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त्योहारों से पहले रसोई का बजट बिगाड़ा, तेल और मेवे हुए महंगे

त्योहारों से पहले रसोई का बजट बिगाड़ा, तेल और मेवे हुए महंगे

रसोई का गणित इस समय पूरी तरह से गड़बड़ा चुका है। हर महीने की शुरुआत में सैलरी या कमाई का हिसाब लगाने वाली गृहणियों के लिए अब रसोई चलाना एक जटिल चुनौती बन गया है। स्थिति यह है कि कागजों पर जो बजट तय किया जाता है, वह बाजार के कड़वे सच के सामने हर बार छोटा पड़ जाता है। पहले से ही चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की जेब पर कैंची चलाई थी, और अब सरसों के तेल तथा मेवों (ड्राई फ्रूट्स) के दामों में आई जोरदार तेजी ने चिंताओं को कई गुना बढ़ा दिया है। राहत की अगर कोई बात है, तो वह केवल इतनी है कि दालें और कुछ चुनिंदा मसाले फिलहाल अपनी पुरानी रफ्तार पर ही टिके हुए हैं, वरना थाली का स्वाद पूरी तरह से फीका पड़ जाता।

सरसों के तेल और रिफाइंड ने बढ़ाई मुसीबत

भारतीय रसोई की मूल जरूरत यानी सरसों का तेल अब जेब पर भारी पड़ने लगा है। स्थिति यह है कि बाजार में ब्रांडेड कंपनियों का सरसों का तेल परचून में करीब 220 रुपये प्रति लीटर के ऊंचे स्तर को छू रहा है। वहीं, अन्य स्थानीय और गैर-ब्रांडेड कंपनियों के तेल भी 200 रुपये प्रति लीटर के आसपास बिक रहे हैं। केवल सरसों का तेल ही नहीं, बल्कि रिफाइंड तेल के दामों में भी लगातार उछाल देखने को मिल रहा है। त्योहारी सीजन के मुहाने पर खड़े परिवारों के लिए यह स्थिति खासी परेशानी पैदा करने वाली है, क्योंकि पकवानों और तली-भुनी चीजों के बिना किसी भी उत्सव की कल्पना नहीं की जा सकती।

मेवों के दाम पहुंचे आसमान पर, बादाम और किशमिश खरीदना हुआ कठिन

अक्टूबर 2026 के इस त्योहारी दौर से ठीक पहले ड्राई फ्रूट्स (मेवों) की कीमतों ने तो जैसे आसमान छूना शुरू कर दिया है। त्योहारी सीजन में मिठाइयों, खीर और अन्य पकवानों में मेवों का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है, लेकिन इनके बढ़ते दाम आम आदमी की पहुंच से इन्हें दूर करते जा रहे हैं।

  • बादाम गिरी: बाजार में बादाम गिरी का भाव अब 1,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आंकड़े को पार कर चुका है।
  • किशमिश: परचून बाजार में किशमिश की कीमत करीब 600 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है।
  • गरी-गोला: सूखा नारियल या गरी-गोला भी अब 500 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक कीमत पर बिक रहा है।

इन प्रीमियम कीमतों का सीधा असर मध्यम वर्गीय परिवारों के मासिक खर्च और त्योहारी प्लानिंग पर पड़ रहा है। उपहार देने के लिए या मेहमाननवाजी के लिए मेवे खरीदना अब किसी बड़े खर्चे से कम नहीं रह गया है।

सब्जियों के तेवर भी गर्म, टमाटर और मटर ने रुलाया

तेल और मेवों के अलावा सब्जियों के मोर्चे पर भी आम जनता को कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है। बरसात का मौसम पूरी तरह बीत चुका है, जिसके बाद हरी सब्जियों के दाम नीचे आने की उम्मीद थी, लेकिन ठीक इसके विपरीत टमाटर समेत कई प्रमुख सब्जियों के तेवर काफी तीखे बने हुए हैं।

बाजार का हाल यह है कि घिया और कद्दू को यदि अपवाद मान लिया जाए, तो शायद ही कोई ऐसी सब्जी बची हो जो 50 रुपये प्रति किलोग्राम से कम दाम पर मिल रही हो। सर्दियों की आहट के साथ ही मटर का भाव सीधे 200 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर जा पहुंचा है। इसके अलावा, शिमला मिर्च और फूलगोभी जैसी सब्जियां भी 80 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बिक रही हैं, जिससे आम गृहणियों की थाली का संतुलन बिगड़ गया है.

