उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित होने वाले 'जनता दर्शन' कार्यक्रम का एक अलग ही रूप सोमवार, 21 सितंबर 2026 को देखने को मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभिन्न जिलों से आए आम नागरिकों की समस्याएं बेहद गंभीरता से सुनीं। इस दौरान प्रशासनिक अमले को लेकर उनके तेवर काफी सख्त नजर आए। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि समाज का माहौल बिगाड़ने वाले लोग अक्सर छोटी-छोटी बातों को तूल देकर बड़ा विवाद खड़ा करने की साजिश रचते हैं। ऐसे में राज्य के सभी जिलों के प्रशासनिक और पुलिस मुखियाओं को पूरी तरह सतर्क रहने की आवश्यकता है।
छोटी घटनाओं में लापरवाही अब कतई बर्दाश्त नहीं
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि जिलों में तैनात जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) को हर छोटी से छोटी घटना पर व्यक्तिगत रूप से नजर रखनी होगी। यदि कहीं कोई विवाद या अप्रिय स्थिति बनती है, तो अधिकारियों को तुरंत घटनास्थल का रुख करना चाहिए। पीड़ितों की बात को धैर्य से सुनकर बिना किसी देरी के नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए ताकि मामलों का समय रहते पटाक्षेप किया जा सके।
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में अधिकारियों से कहा कि शुरुआती स्तर की अनदेखी या उदासीनता को किसी भी कीमत पर माफ नहीं किया जाएगा। छोटी लापरवाही भी बड़े संकट का रूप ले सकती है, इसलिए जमीनी स्तर पर प्रशासनिक पकड़ मजबूत होना बेहद जरूरी है।
साढ़े नौ साल से बिना भेदभाव हो रहा समाधान
जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री ने एक-एक कर कुर्सियों पर बैठे हर फरियादी से मुलाकात की। उनके प्रार्थना पत्रों को खुद देखा और संबंधित विभागों के अधिकारियों को तत्काल निस्तारण के निर्देश दिए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बीते साढ़े नौ वर्षों से पूरी पारदर्शिता के साथ बिना किसी भेदभाव के हर जरूरतमंद की समस्या का समाधान सुनिश्चित कर रही है।
- संवेदनशीलता जरूरी: अधिकारी जनता की शिकायतों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील रहें।
- समयबद्ध निस्तारण: हर प्रार्थना पत्र का तय समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण समाधान हो।
- कल्याणकारी योजनाएं: पात्र व्यक्तियों को शासन की सभी योजनाओं का सीधा लाभ मिले।
- स्वास्थ्य प्राथमिकता: जरूरतमंद मरीजों के इलाज की त्वरित व्यवस्था की जाए।
पुलिस और राजस्व मामलों पर विशेष सख्ती
सोमवार को आयोजित जनता दर्शन में सबसे ज्यादा शिकायतें पुलिस और राजस्व विभाग से जुड़ी हुई थीं। इस पर मुख्यमंत्री ने गहरी नाराजगी जताते हुए शीर्ष स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस कमिश्नर, एडीजी, आईजी, डीआईजी और एसएसपी स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को जिलों में खुद आगे आकर जनसमस्याओं का समाधान कराना चाहिए।
यदि मैदानी स्तर पर किसी मातहत यानी निचले स्तर के पुलिसकर्मी या अधिकारी द्वारा लापरवाही या हीला-हवाली बरती जाती है, तो उस दोषी कर्मचारी के खिलाफ भी तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। कानून व्यवस्था और जमीन-जायदाद से जुड़े राजस्व मामलों में किसी भी तरह की सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भूमाफियाओं और दबंगों के खिलाफ बुलडोजर और कानूनी शिकंजा कसने की कार्रवाई लगातार जारी रहनी चाहिए।
मासूम बच्चे के साथ सीएम योगी का स्नेहिल अंदाज
कठोर प्रशासनिक निर्देशों के बीच जनता दर्शन कार्यक्रम का एक बेहद प्यारा और सुखद पहलू भी सामने आया। एक महिला अपनी मां के साथ जनता दर्शन में आई थी, जिसके साथ उसका छोटा बच्चा भी मौजूद था। मुख्यमंत्री की नजर जब उस नन्हें बच्चे पर पड़ी, तो वह खुद को रोक नहीं पाए।
मुख्यमंत्री ने बड़े ही दुलार से बच्चे का हालचाल जाना और उसकी पढ़ाई-लिखाई के बारे में पूछा। इसके बाद उन्होंने अपने पास से एक चॉकलेट आगे बढ़ाई। बच्चे ने तुरंत झपकते ही चॉकलेट अपने हाथ में ले ली। माहौल तब और खुशनुमा हो गया जब मुख्यमंत्री ने मज़ाक में वह चॉकलेट वापस मांगी और बच्चे ने सिर हिलाकर साफ मना कर दिया। यह मासूमियत देखकर वहां मौजूद पूरा हॉल ठहाकों और खिलखिलाहट से गूंज उठा। मुख्यमंत्री ने बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उसे आशीर्वाद दिया और मन लगाकर खूब पढ़ने के लिए प्रेरित किया।
जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने का संदेश
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि शासन प्रशासन में जनहित सर्वोपरि होना चाहिए। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक मशीनरी को कड़े निर्देश देकर व्यवस्था को पटरी पर रखने की हिदायत दी, वहीं दूसरी तरफ आम जनता के प्रति अपनी संवेदनशीलता का परिचय भी दिया। जानकारों का मानना है कि इस तरह के दौरों से न सिर्फ प्रशासनिक तंत्र में कसावट आती है, बल्कि आम जनता का शासन के प्रति विश्वास भी और अधिक मजबूत होता है।