आधुनिक युग में हर नागरिक की पहचान का सबसे बड़ा दस्तावेज आधार कार्ड बन चुका है। इसके बिना न तो स्कूल में दाखिला मुमकिन है और न ही सरकारी योजनाओं का लाभ मिल पाता है। लेकिन जरा सोचिए, तब क्या हो जब तकनीक की एक ऐसी अजीब उलझन सामने आ जाए जो किसी इंसान के वजूद पर ही सवालिया निशान लगा दे? कुछ ऐसा ही गंभीर संकट उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में रहने वाले एक परिवार के सामने खड़ा हो गया था। जुड़वा बहनों की एक जैसी बायोमीट्रिक पहचान के कारण उनमें से एक का आधार कार्ड बनना असंभव सा हो गया था। ऐसे में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की संवेदनशीलता और प्रशासनिक मुस्तैदी ने इस परिवार की जिंदगी का सबसे बड़ा संकट दूर कर दिया है।
क्या थी वह दुर्लभ तकनीकी समस्या जिसने बढ़ा दी थी मुश्किलें?
रामपुर के मोहल्ला खारी कुआं के रहने वाले जुबैर इलियास के घर में जन्मी जुड़वा बेटियां - तुबा जुबैर और खिजरा जुबैर - दिखने में एक जैसी तो थीं ही, लेकिन कुदरत का करिश्मा कहिए या तकनीकी विज्ञान का एक दुर्लभ पहलू, दोनों के फिंगरप्रिंट (उंगलियों के निशान) और आंखों की पुतलियां (रेटिना) भी पूरी तरह से एक समान निकले। सामान्य तौर पर जब आधार पंजीकरण के लिए केंद्र पर डेटा लिया जाता है, तो हर व्यक्ति की यूनीक बायोमीट्रिक पहचान दर्ज होती है। लेकिन इन दोनों बहनों के मामले में जब एक बच्ची का आधार कार्ड बन गया, तो दूसरी बच्ची का डेटा सिस्टम में दर्ज होते ही उसे 'डुप्लीकेट' मानकर खारिज कर दिया जाने लगा।
आधार पंजीकरण से जुड़ी इस तकनीकी बाधा के कारण दूसरी बेटी का आधार कार्ड बन पाना नामुमकिन साबित हो रहा था। पिता जुबैर इलियास पिछले कई सालों से अलग-अलग आधार सेवा केंद्रों और दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक चुके थे। हर जगह से उन्हें निराशा ही हाथ लगी। पिता की सबसे बड़ी चिंता यह थी कि यदि उनकी दूसरी बेटी का आधार कार्ड नहीं बना, तो आने वाले समय में उसका स्कूल में दाखिला कैसे होगा और वह सरकार की विभिन्न नागरिक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ कैसे ले पाएगी। यह एक ऐसा मानसिक तनाव था, जिससे पूरा परिवार वर्षों से जूझ रहा था।
जनता दर्शन बना उम्मीद की किरण: डीएम ने लिया कड़ा संज्ञान
जब चारों तरफ से रास्ते बंद नजर आने लगे, तब जुबैर इलियास ने उत्तर प्रदेश शासन की ओर से आम जनता की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए चलाई जा रही 'जनता दर्शन' व्यवस्था का रुख किया। वह अपनी दोनों जुड़वा बेटियों को लेकर रामपुर के कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे, जहां जिलाधिकारी (डीएम) अजय कुमार द्विवेदी जनता की समस्याएं सुन रहे थे। जुबैर ने अपनी यह बेहद अजीब और उलझाने वाली समस्या डीएम के सामने रखी।
रामपुर जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने इस मामले की गंभीरता को तुरंत भांप लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट निर्देश हैं कि जनता दर्शन में आने वाले हर एक नागरिक की समस्या का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाना चाहिए। डीएम ने न सिर्फ इस मामले को सामान्य जनशिकायत समझा, बल्कि इसके पीछे छिपे मानवीय संकट को महसूस किया। उन्होंने बिना देर किए इस तकनीकी पहेली को सुलझाने के लिए सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र को सक्रिय कर दिया।
