मुंबई क्राइम ब्रांच ने बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में जांच तेज कर दी है। पुलिस को गिरफ्तार किए गए आरोपियों के मोबाइल फोन से कुछ महत्वपूर्ण वॉइस नोट्स और डिलीट की गई तस्वीरें बरामद हुई हैं, जो इस आपराधिक षड्यंत्र की कड़ियों को जोड़ने में मददगार साबित हो रही हैं।
मुंबई पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मामले की तह तक पहुंचने के लिए लगातार तकनीकी साक्ष्यों को खंगाल रही है। हाल ही में हुई तकनीकी जांच के दौरान जांच अधिकारियों के हाथ चार आरोपियों के मोबाइल फोन लगे, जिनसे कई गोपनीय जानकारियां सामने आई हैं। इन फोनों में मिले वॉइस नोट्स में हथियारों की खरीद-फरोख्त, उन्हें छिपाने और एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने से जुड़ी बातचीत रिकॉर्ड होने की बात कही जा रही है।
डिलीट की गई तस्वीरें और हथियारों का नेटवर्क
जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के फोन से पांच कारतूसों की कुछ ऐसी तस्वीरें भी मिली हैं, जिन्हें जानबूझकर डिलीट कर दिया गया था। साइबर और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से इन डिलीट किए गए डेटा को पूरी तरह रिकवर करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस मामले में हथियारों की सप्लाई चैन कहां तक फैली हुई थी और इनके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे।
कोडवर्ड के इस्तेमाल और संदिग्धों की भूमिका
छानबीन में यह भी सामने आया है कि आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए कोडवर्ड और छद्म नामों का सहारा ले रहे थे। मुख्य संदिग्ध राधा के मोबाइल फोन की जांच करने पर पता चला कि कुणाल नामक व्यक्ति का नंबर 'जय बलकारी' के नाम से सेव किया गया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों की नजरों से बचने और अपनी गतिविधियों को गोपनीय रखने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाए गए थे।
इस मामले में पुलिस जिन चार प्रमुख संदिग्धों से पूछताछ कर रही है, उनमें राधा सुनील वर्मा, बबीता रामजतन राव, कुणाल संजयकुमार जामिनसिंह और सुमित बिजेंद्र सरोलिया के नाम शामिल हैं। अदालत ने इन सभी आरोपियों को पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में भेजा हुआ है, जहां उनसे मामले से जुड़े तमाम पहलुओं पर गहराई से सवाल-ज जवाब किए जा रहे हैं।
साक्ष्य मिटाने की साजिश और रूट की पड़ताल
शुरुआती पूछताछ और अब तक की तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि फायरिंग की घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी हथियारों और बचे हुए कारतूसों को वापस दिल्ली ले जाने की योजना बना रहे थे, ताकि अपराध से जुड़े सभी सबूतों को नष्ट किया जा सके। इसके साथ ही, पुलिस इस बात की भी प्रामाणिक पड़ताल कर रही है कि क्या सूरत या देश के किसी अन्य हिस्से में इन हथियारों को छिपाने के लिए कोई सुरक्षित मार्ग तैयार किया गया था, क्योंकि पूर्व में सूरत से भी हथियार और कारतूस बरामद किए जा चुके हैं। पुलिस का पूरा फोकस इस बात पर है कि इस पूरे षड्यंत्र के पीछे के मास्टरमाइंड और अन्य मददगारों तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके।