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नौ साल की उम्र में उठा पिता का साया, 20 भाषाओं में गाए हजारों गीत, ऐसे लीजेंड बनीं आशा भोसले

नौ साल की उम्र में उठा पिता का साया, 20 भाषाओं में गाए हजारों गीत, ऐसे लीजेंड बनीं आशा भोसले

संगीत की दुनिया में जब भी कभी सुरीली और बेबाक आवाज़ की बात होती है, तो जेहन में सबसे पहला नाम महान गायिका आशा भोसले का आता है। आठ दशकों से भी अधिक समय तक अपनी जादुई गायकी से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली इस महान कलाकार का जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। संघर्ष की भट्ठी में तपकर कुंदन बनीं आशा भोसले की यह यात्रा हमें सिखाती है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो अभाव भी प्रभाव में बदल जाते हैं। आज हम आपको इस सुरीली मल्लिका के जीवन के उन अनछुए पहलुओं और संघर्षों से रूबरू करा रहे हैं, जिन्होंने उन्हें भारतीय सिनेमा का एक अमर हस्ताक्षर बना दिया।

महज नौ साल की उम्र में सिर से उठा पिता का साया

हर सफल इंसान की कहानी के पीछे एक बड़ा संघर्ष छिपा होता है, और आशा भोसले का जीवन इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर अपने समय के एक जाने-माने शास्त्रीय गायक और थिएटर अभिनेता थे। घर में संगीत का माहौल तो था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। जब आशा केवल नौ वर्ष की थीं, तब उनके पिता का अचानक निधन हो गया। इस असमय हुए निधन ने पूरे परिवार को गहरा आर्थिक संकट और मानसिक आघात दिया।

घर में बच्चों की बड़ी जिम्मेदारी थीं, और परिवार का भरण-पोषण करना एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया था। ऐसे कठिन और संवेदनशील समय में परिवार को संभालने के लिए बड़ी बहन लता मंगेशकर के साथ-साथ छोटी आशा ने भी कम उम्र में ही गायकी की दुनिया में कदम रख दिया। यह कोई शौकिया शुरुआत नहीं थी, बल्कि परिवार की डूबती नैया को पार लगाने के लिए उठाया गया एक कड़ा कदम था।

दस साल की उम्र में रिकॉर्ड किया पहला गाना

बचपन की कोमल उम्र में जब बच्चों के हाथों में खिलौने और किताबें होनी चाहिए थीं, तब आशा भोसले के गले में सुरों की जिम्मेदारी आ चुकी थी। साल 1943 में, महज दस साल की उम्र में उन्होंने एक मराठी फिल्म के लिए अपना सबसे पहला गाना रिकॉर्ड किया था। यह पल उनके व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ भारतीय सिनेमा के इतिहास में भी एक मील का पत्थर साबित हुआ। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। हालांकि, शुरुआती दौर में उन्हें बड़े बैनर के गानों के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा, लेकिन उनकी लगन और अभ्यास ने उन्हें धीरे-धीरे इंडस्ट्री में अपनी एक खास पहचान दिलाने में मदद की।

20 भाषाओं में बिखेरा अपनी जादुई आवाज़ का कमाल

आशा भोसले की गायकी की सबसे बड़ी विशेषता उनका बेजोड़ लचीलापन और बहुमुखी प्रतिभा (Versatility) थी। उन्होंने खुद को कभी किसी एक भाषा या शैली तक सीमित नहीं रखा। उनके सुरों का जादू हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, गुजराती, बंगाली, असमिया और उड़िया जैसी लगभग 20 अलग-अलग भारतीय भाषाओं में गूंजा।

सिर्फ भारतीय भाषाएं ही नहीं, बल्कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी कला का परचम लहराया। आशा जी ने रूसी और मलय जैसी विदेशी भाषाओं में भी गाने गाकर पूरी दुनिया को अपनी गायकी का मुरीद बना लिया। उनकी इस अद्भुत क्षमता ने उन्हें अन्य गायिकाओं से बिल्कुल अलग खड़ा कर दिया।

संगीत की हर विधा में छोड़ी अपनी अमिट छाप

  • फिल्म संगीत: हर दौर की अभिनेत्रियों के लिए उन्होंने अपनी आवाज़ दी, जो आज भी उतनी ही तरोताजा लगती हैं।
  • पॉप और कैबरे गाने: सत्तर और अस्सी के दशक में उनके गाए हुए पेppy और कैबरे गानों ने युवाओं की धड़कनों को बढ़ा दिया था, जो आज भी पार्टियों की शान बनते हैं।
  • ग़ज़ल और भजन: जहाँ एक तरफ उन्होंने मस्तीभरे गीत गाए, वहीं दूसरी तरफ सूफियाना ग़ज़लों और पारंपरिक भजनों में अपनी गहराई से लोगों की आँखें नम कर दीं।
  • शास्त्रीय संगीत और कव्वाली: शास्त्रीय संगीत की मजबूत पकड़ के कारण उन्होंने जटिल से जटिल बंदिशों को भी बेहद आसानी से गाकर दिखाया।

अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत का मान

आशा भोसले की लोकप्रियता देश की सीमाओं तक ही सीमित नहीं रही। उन्होंने पश्चिमी देशों के संगीतकारों के साथ मिलकर कई नए प्रयोग किए। साल 1977 में प्रसिद्ध सरोद वादक उस्ताद अली अकबर खान के साथ उनके द्वारा साझा किए गए एल्बम 'लिगेसी' (Legacy) को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संगीत सम्मान 'ग्रैमी अवॉर्ड्स' के लिए नामांकित किया गया। यह भारतीय संगीत के लिए एक बहुत बड़ा गौरव का क्षण था।

इसके बाद, साल 2005 में आर.डी. बर्मन के संगीत पर आधारित उनके एक अन्य एल्बम 'यू हैव स्टोलेन माई हार्ट' (You've Stolen My Heart) को भी ग्रैमी अवॉर्ड्स में नॉमिनेशन मिला। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस प्रकार की मान्यता मिलना यह साबित करता है कि उनकी कला कालजयी थी।

गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ नाम

अपने लंबे और ऐतिहासिक करियर के दौरान आशा भोसले ने इतने अधिक गाने रिकॉर्ड किए कि साल 2011 में उनका नाम 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड Records' में दर्ज किया गया। उन्हें संगीत इतिहास में सबसे ज्यादा एकल गीत रिकॉर्ड करने वाले कलाकारों में शुमार किया गया। उनकी इस अभूतपूर्व और लंबी साधना के लिए भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक 'पद्म विभूषण' और 'पद्म श्री' से सम्मानित किया।

युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा

आज का दौर भले ही डिजिटल और ऑटो-ट्यून का हो, लेकिन आशा भोसले की गायकी आज भी हर उभरते हुए कलाकार के लिए एक मास्टरक्लास की तरह है। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, यदि आपके अंदर कुछ कर दिखाने का जज्बा है और आप अपनी कला के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं, तो असफलताएं केवल सीढ़ियां बनकर रह जाती हैं। आशा भोसले केवल एक नाम नहीं, बल्कि भारतीय संगीत का एक ऐसा जीवंत अध्याय हैं जो आने वाली सदियों तक संगीत प्रेमियों के दिलों में रोशनी बिखेरता रहेगा।

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तनु उपाध्याय

तनु उपाध्याय

Senior Sub Editor

तनु उपाध्याय एंटरटेनमेंट जगत की हलचल को करीब से समझती हैं और उसे दर्शकों के सामने आकर्षक अंदाज में पेश करती हैं। फिल्मों, टीवी, ओटीटी और वायरल ट्रे...

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