विद्यालयों के आसपास परिवहन विभाग की विशेष कार्रवाई, संदिग्ध वाहनों के मालिकों को नोटिस जारी
हरिद्वार जिले में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर परिवहन विभाग ने नाबालिग छात्र-छात्राओं द्वारा दोपहिया वाहन चलाने पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। इसी क्रम में विभाग की प्रवर्तन टीम ने विभिन्न विद्यालयों के आसपास विशेष अभियान चलाकर औचक निरीक्षण किया। इस दौरान स्कूलों के समीप सड़कों, गलियों और पार्किंग स्थलों पर खड़े संदिग्ध दोपहिया वाहनों की सघन जांच की गई। संभावित रूप से नाबालिगों द्वारा उपयोग में लाए जा रहे इन वाहनों के पंजीकृत स्वामियों को परिवहन विभाग की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब तलब किया गया है।
अधिकारियों के नेतृत्व में हुआ निरीक्षण
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी निखिल शर्मा ने जानकारी दी कि यह विशेष प्रवर्तन अभियान एआरटीओ (प्रवर्तन) नेहा झा के नेतृत्व में संचालित किया गया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान एआरटीओ (प्रशासन) निखिल शर्मा और परिवहन कर अधिकारी वरुणा सैनी भी सक्रिय रूप से शामिल रहीं। जांच प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों ने संदिग्ध वाहनों के मालिकों से कड़े सवाल पूछे हैं। इसमें यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि स्कूल के पास वाहन कौन लेकर आया था, वाहन चलाने वाले चालक की उम्र क्या थी और उसके पास अधिकृत व वैध ड्राइविंग लाइसेंस मौजूद था या नहीं।
यदि वाहन का संचालन किसी नाबालिग द्वारा किया गया था, तो ऐसी स्थिति में उसे वाहन किसने और किन परिस्थितियों में उपलब्ध कराया, इसका भी पूरा स्पष्टीकरण मांगा गया है। विभाग का यह नोटिस वाहन स्वामियों और अभिभावकों की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
विद्यालय प्रबंधन की जवाबदेही तय
परिवहन विभाग ने केवल अभिभावकों और छात्रों पर ही शिकंजा नहीं कसा है, बल्कि विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी भी स्पष्ट कर दी है। विभाग ने सभी स्कूलों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने परिसरों में नाबालिग छात्र-छात्राओं के लिए मोटरसाइकिल, स्कूटी या किसी भी अन्य मोटर वाहन को खड़े करने की पार्किंग सुविधा बिल्कुल उपलब्ध न कराएं। इसके साथ ही बिना वैध लाइसेंस के वाहन चलाकर स्कूल आने वाले विद्यार्थियों की पहचान करने, उनके अभिभावकों को इसकी सूचना देने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूलों से यह भी अपेक्षा की गई है कि वे विद्यार्थियों और उनके माता-पिता को सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करें।
अभिभावकों पर हो सकती है भारी जुर्माने और जेल की कार्रवाई
विभाग ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया है कि निर्धारित आयु सीमा और ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी नियमों का उल्लंघन करके वाहन चलाना पूरी तरह से दंडनीय अपराध है। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199 ए के अंतर्गत निर्धारित कानूनी शर्तें पूरी होने पर यदि कोई किशोर किसी अपराध को अंजाम देता है, तो ऐसी स्थिति में सीधे तौर पर वाहन स्वामी अथवा उसके अभिभावक के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इस प्रावधान के तहत दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक के कारावास और 25 हजार रुपये तक के भारी जुर्माने की सजा हो सकती है।
एआरटीओ नेहा झा ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विद्यालयों के आसपास इस तरह के प्रवर्तन अभियान आगे भी नियमित रूप से जारी रखे जाएंगे। वहीं, एआरटीओ निखिल शर्मा ने कहा कि इस पूरी कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य केवल चालान काटना या दंडित करना नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से विद्यार्थियों, अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन सभी में सड़क सुरक्षा के प्रति वास्तविक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। परिवहन विभाग ने समस्त अभिभावकों से पुरजोर अपील की है कि वे अपनी और दूसरों की जान जोखिम में न डालते हुए अपने नाबालिग बच्चों को दोपहिया वाहन चलाने के लिए बिल्कुल न दें।