आगरा के विभिन्न हिस्सों में लगे विवादित पोस्टरों से उत्तर प्रदेश की राजनीति में आया उबाल, पुलिस और खुफिया एजेंसियां हुईं सतर्क
उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर आगरा में एक बार फिर विवादित राजनीतिक होर्डिंग्स लगने से सियासी माहौल गरमा गया है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में लगाए गए इन पोस्टरों ने राज्य की राजनीति का पारा अचानक काफी ऊपर पहुंचा दिया है। इन होर्डिंग्स के माध्यम से देश के कई प्रमुख विपक्षी नेताओं पर तीखे जुबानी हमले किए गए हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक भविष्य और उनकी भूमिका को लेकर भी एक खास संदेश देने का प्रयास किया गया है। स्थानीय स्तर पर इन पोस्टरों के सामने आने के बाद राजनीतिक दलों में सुगबुगाहट तेज हो गई है और विभिन्न हलकों में इस पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
विपक्षी दलों के इन दिग्गज चेहरों को बनाया गया है निशाना
आगरा की सड़कों पर चर्चा का विषय बने इन होर्डिंग्स में भारतीय राजनीतिक पटल के कई जाने-माने नाम शामिल हैं। इनमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी वाड्रा, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक व दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, आज़ाद समाज पार्टी के प्रमुख व सांसद चंद्रशेखर आज़ाद और अभिजीत दीपके की तस्वीरें प्रमुखता से लगाई गई हैं। इन होर्डिंग्स में इन सभी नेताओं को सीधे तौर पर 'देश के गद्दार' और 'जिन्ना के एजेंट' जैसे शब्दों से संबोधित किया गया है, जिससे राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर उकेरा गया खास संदेश
विवादित पोस्टर्स के दूसरे हिस्से में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर एक बड़ा बयान और विजुअल संदेश दिया गया है। होर्डिंग में सीएम योगी को एक 'संन्यासी' के रूप में दर्शाते हुए लिखा गया है कि वे '2027 में फिर से संन्यासी' बनेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के स्लोगन आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के मद्देनजर एक विशेष राजनीतिक नैरेटिव स्थापित करने के प्रयास का हिस्सा हो सकते हैं। इस प्रकार के होर्डिंग्स सामने आने के बाद से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में राज्य का राजनीतिक माहौल और अधिक तीखा हो सकता है।
प्रशासन की सतर्कता और विपक्षी खेमे में नाराजगी
इस तरह के विवादित और संवेदनशील होर्डिंग सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह से सतर्क हो गया है। खुफिया एजेंसियां और स्थानीय पुलिस यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर इन होर्डिंग्स को किसने और किस मंशा से लगवाया है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं में इन पोस्टर्स को लेकर गहरा रोष व्याप्त है। विपक्षी खेमे का आरोप है कि यह राजनीतिक माहौल को बिगाड़ने और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करने की एक सोची-समझी साजिश है। इस मामले पर विभिन्न दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने की पूरी संभावना जताई जा रही है।