कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की जमानत कार्यवाही के सिलसिले में एक स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को कथित तौर पर धमकाने का मामला सामने आया है। इस घटना पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। पुलिस सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई मंदिर मार्ग स्थित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) को धमकी दिए जाने के बाद की गई है।
मामले से जुड़े घटनाक्रम के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता आशुतोष रांका और सौरव दास फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। उन्हें 12 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर कथित रूप से अनधिकृत प्रवेश के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर को अब विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित आधिकारिक जगह के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है। गिरफ्तारी के बाद अदालत ने दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
अभिजीत दिपके का बयान और कानूनी प्रक्रिया
इस बीच, CJP कार्यकर्ता अभिजीत दिपके को शनिवार को सशर्त जमानत मिल गई है। इससे एक दिन पहले कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित 'लहरा दो तिरंगा' रैली के आयोजन से ठीक पूर्व दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था। रिहाई के बाद मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन से बाहर आने पर दिपके ने पार्टी नेताओं की हिरासत को गैर-कानूनी करार दिया।
अभिजीत दिपके ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका के जेल से वापस लौटने के बाद पार्टी के सभी कार्यकर्ता फिर से एकजुट होंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ दिनों में हुई गैर-कानूनी गिरफ्तारियों और हिरासत के जरिए उन्हें डराने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वे न तो डरेंगे और न ही अपने रास्ते से पीछे हटेंगे। दिपके ने यह भी जानकारी दी कि वे इस पूरे मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर से चर्चा करने के लिए जा रहे हैं।
पार्टी का रुख और गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि
इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे ने भी नेताओं की गिरफ्तारी पर तीखा सवाल उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि इन नेताओं को अपने ही देश में तिरंगा फहराने के प्रयास के चलते जेल में डाला गया है। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि पुलिस और प्रशासन की इस प्रकार की दमनकारी कार्रवाइयों से उनके कार्यकर्ता डरने वाले नहीं हैं और वे अपनी वैचारिक तथा राजनीतिक लड़ाई जारी रखेंगे। वर्तमान में मजिस्ट्रेट को धमकी दिए जाने के मामले में पुलिस अज्ञात आरोपियों की पहचान करने और कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए जांच-पड़ताल कर रही है।