंगे। दून पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर ऐसे ही एक बड़े फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। यह शातिर गिरोह आधुनिक सिम बॉक्स (Sim Box) तकनीक का इस्तेमाल करके सीधे-साधे लोगों को अपने जाल में फंसाता था। लोन और क्रेडिट कार्ड दिलाने के नाम पर शुरू होने वाला यह खेल बाद में भयानक ब्लैकमेलिंग और अवैध उगाही में बदल जाता था।
ऐसे हुआ इस हाई-टेक फर्जीवाड़े का खुलासा
इस पूरे मामले की परतें तब उघड़नी शुरू हुईं जब दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications) की ओर से देहरादून में कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबरों और अवैध सिम बॉक्स के संचालन को लेकर केंद्रीय एजेंसी और राज्य की एसटीएफ को इनपुट मिला। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि इन नंबरों के खिलाफ 'चक्षु पोर्टल' पर लगातार कई शिकायतें दर्ज कराई जा रही थीं। शिकायतों का दायरा बढ़ने के बाद एसटीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पर तुरंत एक्शन लेने का फैसला किया।
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह के निर्देशन में पुलिस टीम ने देहरादून के व्यस्त इलाके जीएमएस रोड के पास कमला पैलेस के नजदीक स्थित कैरियर हाउस बिल्डिंग में दबिश दी। इस बिल्डिंग के भीतर 'सिंह असिस्ट रिकान सर्विस प्राइवेट लिमिटेड' के नाम से एक दफ्तर चल रहा था। जब पुलिस ने अंदर प्रवेश किया, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। ऊपर से देखने में यह किसी सामान्य फाइनेंस या रिकवरी कंपनी जैसा लग रहा था, लेकिन अंदर बड़े पैमाने पर अवैध कॉलिंग का काला कारोबार चल रहा था।
डिनस्टार का 32 स्लॉट वाला सिम बॉक्स और अवैध टेलीकॉम सेटअप
तलाशी के दौरान पुलिस को मौके से डिनस्टार (Dinstar) कंपनी का एक 32 स्लॉट वाला सिम बॉक्स बरामद हुआ। दूरसंचार विभाग के विशेषज्ञों ने मौके पर पहुंचकर पुष्टि की कि इस उपकरण का इस्तेमाल कॉलिंग के दौरान कॉलर की वास्तविक पहचान को छिपाने के लिए किया जा रहा था। इस तरह के सिम बॉक्स का उपयोग करके आरोपी न केवल कानून की आंखों में धूल झोंक रहे थे, बल्कि देश की सुरक्षा और दूरसंचार नियमों के प्रावधानों की भी धज्जियां उड़ा रहे थे।
जांच में यह भी पता चला कि भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के नियमों के अनुसार किसी भी बैंक या वित्तीय संस्थान के कस्टमर हेल्पलाइन के लिए '1600' नंबर सीरीज या अधिकृत माध्यमों का प्रयोग होना अनिवार्य है। इसके विपरीत, यह फर्जी कॉल सेंटर व्यक्तिगत और सामान्य मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करके ग्राहकों को सीधे फोन मिलाता था और उन पर अनुचित दबाव बनाता था।
39 युवक-युवतियां और कमीशन का खेल
इस अवैध कॉल सेंटर के भीतर का दायरा काफी बड़ा था। कंपनी के दफ्तर में करीब 39 अन्य युवक-युवतियों को कॉलिंग के काम पर रखा गया था। इन सभी कर्मचारियों को ग्राहकों को फंसाने और उनसे पैसे वसूलने के टारगेट पर कमीशन के आधार पर भुगतान किया जाता था। ये युवा बैंक ग्राहकों को फोन करके उन्हें तुरंत क्रेडिट कार्ड अप्रूव कराने या भारी-भरकम लोन का लालच देते थे। जब एक बार ग्राहक इनके झांसे में आ जाते थे, तो उनका डेटा इन शातिरों के हाथ लग जाता था।
छापेमारी में बरामद हुआ भारी सामान
एसटीएफ की टीम ने जब कार्यालय की सघन तलाशी ली, तो वहां से कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण हाथ लगे। पुलिस ने मौके से निम्नलिखित चीजें बरामद की हैं:
- कुल 45 सिम कार्ड (जिसमें 43 बीएसएनएल, 2 जियो और 1 वोडाफोन का सिम शामिल है)
- एक हाई-एंड लैपटॉप
- दो फाइबर राउटर और अन्य नेटवर्किंग उपकरण
- विभिन्न बैंकों के ग्राहकों का गोपनीय डेटा
लैपटॉप की शुरुआती जांच से यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि आरोपियों के पास एसबीआई (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा, एक्सिस बैंक, पूनावाला फिनकॉर्प, यस बैंक और आरबीएल बैंक समेत कई बड़े बैंकों और वित्तीय संस्थानों के ग्राहकों का सेंसिटिव डेटा मौजूद था। इस डेटा का इस्तेमाल वे लोगों को यह विश्वास दिलाने के लिए करते थे कि वे असली बैंक से बोल रहे हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान और उनका तरीका
पुलिस ने इस मामले में गिरोह के मुख्य दो सरगनाओं को दबोचने में सफलता हासिल की है। इनकी पहचान इस प्रकार है:
- लक्ष्मण प्रसाद (कंपनी मैनेजर): मूल रूप से महोबा, उत्तर प्रदेश के सेखन फाटक (चरखारी स्टेट) का रहने वाला है और वर्तमान में देहरादून के चंद्रबनी पटेलनगर इलाके में रह रहा था।
- जगमोहन सिंह रावत (कंपनी रीजनल मैनेजर): यह नई दिल्ली के वसंत कुंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत माता चौक, रंगपुरी का रहने वाला है।
पूछताछ में इन दोनों ने स्वीकार किया कि वे ग्राहकों को पहले लुभावने ऑफर देते थे। जब ग्राहक लोन या क्रेडिट कार्ड के नाम पर अपनी निजी जानकारियां साझा कर देते थे, तो बाद में उन्हें अलग-अलग बहानों से डराया जाता था। शीघ्र धनराशि जमा कराने के लिए ग्राहकों को धमकी भरे फोन किए जाते थे, उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता था और गाली-गलौज कर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। डर के मारे कई ग्राहक अपनी गाढ़ी कमाई इन ठगों के खातों में ट्रांसफर कर देते थे।
प्रशासन और पुलिस की कड़ी चेतावनी
एसटीएफ के अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात नंबर से आने वाले लोन या क्रेडिट कार्ड के ऑफर के झांसे में न आएं। बैंक कभी भी व्यक्तिगत मोबाइल नंबरों से इस तरह की धमकी भरी कॉल्स या पैसों की मांग नहीं करते हैं। यदि आपके पास भी ऐसा कोई संदिग्ध कॉल आता है, तो तुरंत इसकी शिकायत राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (Cybercrime.gov.in) या चक्षु पोर्टल पर दर्ज कराएं।
फिलहाल, देहरादून पुलिस और एसटीएफ गिरफ्तार किए गए दोनों प्रबंधकों से गहन पूछताछ कर रही है। इस बात की भी जांच की जा रही है कि इस फर्जीवाड़े के तार देश के अन्य राज्यों या किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर क्राइम सिंडिकेट से जुड़े हैं या नहीं। पुलिस जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य चेहरों को भी बेनकाब करने की तैयारी में है।