हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से एक बड़ी और बेहद अहम खबर सामने आ रही है। जिला प्रशासन ने आम जनमानस के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए एक सख्त कदम उठाया है। कांगड़ा जिला दंडाधिकारी (डीसी) हेमराज बैरवा ने जिले की सीमाओं के भीतर फ्लेवर्ड और कूलिंग इफेक्ट वाले धुआं रहित तंबाकू उत्पादों के भंडारण, परिवहन, बिक्री और प्रदर्शन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध अगले 60 दिनों तक पूरी सख्ती के साथ लागू रहेगा। प्रशासन के इस कड़े रुख से तंबाकू कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत एक्शन
प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक आदेशों के अनुसार, यह कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत की गई है। इस नियम का उद्देश्य किसी भी संभावित आपात स्थिति या जनस्वास्थ्य को खतरे में डालने वाली गतिविधियों को रोकना है। जिला दंडाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि युवाओं और नई पीढ़ी को नशे की खतरनाक गिरफ्त से बचाने के लिए यह एहतियाती कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया था।
आधुनिक समय में बाजार में ऐसे कई तंबाकू उत्पाद धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं जिनमें विभिन्न प्रकार के फ्लेवर, खुशबू और मुंह में ठंडक (कूलिंग इफेक्ट) देने वाले एजेंट मिलाए जाते हैं। इन लुभावने तत्वों के कारण युवा और किशोर वर्ग इनकी तरफ आसानी से आकर्षित हो जाते हैं, जो आगे चलकर निकोटीन की गंभीर लत का कारण बनता है।
किन-किन उत्पादों पर लागू होगा यह प्रतिबंध?
प्रशासन द्वारा जारी किए गए निर्देशों की जद में वे तमाम उत्पाद आ रहे हैं जो स्वाद और सुगंध के नाम पर तंबाकू की स्वीकार्यता को बढ़ाते हैं। उदाहरण के तौर पर 'कूललिप फिल्टर टोबेको' और ऐसे ही अन्य सभी फ्लेवर्ड धुआं रहित तंबाकू उत्पाद इस बैन के दायरे में पूरी तरह शामिल हैं।
इस प्रतिबंध का दायरा बहुत व्यापक है, जिसका मतलब है कि जिले की भौगोलिक सीमा के भीतर कोई भी व्यक्ति, चाहे वह थोक विक्रेता हो, वितरक (distributor) हो, खुदरा दुकानदार हो या फिर किसी ट्रांसपोर्ट कंपनी से जुड़ा व्यक्ति हो, इन उत्पादों का किसी भी रूप में भंडारण, परिवहन, आपूर्ति या वितरण नहीं कर पाएगा। यदि कोई इन नियमों को ताक पर रखकर ऐसा करता पाया गया, तो उस पर प्रशासनिक डंडा चलना तय है।
प्रशासन की नजर में क्या हैं मुख्य कारण?
- जनस्वास्थ्य पर गंभीर खतरा: फ्लेवरयुक्त तंबाकू उत्पाद शरीर को अंदर से खोखला कर रहे हैं और इनसे गंभीर बीमारियां पनपने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
- निकोटीन की लत को बढ़ावा: विभिन्न स्वादों और सुगंधों के कारण ये उत्पाद तंबाकू सेवन की शुरुआत करने के लिए युवाओं को उकसाते हैं।
सार्वजनिक सुरक्षा: इन उत्पादों के अंधाधुंध भंडारण और परिवहन से सामाजिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को रोकना प्रशासन की प्राथमिकता है।पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों को सख्त निर्देश
इस आदेश को कागजों तक सीमित न रखकर जमीन पर पूरी सख्ती से लागू करने के लिए जिला दंडाधिकारी ने कई बड़े अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है। कांगड़ा, नूरपुर और देहरा के पुलिस अधीक्षकों (SP), सभी कार्यकारी मजिस्ट्रेटों, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं कि उनके क्षेत्रों में इन प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री या मूवमेंट बिल्कुल न हो।
यदि औचक निरीक्षण के दौरान या किसी शिकायत पर कोई भी व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 के सुसंगत प्रावधानों के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
60 दिनों तक प्रभावी रहेगा आदेश
यह प्रतिबंध कांगड़ा जिले में आगामी 60 दिनों तक प्रभावी रहेगा। जिला प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इस आदेश की प्रतियां जिले के सभी प्रमुख कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों के नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर दी जाएं, ताकि कोई भी यह न कह सके कि उसे इस नियम की जानकारी नहीं थी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन के इस कदम की सराहना की है। उनका मानना है कि इस प्रकार के सख्त प्रशासनिक फैसलों से समाज में एक सकारात्मक संदेश जाता है और युवा पीढ़ी को नशे की दलदल में जाने से रोकने में मदद मिलती है। आने वाले दिनों में प्रशासन की ओर से और भी कई इलाकों में औचक छापेमारी देखने को मिल सकती है, ताकि आदेश का अनुपालन शत-प्रतिशत सुनिश्चित किया जा सके।