किसानों और आढ़तियों ने उठाई व्यवस्था पर चिंता, मार्केट कमेटी ने जल्द सुधार का दिया आश्वासन
हरियाणा के नूंह जिले की मुख्य अनाज मंडी में इन दिनों धान की बंपर आवक देखने को मिल रही है। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में किसान अपनी धान की फसल लेकर मंडी पहुंच रहे हैं। स्थिति यह है कि मंडी परिसर में चारों ओर धान के ढेरों के अंबार लगे हुए हैं। हालांकि, फसल की इस भारी आवक के बीच मंडी प्रशासन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। विशेष तौर पर गेट पास जारी करने की प्रक्रिया और फसल का वजन दर्ज न किए जाने से किसान और आढ़ती दोनों असमंजस और परेशानी के दौर से गुजर रहे हैं।
गेट पास के नाम पर केवल बुनियादी विवरण दर्ज
मंडी पहुंचे किसानों का आरोप है कि उन्हें नियमों के तहत बाकायदा गेट पास नहीं दिए जा रहे हैं। किसान जीत सिंह, जयपाल और दिलजीत समेत अन्य किसानों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि जब वे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में धान भरकर मंडी पहुंचते हैं, तो गेट पास की प्रक्रिया के नाम पर केवल औपचारिकता पूरी की जा रही है। अधिकारियों या कर्मचारियों द्वारा केवल किसान का नाम, उनके गांव का नाम और मोबाइल नंबर ही एक रजिस्टर में नोट किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि विधिवत गेट पास न मिलने के कारण मंडी में आने वाली कुल फसल का वास्तविक रिकॉर्ड किस प्रकार सुरक्षित रखा जा रहा है, इसे लेकर उनके मन में संशय बना हुआ है।
आढ़तियों के सामने आ रही नीलामी और मार्केट फीस की दिक्कत
सिर्फ किसानों को ही नहीं, बल्कि मंडी के आढ़तियों को भी इस लचर व्यवस्था का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। मंडी के आढ़ती शेर सिंह डागर ने इस समस्या पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि किसानों की गाड़ियों में कितना धान मंडी के अंदर आ रहा है, उसका सटीक वजन दर्ज नहीं किया जा रहा है। बिना वजन के आंकड़े के कारण धान की नीलामी प्रक्रिया के दौरान मार्केट फीस का आकलन करने और उसे भरने में भारी व्यावहारिक दिक्कतें पेश आ रही हैं। आढ़तियों का यह भी कहना है कि मंडी में रोजाना कितने क्विंटल धान की कुल आवक हो रही है, इसका प्रामाणिक रिकॉर्ड रखना बिना वजन पर्ची के बेहद चुनौतीपूर्ण बन गया है।
प्रशासन ने मानी खामियां, जल्द सुधार का दावा
धान के सीजन के दौरान इस तरह की प्रशासनिक चूक से सरकारी आंकड़ों में हेरफेर और पारदर्शिता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। जानकारों का मानना है कि इस व्यस्त सीजन में यदि गेट पास और वजन तौल की व्यवस्था को तुरंत पारदर्शी और सुचारु नहीं किया गया, तो किसानों और व्यापारियों का यह असंतोष और बढ़ सकता है। इस पूरे मामले को लेकर जब मंडी मार्केट कमेटी के अधिकारी प्रदीप डागर से संपर्क किया गया, तो उन्होंने माना कि व्यवस्था में कुछ स्तर पर छोटी-मोटी कमियां रह गई हैं। उन्होंने आश्वस्त किया है कि इन कमियों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द दूर कर लिया जाएगा, ताकि सभी हितधारकों को राहत मिल सके।