हिंदी भाषी दर्शकों के बीच नहीं थी राम चरण और जूनियर एनटीआर की खास पहचान, एसएस राजामौली की फिल्म 'आरआरआर' के प्रचार से जुड़े दिलचस्प खुलासे
साल 2022 में रिलीज हुई निर्देशक एस.एस. राजामौली की बहुचर्चित फिल्म 'आरआरआर' (RRR) ने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रचते हुए दुनिया भर में शानदार सफलता हासिल की थी। इस फिल्म ने अपनी थियेट्रिकल रन के दौरान दुनिया भर में 1,230 करोड़ रुपये की कमाई की, और इसके गाने 'नाटू नाटू' (Naatu Naatu) ने ऑस्कर पुरस्कार जीतकर देश का नाम रोशन किया। हालांकि, इस असाधारण सफलता के पीछे एक बेहद सुनियोजित और गहरी मार्केटिंग रणनीति छिपी थी। फिल्म के प्रचार अभियान से जुड़े वरुण गुप्ता ने अब इस बात का खुलासा किया है कि किस तरह निर्देशक एस.एस. राजामौली और उनके बेटे एस.एस. कार्तिकेय ने इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उनकी टीम को पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करने के लिए प्रेरित किया था।
बाहुबली की सफलता और नई चुनौती
राजामौली की पिछली फिल्म 'बाहुबली' (Baahubali) एक बहुत बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी, जिसने तेलुगु भाषी राज्यों से बाहर भी प्रभास को घर-घर में लोकप्रिय बना दिया था। इस फिल्म के भव्य दृश्यों ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी थी और इसके सीक्वल ने निर्देशक तथा मुख्य अभिनेता दोनों की लोकप्रियता को और मजबूत कर दिया था। हालांकि, फिल्म के मुख्य सितारे राम चरण और जूनियर एनटीआर को हिंदी भाषी क्षेत्रों में उस स्तर की पहचान हासिल नहीं थी। यही वजह थी कि 'आरआरआर' को देश के बाकी हिस्सों में दर्शकों तक पहुंचाने के लिए एक बिल्कुल अलग और अनूठी मार्केटिंग रणनीति अपनाने की आवश्यकता पड़ी थी।
पोस्टर पर बाहुबली के नाम और लोगो का इस्तेमाल
इस चुनौती को याद करते हुए वरुण गुप्ता ने एक पॉडकास्ट में बताया कि जब वे 'आरआरआर' पर काम कर रहे थे, तो हिंदी पट्टी के दर्शक दोनों मुख्य नायकों के बीच अंतर नहीं कर पा रहे थे। इसके विपरीत, निर्देशक की पिछली फिल्म हिंदी बेल्ट में एक बहुत बड़ी हिट थी। इसलिए, फिल्म के पोस्टर पर यह सुनिश्चित किया गया कि 'फ्रॉम द डायरेक्टर ऑफ' (from the director of) लाइन जोड़ी जाए, लेकिन 'बाहुबली' शब्द लिखने के बजाय उसके लोगो का इस्तेमाल किया गया। इसके पीछे यह सोच थी कि दर्शक किसी फिल्म के फॉन्ट या टाइपोग्राफी की तुलना में उसके लोगो को अचेतन मन से अधिक तेजी से याद रखते हैं।
जमीनी सर्वे और दर्शकों की नब्ज
पिंकविला के साथ हुई एक अन्य बातचीत में वरुण गुप्ता ने बताया था कि राजामौली ने उत्तर भारत के टियर-2 शहरों में एक हफ्ते तक चलने वाला सर्वे कराने का सुझाव दिया था। इसका उद्देश्य यह समझना था कि फिल्म के मुख्य अभिनेताओं और निर्देशक के बारे में लोगों में कितनी जागरूकता है। टीम को यह पता लगाने के लिए कहा गया था कि क्या लोग राम चरण और जूनियर एनटीआर को पहचानते हैं और यदि हां, तो वे उन्हें किन फिल्मों से जोड़ते हैं। साथ ही यह भी जांचा गया कि क्या दर्शक राजामौली या 'बाहुबली' को जानते हैं। इस सर्वे से यह बात सामने आई कि अधिकांश लोग 'बाहुबली' से परिचित थे, लेकिन कई लोग राजामौली को नाम से नहीं जानते थे। इसी जानकारी ने हिंदी भाषी बाजारों में फिल्म के प्रचार अभियान की रूपरेखा तैयार की।
अजय देवगन और आलिया भट्ट के स्टारडम का नहीं लिया गया सहारा
वरुण गुप्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि राजामौली नहीं चाहते थे कि फिल्म के सह-कलाकार अजय देवगन और आलिया भट्ट के स्टारडम का इस्तेमाल करके दर्शकों को गुमराह किया जाए। निर्देशक यह अच्छी तरह जानना चाहते थे कि दर्शक उनके और उनके अभिनेताओं के किस काम से वाकिफ हैं। दक्षिण भारत में राजामौली का नाम ही काफी था, लेकिन 'आरआरआर' से पहले लोग निर्देशक से ज्यादा 'बाहुबली' को एक बड़े ब्रांड के रूप में जानते थे। इस तरह सात साल बाद उस ब्रांड का इस्तेमाल 'आरआरआर' के प्रचार के लिए किया गया और यह रणनीति पूरी तरह सफल साबित हुई, जिससे फिल्म ने अकेले हिंदी भाषी बाजारों में 274.31 करोड़ रुपये की कमाई की।