पश्चिम एशिया में गहराता संकट: तेहरान का दावा, अमेरिकी सेना को खाड़ी क्षेत्र में नहीं घुसने दिया जाएगा
पश्चिम एशिया में अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच चल रहे व्यापक तनाव के बीच क्षेत्रीय संघर्ष लगातार गंभीर रूप the जा रहा है। इसी क्रम में 24 अक्टूबर को हूती विद्रोहियों ने यमन के दक्षिणी बंदरगाह शहर अदन पर हमले किए, जबकि सऊदी अरब में कई स्थानों पर मिसाइलों और उनके मलबे गिरने की घटनाएं सामने आईं। इस बीच, इजरायली सेना ने भी कब्जे वाले वेस्ट बैंक में अपना बड़ा सैन्य अभियान जारी रखा है।
यमन के अदन में सैन्य ठिकानों पर हमले
यमन की आधिकारिक सरकार ने पुष्टि की है कि दक्षिणी बंदरगाह शहर अदन इस समय हमलों की चपेट में है। हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने अदन में स्थित अल-नस्र कैंप और एक नौसैनिक सैन्य बेस को निशाना बनाया है। हालांकि, इन हमलों के बाद किसी भी तरह के नुकसान या हताहतों के बारे में रिपोर्ट में तुरंत कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। यमन में चल रहा यह संघर्ष क्षेत्र में सुरक्षा समीकरणों को और अधिक जटिल बना रहा है।
सऊदी अरब के कई शहरों तक पहुंचे तनाव के प्रभाव
यमन के घटनाक्रम के अलावा सऊदी अरब की सुरक्षा पर भी इसका सीधा असर देखा गया है। सऊदी सिविल डिफेंस ने जानकारी दी है कि देश के प्रमुख शहरों मक्का और जेद्दा में हवा में रोकी गई मिसाइलों के टुकड़े और मलबे गिरे हैं। शुरुआती आधिकारिक ब ्योरे के अनुसार, दो बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट किया गया, जिसके बाद उनके अवशेष मक्का क्षेत्र में आ गिरे।
इसके साथ ही, सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यह भी बताया कि उसने ताइफ और यान्बू की तरफ दागी गई दो मिसाइलों के साथ-साथ रियाद की ओर लक्षित एक बैलिस्टिक मिसाइल को भी सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया। दूसरी ओर, हूती विद्रोहियों का दावा है कि उन्होंने सऊदी अरब के भीतर कुल सात अलग-अलग ठिकानों को निशाना बनाया है। इस सुरक्षा खतरे को देखते हुए रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने नागरिकों के लिए लेवल 3 की ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है।
व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की पृष्ठभूमि
यह ताजा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच तीखे बयान आ रहे हैं और तेहरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी सेना को खाड़ी क्षेत्र में कभी प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। इसके अलावा, इजराइल और फिलिस्तीन के बीच वेस्ट बैंक में जारी सैन्य कार्रवाइयों ने पूरे मध्य पूर्व को कूटनीतिक और सैन्य मोर्चे पर हाई अलर्ट पर ला दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस क्षेत्र की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है।