दिल्ली यूआईडीएआई मुख्यालय तक पहुंचाई गई बात
चूंकि मामला फिंगरप्रिंट और रेटिना की बायोमीट्रिक समानता का था, इसलिए इसका समाधान स्थानीय स्तर पर संभव नहीं था। इसके लिए देश के सर्वोच्च आधार नियामक संस्थान यानी भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के हस्तक्षेप की आवश्यकता थी। डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने व्यक्तिगत रुचि लेते हुए नई दिल्ली स्थित यूआईडीएआई मुख्यालय के सचिव से दूरभाष पर सीधा संपर्क साधा।
जिलाधिकारी ने यूआईडीएआई के अधिकारियों को इस दुर्लभ मामले की पूरी जानकारी दी और समझाया कि कैसे बायोमीट्रिक समानता के चलते एक निर्दोष बच्ची अपने बुनियादी नागरिक अधिकार से वंचित हो रही है। डीएम की मजबूत पैरवी और विशेष तकनीकी समाधान के अनुरोध के बाद यूआईडीएआई मुख्यालय ने इस मामले को एक 'अपवाद' (Exception) के रूप में लिया। मुख्यालय स्तर पर विशेष दिशानिर्देश जारी किए गए और दोनों बच्चियों के दस्तावेजों को अलग-अलग पहचान देने की प्रक्रिया शुरू की गई।
तीन महीने की लंबी मशक्कत के बाद मिली सफलता
प्रशासनिक प्रयासों और लगातार तीन महीने तक चली तकनीकी कवायद के बाद आखिरकार वह दिन आ ही गया जिसका जुबैर इलियास का परिवार वर्षों से इंतजार कर रहा था। तमाम तकनीकी अड़चनों को पार करते हुए दोनों जुड़वा बहनों—तुबा जुबैर और खिजरा जुबैर—के अलग-अलग आधार कार्ड सफलतापर्वक बन गए। जैसे ही दोनों बच्चियों के हाथ में उनके अलग पहचान वाले दस्तावेज आए, परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वर्षों से छाए पहचान के संकट के बादल आखिरकार छंट चुके थे।
आधार कार्ड मिल जाने के बाद जुबैर इलियास अपनी दोनों बेटियों को लेकर एक बार फिर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। इस बार उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें नहीं, बल्कि प्रशासन के प्रति असीम कृतज्ञता का भाव था। उन्होंने डीएम अजय कुमार द्विवेदी से मुलाकात कर उन्हें धन्यवाद दिया और अपनी खुशी साझा की।
प्रशासनिक संवेदनशीलता का अनूठा उदाहरण
इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि शासन और प्रशासन में बैठे जिम्मेदार अधिकारी जनता के प्रति संवेदनशील हों, तो बड़ी से बड़ी और जटिल तकनीकी समस्याएं भी आसानी से सुलझ सकती हैं। आज के डिजिटल युग में आधार केवल एक कार्ड नहीं, बल्कि व्यक्ति के नागरिक होने का सबसे बड़ा प्रमाण है। यदि समय रहते रामपुर जिला प्रशासन ने इस मामले में हस्तक्षेप न किया होता, तो शायद उस बच्ची का भविष्य और शिक्षा अधर में लटक जाती।
इस संबंध में बातचीत करते हुए जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा बहुत स्पष्ट है—जनता दर्शन में आने वाला हर व्यक्ति सर्वोच्च प्राथमिकता है। शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे और किसी भी नागरिक को प्रशासनिक या तकनीकी पेचीदगियों के कारण अपने बुनियादी अधिकारों से वंचित न होना पड़े, यही जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य है।
रामपुर की यह घटना न केवल एक परिवार के लिए राहत की सांस लेकर आई, बल्कि यह पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए एक मिसाल बन गई कि किस तरह संवेदनशीलता और दृढ़ इच्छाशक्ति से हर असंभव लगने वाली बाधा को पार किया जा सकता है।