दालों और मसालों की स्थिति: क्या है राहत?

इस मंहगाई के माहौल में अगर किसी वस्तु ने थोड़ी राहत दी है, तो वह दालें और मसाले हैं। हालांकि, यह राहत भी आंशिक ही है। पिछले दो वर्षों की तुलना में यदि आकलन किया जाए, तो दालों के दामों में भी 10 से 15 रुपये प्रति किलोग्राम तक की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है। चना दाल को यदि छोड़ दिया जाए, तो आज बाजार में अधिकांश दालें 100 रुपये प्रति किलोग्राम या उससे ऊपर के भाव पर ही मिल रही हैं।

मसालों की बात करें तो इलायची, बड़ी इलायची और काली मिर्च के दाम काफी तेज बने हुए हैं, जो रसोई के जायके को महंगा कर रहे हैं। हालांकि, इस बीच एक अच्छी खबर यह है कि जीरे के दामों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। जीरे के भाव अपने पिछले उच्च स्तर से आधे से भी कम पर आ चुके हैं, जिससे उपभोक्ताओं को मसालों के मामले में थोड़ी मानसिक और आर्थिक सांत्वना जरूर मिली है।

गृहणियों का छलका दर्द, बोलीं- कैसे चलाएं घर का खर्च?

स्थानीय गृहिणियों अनुराधा, प्रियंका, रेणु, सपना और ममता ने बढ़ती महंगाई पर गहरा रोष और चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि पिछले कुछ महीनों से रसोई चलाना बेहद कठिन हो गया है। पहले केवल हरी सब्जियों के बढ़ते दामों ने जीना मुहाल किया हुआ था, और अब त्योहारी सीजन से ठीक पहले तेल तथा मेवों के आसमान छूते दामों ने परेशानियों को कई गुना बढ़ा दिया है। महिलाओं का मानना है कि त्योहारों के इस पावन समय में बच्चों की जिद और पारिवारिक परंपराओं को निभाना होता है, लेकिन बाजार की इस बेकाबू महंगाई ने हर घर के बजट को पटरी से उतार दिया है।

व्यापारियों की राय: अचानक तेज हुआ महंगाई का दौर

व्यापारिक दृष्टिकोण से इस स्थिति को समझें तो बाजार के जानकारों का भी यही मानना है कि मौजूदा महंगाई का चक्र काफी तेजी से घूमा है। चिंतपूर्णी क्षेत्र के थोक व्यापारी एवं बिजनेस होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष कुंदन गर्ग का कहना है कि खाद्य तेलों और मेवों की कीमतों में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार और एकतरफा तेजी देखी जा रही है। थोक बाजार में इन वस्तुओं के महंगे होने के कारण इसका सीधा असर परचून (रिटेल) मार्केट पर पड़ रहा है, जहां से आम उपभोक्ता इन्हें खरीदते हैं।

निष्कर्ष और आगे की स्थिति

त्योहारी सीजन की शुरुआत में अभी कुछ हफ्तों का समय शेष है, लेकिन उससे पहले ही आवश्यक वस्तुओं के दाम में इस तरह का उछाल आना अर्थव्यवस्था और घरेलू बजट के लिहाज से शुभ संकेत नहीं है। सरकार और स्थानीय प्रशासन स्तर पर यदि आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को दुरुस्त नहीं किया गया, तो आम आदमी की मुश्किलें आने वाले दिनों में और अधिक बढ़ सकती हैं। फिलहाल, हर परिवार इस कोशिश में जुटा है कि किसी तरह कटौती करके अपने घर के बजट को संभाला जाए।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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