महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से गर्मी बढ़ गई है। नासिक में अपनी बुनियादी हक की मांगों को लेकर पिछले 12 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे आदिवासी छात्रों के समर्थन में अब सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के प्रमुख नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने सीधे तौर पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार छात्रों की जायज मांगों को अनसुना कर रही है और केवल टालमटोल वाले जवाब देकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश में जुटी है।
12 दिनों से अनशन पर छात्र, बुनियादी सुविधाओं की मांग
नासिक में चल रहा यह आदिवासी छात्रों का आंदोलन अब एक बड़े राजनीतिक संकट का रूप लेता जा रहा है। छात्र पिछले लगभग दो सप्ताह से अपनी मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए सड़कों और अनशन पर हैं। उनकी प्रमुख मांगों में छात्रावासों की दयनीय स्थिति सुधारना, आश्रमशालाओं में बेहतर व्यवस्था करना और शिक्षा से जुड़े अन्य बुनियादी संसाधनों को सुचारू रूप से उपलब्ध कराना शामिल है।
इन छात्रों का हाल जानने और उन्हें समर्थन देने पहुंचे आदित्य ठाकरे ने मीडिया से बातचीत के दौरान राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज महाराष्ट्र के युवाओं और छात्रों को अपनी पढ़ाई और रहने के बुनियादी अधिकारों के लिए भी भूख हड़ताल का सहारा लेना पड़ रहा है। लगातार प्रदर्शन के बावजूद शासन-प्रशासन की नींद नहीं खुल रही है, जो सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है.
'जनता के मुद्दों से ध्यान भटका रही है सरकार'
आदित्य ठाकरे ने सरकार पर करारा तंज कसते हुए कहा कि आज राज्य की जनता के सामने रोजगार, शिक्षा, महंगाई और पेट भरने जैसे गंभीर संकट खड़े हैं, लेकिन हुक्मरानों की प्राथमिकताएं कुछ और ही हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार को इस बात की कोई चिंता नहीं है कि आम आदमी का जीवन कैसे चल रहा है, बल्कि उनका मुख्य ध्यान इस बात पर है कि कौन क्या खा रहा है और कौन शाकाहारी या मांसाहारी है।
- आदिवासी छात्रों की शिक्षा और हॉस्टल से जुड़ी मांगें लंबे समय से लंबित हैं।
- सरकार की तरफ से ठोस समाधान के बजाय केवल खोखले आश्वासन मिल रहे हैं।
- राज्य में हर वर्ग को अपनी समस्याओं के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।
महाविकास आघाड़ी के बड़े नेताओं से होगी चर्चा
आदिवासी छात्रों के इस आंदोलन को और मजबूती देने के लिए विपक्षी दल अब एकजुट होते नजर आ रहे हैं। आदित्य ठाकरे ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी शिवसेना (यूबीटी) इस आंदोलन के साथ चट्टान की तरह खड़ी है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि छात्रों की इन गंभीर समस्याओं को लेकर वह जल्द ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की सांसद सुप्रिया सुले से भी चर्चा करेंगे, ताकि इस मुद्दे को राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर और जोर-शोर से उठाया जा सके।
पुणे में ध्वनि प्रदूषण और डीजे के खिलाफ आवाज उठाने वाले पर हमला
नासिक के अलावा ठाकरे ने पुणे की एक हालिया घटना का भी जिक्र किया। पुणे में विद्यानंद बापट नामक नागरिक ने ध्वनि प्रदूषण और तय सीमा से अधिक तेज आवाज में बज रहे डीजे के खिलाफ आवाज उठाई थी, जिसके बाद उन पर हमला कर दिया गया था।
इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि विद्यानंद बापट किसी भी धर्म या किसी विशेष त्योहार के विरोधी नहीं थे। वह केवल यह चाहते थे कि नियमों का पालन हो और लाउडस्पीकर की आवाज तय डेसिबल सीमा के भीतर रहे। उन्होंने सवाल किया कि क्या अपने शहर और सेहत की रक्षा के लिए कानून का पालन करवाना गुनाह हो गया है? ठाकरे ने सरकार से मांग की कि ऐसे मामलों में आम नागरिकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति को हर हाल में सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
राम मंदिर चंदे और नए सीईओ की नियुक्ति पर भी उठाए सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राजनीतिक मुद्दों को आगे बढ़ाते हुए आदित्य ठाकरे ने अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति को लेकर भी भाजपा को घेरा। उन्होंने तीखा सवालिया निशान लगाते हुए पूछा कि आखिर अचानक मंदिर के लिए नए सीईओ की आवश्यकता क्यों आन पड़ी?
ठाकरे ने आरोप लगाया कि इस तरह के प्रशासनिक बदलाव राम मंदिर के निर्माण और संचालन के दौरान मिले भारी-भरकम दान और चंदे में किसी प्रकार की गड़बड़ी या पारदर्शिता की कमी की ओर इशारा करते हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि देश और दुनिया भर के करोड़ों रामभक्तों की आस्था के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और चंदे के हिसाब-किताब में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए।
आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है सियासी पारा
जिस प्रकार से एक के बाद एक कई मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है, उससे यह साफ जाहिर होता है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति और अधिक गरमाने वाली है। एक तरफ जहां नासिक के आदिवासी छात्र अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, वहीं विपक्षी दल भी इस मुद्दे को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार इन छात्रों की सुध कब लेती है और इन तमाम गंभीर आरोपों पर उनका आधिकारिक रुख क्या होता है।