भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय), वाराणसी के परिसर में इस समय भाषा और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। संस्थान के भीतर चल रहे 'हिंदी माह' के कार्यक्रमों की श्रृंखला में हाल ही में एक बेहद महत्वपूर्ण हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस विशेष आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक और कार्यालयी कार्यों में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को अधिक सहज, प्रभावी और व्यापक बनाना था, जिससे आम जनता और प्रशासन के बीच संवाद की दीवारें पूरी तरह से ढह सकें।
विशेषज्ञ वक्ता के रूप में डॉ. प्रज्ञा शुक्ला की रही उपस्थिति
इस कार्यशाला में शिरकत करने के लिए वाराणसी के भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की प्रतिष्ठित प्रबंधक डॉ. प्रज्ञा शुक्ला को बतौर मुख्य विशेषज्ञ आमंत्रित किया गया था। उनके साथ इस सत्र ने कर्मचारियों को व्यावहारिक ज्ञान का एक नया आयाम दिया। कार्यक्रम का औपचारिक आगाज संस्थान के उप कुलसचिव (राजभाषा) डॉ. अमित कुमार सिंह के संबोधन के साथ हुआ। डॉ. सिंह ने न केवल मुख्य वक्ता का परिचय सभागार में बैठे प्रशासनिक अमले से कराया, बल्कि उनके अब तक के शानदार कार्यक्षेत्र और उपलब्धियों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
राजभाषा अधिनियम और उसके व्यावहारिक अनुप्रयोग पर गहराई से चर्चा
मुख्य विशेषज्ञ के रूप में मंच संभालते ही डॉ. प्रज्ञा शुक्ला ने “राजभाषा अधिनियम एवं नियम तथा इसके कार्यालयी अनुप्रयोग” जैसे गंभीर और उपयोगी विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने कर्मचारियों को यह समझाया कि किस प्रकार देश के संविधान और नियमों के तहत राजभाषा अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों को गढ़ा गया है। डॉ. शुक्ला ने केवल किताबी ज्ञान पर जोर देने के बजाय, रोजमर्रा के दफ्तर के कामों में इन नियमों के व्यावहारिक और बेहद प्रभावी इस्तेमाल के गुर सिखाए।
उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि सरकारी कार्यालयों में फाइलों के मूवमेंट से लेकर पत्राचार तक, हर स्तर पर हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग होना चाहिए ताकि शासन और जनता के बीच की भाषा की दूरी मिट सके। उनका यह सत्र उन कर्मचारियों के लिए आंखें खोलने वाला था जो अक्सर अंग्रेजी को प्रशासनिक कार्य की मजबूरी मान लेते हैं।प्रशासनिक दृष्टिकोण और महत्व
कार्यक्रम की अगली कड़ी में संस्थान के प्रोफेसर इंचार्ज (प्रशासन) प्रो. रंजीत मोहंती ने कार्यशाला की उपयोगिता और वर्तमान परिदृश्य में इसके महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसकी अपनी भाषा के विकास के बिना अधूरी है। प्रो. मोहंती ने कार्यालयी कामकाज में पूरी ईमानदारी और सहजता के साथ हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका यह संदेश सभागार में मौजूद हर एक कर्मचारी के मन में अपनी भाषा के प्रति सम्मान जगा गयाकर्मचारियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी और सम्मान समारोह
ज्ञान के इस आदान-प्रदान के बाद आयोजन के अंत में एक सादे लेकिन बेहद गर्मजोशी भरे माहौल में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। संस्थान के अधिकारी श्री सुमित कुमार बिस्वास ने आगे बढ़कर मुख्य विशेषज्ञ डॉ. प्रज्ञा शुक्ला को अंगवस्त्र और प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस कार्यशाला की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि इसमें आईआईटी-बीएचयू के कुल 33 गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इन कर्मचारियों ने न केवल कार्यशाला को ध्यान से सुना, बल्कि अपने दैनिक कार्यों से जुड़ी शंकाओं का समाधान भी विशेषज्ञों से प्राप्त कनिष्कर्ष
वर्ष 2026 के इस दौर में, जब तकनीक और भाषा का मिला-जुला रूप हमारे सामने आ रहा है, आईआईटी-बीएचयू जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा ऐसे आयोजनों का होना यह साबित करता है कि हम अपनी जड़ों और अपनी राजभाषा के प्रति कितने सजग हैं। इस कार्यशाला के बाद उम्मीद की जा रही है कि संस्थान के प्रशासनिक कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग में और अधिक गति आएगी, जो कि देश के भाषाई विकास की दिशा में एक और मील का पत्थर साबित होगा