क्या आपने कभी सोचा है कि जब पूरा देश 15 अगस्त 1947 को आजादी के जश्न में डूबा था, तब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी इस खुशी से कोसों दूर क्यों थे? इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि जिस दिन लाल किले पर तिरंगा फहरा रहा था, उस दिन गांधीजी बंगाल के नोआखली में सांप्रदायिक हिंसा की आग को बुझाने में जुटे थे। उनके मन में देश के बंटवारे का गहरा दर्द था।
जब मोहम्मद अली जिन्ना की चाल पर फिर गया पानी
आजादी के समय रियासतों को भारत या पाकिस्तान में से किसी एक को चुनने की छूट थी। इसी का फायदा उठाने की कोशिश मोहम्मद अली जिन्ना ने की थी। जोधपुर रियासत सामरिक और भौगोलिक रूप से बहुत अहम थी। जिन्ना जोधपुर के तत्कालीन महाराजा हनुमंत सिंह को अपने पाले में लाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे थे।
जिन्ना ने महाराजा हनुमंत सिंह को खाली कागज पर अपनी शर्तें लिखकर हस्ताक्षर करने तक का ऑफर दे दिया था। जोधपुर पाकिस्तान की सीमा से सटा हुआ था और अगर वह पाकिस्तान में मिल जाता, तो देश का भूगोल ही कुछ और होता।
सरदार पटेल और वीपी मेनन की रणनीति
जैसे ही इस बात की भनक देश के गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल और उनके सचिव वीपी मेनन को लगी, उन्होंने तुरंत एक्शन लिया। पटेल ने महाराजा हनुमंत सिंह को स्पष्ट शब्दों में समझाया कि जोधपुर की जनता की बहुसंख्यक इच्छा भारत के साथ रहने की है।
- ऐतिहासिक मुलाकात: महाराजा हनुमंत सिंह दिल्ली में जिन्ना से मिलकर लौटे थे, जहां उनके और जिन्ना के बीच तीखी नोकझोक भी हुई थी।
- जनता का रुख: जोधपुर की जनता और वहां के व्यापारी भारत गणराज्य के साथ जुड़ना चाहते थे।
- सटीक कूटनीति: सरदार पटेल के दबाव और रियासतों के विलय के समझौते (Instrument of Accession) के तहत जोधपुर का भारत में विलय पक्का हुआ।
आजादी का वह खट्टा-मीठा सच
गांधीजी का मानना था कि राजनीतिक आजादी तो मिल गई है, लेकिन अभी दिलों की आजादी और भाईचारा बहाल होना बाकी है। यही वजह थी कि उनका पूरा ध्यान दिल्ली के लाल किले की बजाय नोआखली की गलियों में शांति स्थापित करने पर था। जोधपुर का मामला सुलझने से देश का एक बड़ा भू-भाग पाकिस्तान में जाने से बच गया, जो सरदार पटेल की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत में से एक था।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: 15 अगस्त 1947 को महात्मा गांधी कहां थे?
A1: गांधीजी उस दिन दिल्ली में स्वतंत्रता समारोह में शामिल नहीं हुए थे, बल्कि वे बंगाल के नोआखली में थे जहां वे सांप्रदायिक दंगों को रोकने के लिए उपवास और शांति यात्रा कर रहे थे।
Q2: जोधपुर के राजा पाकिस्तान क्यों नहीं गए?
A2: हालांकि जिन्ना ने उन्हें आकर्षक प्रस्ताव दिए थे, लेकिन सरदार पटेल की समय पर की गई सूझबूझ और जोधपुर की जनता की भावनाओं के कारण महाराजा ने भारत में विलय के समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए।