उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ बंदरों के अचानक हुए आक्रामक हमले से घबराकर एक युवती अपनी जान बचाने के प्रयास में छत से नीचे गिर गई। इस भयानक हादसे में छात्रा की मौके पर ही मौत हो गई, जिससे पूरे परिवार और इलाके में मातम पसरा हुआ है। यह घटना न केवल एक परिवार का उजाड़ना है, बल्कि देश के कई हिस्सों में तेजी से विकराल होती बंदरों की समस्या पर एक बड़ा सवालिया निशान भी लगाती है।घटना का पूरा विवरण: कैसे हुआ यह हादसा?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना फर्रुखाबाद के एक स्थानीय मोहल्ले की है। मृतका अपनी घर की छत पर किसी काम से गई हुई थी। इसी दौरान अचानक से बंदरों के एक झुंड ने वहां आक्रामक रुख अपनाते हुए उस पर हमला बोल दिया। बंदरों की संख्या अधिक होने और उनके आक्रामक तेवर को देखकर छात्रा घबरा गई।
खुद को बचाने के लिए उसने भागने की कोशिश की, लेकिन बंदरों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। हड़बड़ाहट और जान बचाने की जद्दोजहद में उसका संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे छत से नीचे जमीन पर आ गिरी। जमीन पर गिरते ही वह गंभीर रूप से घायल हो गई और खून से लथपथ हो गई। परिजनों और आसपास के लोगों ने तुरंत उसे नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
इस अचानक हुई त्रासदी ने परिवार की खुशियों को पल भर में छीन लिया। मृत छात्रा के माता-पिता और भाई-बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि घर की चारदीवारी के भीतर भी अब बच्चों और महिलाओं का सुरक्षित रहना मुश्किल होता जा रहा है। इस दुर्घटना के बाद से मोहल्ले के लोगों में गहरा आक्रोश है।
बंदरों का बढ़ता आतंक: आम नागरिकों के लिए गंभीर खतरा
यह कोई पहली घटना नहीं है जब बंदरों के कारण किसी की जान गई हो। उत्तर प्रदेश के कई जिलों—चाहे वह मथुरा हो, वृंदावन, शाहजहांपुर, कानपुर या फिर फर्रुखाबाद—बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। जिला प्रशासन और नगर निगम की तमाम कोशिशों के बावजूद इस समस्या का कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है।
- विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, बंदरों के इस प्रकार आक्रामक होने के कई प्रमुख कारण हैं:वनों की कटाई और प्राकृतिक आवास का नष्ट होना।
- शहरों में लगातार हो रहे निर्माण कार्यों के कारण बंदरों का शहरी क्षेत्रों में पलायन।
- लोगों द्वारा बंदरों को अत्यधिक मात्रा में खाद्य पदार्थ खिलाना, जिससे उनकी प्राकृतिक शिकारी और भोजन तलाशने की प्रवृत्ति प्रभावित होती है।
स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
घटना के बाद से स्थानीय नागरिकों में नगर प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद नगर निगम की ओर से आवारा बंदरों को पकड़ने या उन्हें जंगलों में छोड़ने के लिए कोई प्रभावी अभियान नहीं चलाया जाता है। जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होता, तब तक अधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर आंखें मूंदकर बैठे रहते हैं।
सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
इस प्रकार की दर्दनाक घटनाओं से बचने के लिए नागरिकों और प्रशासन दोनों को मिलकर सतर्कता बरतनी होगी:
- घरों पर जाल लगाना: छतों और बालकनी के खुले हिस्सों पर मजबूत लोहे की जालियां लगानी चाहिए ताकि बंदर आसानी से अंदर न आ सकें।
- बंदरों को उकसाने से बचें: छतों पर अकेले जाते समय यदि बंदर नजर आएं, तो अचानक भागने या उन्हें भगाने के लिए पत्थर फेंकने से बचें, क्योंकि इससे वे और अधिक आक्रामक हो सकते हैं।
- प्रशासनिक अभियान: नगर निकायों को विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में बंदर पकड़ने वाली टीमों को सक्रिय करना चाहिए।