वाराणसी में देव दीपावली और गंगा घाटों की भव्यता के लिए मशहूर मां गंगा का रुख इन दिनों बेहद डरावना और विकराल हो गया है। लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण नदी ने उग्र रूप धारण कर लिया है और पानी अब सीधे खतरे के निशान को छूने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। बाढ़ की इस आहट के बीच जहां एक तरफ प्रशासनिक अमला और स्थानीय लोग सतर्कता बरत रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जो रूह कंपा देने वाली हैं। उफनती और बहती हुई लेहजों के बीच मासूम बच्चों की लापरवाही किसी बड़े हादसे को सीधा न्योता दे रही है।
सुजाबाद के बाबा अवधूत राम भगवान घाट पर हैरान करने वाली तस्वीर
गंगा की धाराओं में उफान और उसकी भयंकर रफ्तार के बीच बच्चों और किशोरों का पानी के साथ खतरनाक खेल जारी है। ताजा मामला वाराणसी के गंगा पार स्थित सुजाबाद इलाके का है। यहां प्रसिद्ध 'बाबा अवधूत राम भगवान घाट' के पास एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसे देखकर किसी भी जिम्मेदार नागरिक का दिल दहल जाएगा। जान जोखिम में डालकर कुछ बच्चे उफनते पानी के बीच खतरनाक स्टंट करते नजर आए।
मौजूदा स्थिति यह है कि गंगा का वेग सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना तेज है। पानी के अंदर क्या है, भंवर कहां बन रहे हैं और बहाव कितना तीव्र है, इसका अंदाजा लगाना बड़े-बड़े तैराकों के लिए भी मुश्किल होता है। ऐसे में इन बच्चों का पानी में उतरना और हुड़दंग मचाना सीधे तौर पर मौत को गले लगाने जैसा है। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर खतरे से बेखबर ये बच्चे अपनी जान की बाजी लगाकर पानी के बीच अठखेलियां कर रहे थे।
प्रशासनिक मुस्तैदी पर उठे सवाल, क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार है?
इस प्रकार की तस्वीरें न केवल बच्चों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगाती हैं, बल्कि स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं। जब नदी का जलस्तर डेंजर जोन के करीब पहुंच चुका है और लगातार चेतावनी जारी की जा रही है, तब घाटों पर इस तरह की लापरवाही का खुलेआम चलना अपने आप में चिंताजनक है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन बच्चों को नहीं रोका गया और घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो कोई भी अनहोनी कभी भी घट सकती है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब यह खतरनाक खेल चल रहा था, तब घाट के आसपास और एनडीआरएफ या जल पुलिस की मौजूदगी को लेकर भी सुस्ती साफ तौर पर देखी गई। लोगों का साफ कहना है कि प्रशासन को बिना एक पल गंवाए इस मामले का तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।
- गंगा का बढ़ता जलस्तर: आंकड़ों और जमीनी हकीकत पर एक नजरवर्तमान स्थिति: वाराणसी में गंगा का जलस्तर लगातार ऊपर चढ़ रहा है, जिससे निचले इलाकों में धड़कनें तेज हो गई हैं।
- खतरे का निशान: पानी चेतावनी बिंदु को पार करते हुए अब सीधे डेंजर लेवल के मुहाने पर दस्तक दे रहा है।
- घाटों की स्थिति: कई छोटे घाट पूरी तरह से डूब चुके हैं और बड़े घाटों पर सीढ़ियों के ऊपरी छोर तक पानी पहुंच गया है।
- प्रमुख प्रभावित क्षेत्र: सुजाबाद, राजघाट, और सामने घाट जैसे इलाकों में जलस्तर बढ़ने का सीधा असर दिखने लगा है।

अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों की बड़ी जिम्मेदारी
इस पूरे प्रकरण में केवल प्रशासन को दोषी ठहराना ही काफी नहीं है, बल्कि समाज और विशेषकर अभिभावकों को भी अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझनी होगी। माता-पिता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस बाढ़ और उफान के मौसम में उनके बच्चे गंगा घाटों की तरफ न जाएं। पानी की ताकत का अंदाजा बच्चों को नहीं होता, और एक छोटी सी चूक पल भर में हंसते-खेलते परिवार को मातम में बदल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून और इसके बाद के दौर में नदियों का जलस्तर अचानक तेजी से बदलता है। जलधारा के भीतर कई प्रकार के मलबे, तेज बहाव और खतरनाक भंवर (Whirlpool) बन जाते हैं, जो अच्छे-अच्छे तैराकों को भी अपने आगोश में खींच सकते हैं। ऐसे में पानी से खेलना किसी सुसाइड मिशन से कम नहीं है।
क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
इस गंभीर परिस्थिति से निपटने के लिए निम्नलिखित तात्कालिक कदम उठाए जाने बेहद जरूरी हैं:
- घाटों पर पुलिस गश्त: सभी प्रमुख और संवेदनशील घाटों पर पुलिस बल और जल पुलिस की स्थायी तैनाती हो।
- बैरिकेडिंग: जहां तक पानी पहुंच चुका है, वहां तक आम लोगों की पहुंच रोकने के लिए मजबूत बैरिकेडिंग की जाए।
- लाउडस्पीकर से चेतावनी: घाटों के आसपास निरंतर मुनादी कराई जाए ताकि लोग बच्चों को पानी से दूर रखें।
- सख्त कार्रवाई: नियमों को ताक पर रखकर जान जोखिम में डालने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
फिलहाल, जरूरत इस बात की है कि प्रशासन नींद से जागे और सुजाबाद तथा अन्य घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम लागू करे। मां गंगा हमारी आस्था का केंद्र हैं, लेकिन उनकी उग्र होती धारा के साथ खिलवाड़ करना भारी पड़ सकता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस खबर के सामने आने के बाद जिम्मेदार विभाग हरकत में आएंगे और किसी भी संभावित दुर्घटना को समय रहते टाल दिया जाएगा।