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गाजीपुर डीएम ने नवोदय विद्यालय में बच्चों के साथ खाई लाइन में लगकर रोटी, दिए ये कड़े निर्देश

गाजीपुर डीएम ने नवोदय विद्यालय में बच्चों के साथ खाई लाइन में लगकर रोटी, दिए ये कड़े निर्देश

शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने और ज़मीनी हकीकत से रूबरू होने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों का औचक निरीक्षण अक्सर सुर्खियों में रहता है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने न सिर्फ प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है, बल्कि आम जनता और छात्रों के बीच भी इसकी खासी चर्चा हो रही है। जिले के जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने हाल ही में जवाहर नवोदय विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने केवल कागजी औपचारिकताओं तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि खुद लाइन में लगकर खाना लिया और बच्चों के साथ बैठकर भोजन की गुणवत्ता परखी।

औचक निरीक्षण से मची खलबली, शैक्षणिक व्यवस्था का लिया जायजा

बुधवार को अचानक हुए इस निरीक्षण से विद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया। जिलाधिकारी सीधे कक्षाओं, छात्रावासों, प्रयोगशालाओं और भोजनालय पहुंचे। उन्होंने एक-एक व्यवस्था का बारीकी से मुआयना किया। प्रशासनिक अमले के साथ औचक पहुंचे डीएम ने सबसे पहले शैक्षणिक गतिविधियों का रुख किया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि बच्चों को जो पढ़ाया जा रहा है, वे उसे कितनी गहराई से समझ पा रहे हैं।

निरीक्षण के दौरान डीएम अनुपम शुक्ला सीधे कक्षा 12 के गणित कक्ष में जा पहुंचे। वहां उन्होंने शिक्षक द्वारा पढ़ाई जा रहे विषयों की जमीनी हकीकत परखने के लिए एक अनूठा कदम उठाया। उन्होंने गणित के एक सवाल को ब्लैक बोर्ड पर लिखवाया और विद्यार्थियों से उसे हल करने को कहा। छात्रों ने जब उत्साह के साथ उस चुनौती को स्वीकार किया और सही तरीके से हल निकाला, तो जिलाधिकारी ने उनकी पीठ थपथपाई।

छात्रों से संवाद और संत रविदास के विचारों का जिक्र

बच्चों से संवाद स्थापित करते हुए जिलाधिकारी ने उन्हें जीवन में बड़े लक्ष्य तय करने की सलाह दी। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल किताबी कीड़ा न बनें, बल्कि अपनी सोच को व्यापक करें। उन्होंने छात्रों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा,

"लक्ष्य निर्धारित कर पढ़ाई करें और अपने जीवन में ऐसा कार्य करें जिससे न केवल आपके परिवार, बल्कि आपके पूरे जनपद और देश का नाम अंतरराष्ट्रीय पटल पर गौरवान्वित हो।"

इस बातचीत के दौरान उन्होंने बच्चों को संत रविदास जी के जीवन चरित्र और उनके महान विचारों से भी अवगत कराया। उन्होंने समझाया कि किस तरह संत रविदास ने समाज को समानता और कर्मठता का संदेश दिया था, जिसे हर छात्र को अपने जीवन में उतारना चाहिए।

प्रयोगशालाओं और छात्रावासों की परखी गईं व्यवस्थाएं

कक्षाओं के बाद जिलाधिकारी का काफिला विज्ञान प्रयोगशालाओं की तरफ बढ़ा। उन्होंने रसायन विज्ञान प्रयोगशाला (Chemistry Lab) और अटल टिंकरिंग प्रयोगशाला (ATL Lab) का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने वहां मौजूद उपकरणों की स्थिति देखी और निर्देश दिए कि छात्रों को प्रैक्टिकल नॉलेज यानी प्रायोगिक ज्ञान पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए ताकि वे भविष्य की वैज्ञानिक चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।

इसके पश्चात वे बालिका छात्रावास पहुंचे। छात्राओं के कमरों का मुआयना करने के बाद उन्होंने बालिकाओं से व्यक्तिगत रूप से चर्चा की। उन्होंने पूछा कि क्या उन्हें रहने, पढ़ने या किसी अन्य प्रकार की कोई असुविधा तो नहीं हो रही है। छात्राओं ने जिलाधिकारी को बताया कि उन्हें परिसर में किसी भी समस्या का सामना नहीं करना पड़ रहा है और सभी सुविधाएं सुचारू रूप से मिल रही हैं।

खुद लाइन में लगे डीएम, छात्राओं के साथ खाया खाना

इस पूरे निरीक्षण का सबसे खास और चर्चा का विषय बना हिस्सा भोजनालय का निरीक्षण रहा। जिलाधिकारी सीधे बालिका भोजनालय पहुंचे, जहां उन्होंने सबसे पहले भोजन की शुद्धता और गुणवत्ता की जांच की। भोजन की गुणवत्ता से संतुष्ट होने के बाद उन्होंने एक आम छात्र की तरह लाइन में लगना उचित समझा।

किसी भी वीआईपी प्रोटोकॉल की परवाह किए बिना, डीएम अनुपम शुक्ला ने खुद अपनी थाली उठाई, कतार में खड़े होकर खाना लिया और सीधे छात्राओं की डाइनिंग टेबल पर जाकर उनके साथ बैठ गए। उन्होंने बड़े ही दोस्ताना और सहज माहौल में बच्चों के साथ भोजन किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों से खाने के स्वाद, मेनू और खानपान की अन्य व्यवस्थाओं पर खुलकर फीडबैक लिया।

भोजनालय में एसी लगाने और सुझाव बॉक्स के निर्देश

भोजन के दौरान बच्चों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने तुरंत प्रभाव से विद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भोजनालय में गर्मी के मौसम और बेहतर सुविधाओं को देखते हुए एसी (Air Conditioner) की व्यवस्था जल्द से जल्द की जाए ताकि बच्चों को भोजन करते समय किसी प्रकार की उमस या परेशानी का सामना न करना पड़े।

इसके साथ ही, प्रशासनिक पारदर्शिता और छात्रों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए उन्होंने एक और बड़ा कदम उठाया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि पूरे परिसर में 'शिकायत एवं सुझाव बॉक्स' (Complaint & Suggestion Box) लगाए जाएं। इन बॉक्सों को लगाने का मुख्य उद्देश्य यह है कि यदि कोई छात्र सीधे तौर पर अपनी बात रखने में संकोच करता है, तो वह अपनी समस्या या सुझाव लिखकर इस बॉक्स में डाल सके, जिसे सीधे प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से चेक किया जाएगा।

प्रशासनिक और शैक्षणिक स्टाफ रहा मौजूद

इस उच्चस्तरीय औचक निरीक्षण के दौरान जवाहर नवोदय विद्यालय के प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल सहित समस्त शिक्षक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। जिलाधिकारी ने जाते-जाते विद्यालय प्रबंधन को सख्त हिदायत दी कि छात्रों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और शैक्षणिक वातावरण में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि बच्चों का भविष्य देश की असली पूंजी है और इनकी सुविधाओं में किसी भी तरह की कमी नहीं आनी चाहिए।

गाजीपुर डीएम के इस मानवीय और कड़े प्रशासनिक रुख ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब प्रशासनिक अधिकारी ज़मीन पर उतरकर व्यवस्थाओं का जायजा लेते हैं, तो न सिर्फ कमियां दूर होती हैं, बल्कि सिस्टम में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है। इस निरीक्षण की गूंज अब पूरे जिले के शैक्षणिक संस्थानों में सुनाई दे रही है।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

Writer (स्थानीय खबरें)

निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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