हिसार जिले में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय स्तर पर लागू किए गए नए प्रावधानों के तहत अब शहर के बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, अस्पतालों और आवासीय सोसायटियों के लिए कचरे का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य कर दिया गया है। जिला प्रशासन ने इस मामले में सख्ती दिखाते हुए सभी संबंधित विभागों को जमीनी स्तर पर इन नियमों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश जारी किए हैं।
किक किन संस्थानों को माना जाएगा 'बल्क वेस्ट जेनरेटर'?
आम नागरिकों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि क्या हर छोटी दुकान या मकान मालिक को भी इस लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरना होगा? इसका जवाब स्पष्ट रूप से 'नहीं' है। नए नियमों के मुताबिक, किसी भी संस्थान को तभी 'बल्क वेस्ट जेनरेटर' (Bulk Waste Generator) की श्रेणी में रखा जाएगा, जब वह तय किए गए तीन पैमानों में से कम से कम किसी एक को पूरा करता हो।
इन पैमानों के अनुसार, यदि किसी भवन का कुल क्षेत्रफल 20,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक है, वहां प्रतिदिन 40,000 लीटर या उससे ज्यादा पानी की खपत होती है, या फिर रोजाना निकलने वाले ठोस कचरे की मात्रा 100 किलोग्राम या उससे अधिक है, तो उस संस्थान को इस दायरे में लाया जाएगा। इन तीनों में से किसी एक शर्त के पूरा होने पर भी यह नियम प्रभावी हो जाता है। इसके दायरे में बड़े होटल, मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल, नर्सिंग होम, बड़े हॉस्टल, शॉपिंग मॉल, रेस्टोरेंट, मैरिज पैलेस, शैक्षणिक संस्थान और बड़ी आवासीय सोसायटियां आती हैं।
कचरा रजिस्ट्रेशन की ऑनलाइन प्रक्रिया
बड़े कचरा उत्पादकों को अब पारंपरिक दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। इसके लिए केंद्रीय स्तर पर एक विशेष ऑनलाइन सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पोर्टल शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से स्थानीय निकायों के साथ पंजीकरण कराना होगा।
- पोर्टल पर सबसे पहले संस्था का नाम, अधिकृत व्यक्ति का विवरण, ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर दर्ज करना होता है।
- मोबाइल पर प्राप्त होने वाले ओटीपी (OTP) के जरिए सफल सत्यापन के बाद आवेदन का विस्तृत फॉर्म खुलता है।
- अकाउंट क्रिएशन से लेकर नियमों की स्वीकृति और डिजिटल पावती (Acknowledgement) प्राप्त करने तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन ही पूरी की जाती है।
- पंजीकरण के बाद मिलने वाले आधिकारिक प्रमाणपत्र में उन तमाम शर्तों का जिक्र होता है, जिनका पालन करना संस्थान के लिए कानूनी रूप से जरूरी होता है।
क्या आम घरों और छोटी सोसायटियों को भी कराना होगा रजिस्ट्रेशन?
सामान्य परिवारों या आम घरों के लिए बल्क वेस्ट जेनरेटर वाला यह ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं है। हालांकि, इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं है कि आम नागरिकों पर कचरे से जुड़े नियम लागू नहीं होते। घर हो या कोई छोटी दुकान, हर व्यक्ति के लिए कचरे को स्रोत (Source) पर ही अलग-अलग रखना अनिवार्य किया गया है।
प्रशासन की गाइडलाइन्स के मुताबिक कचरे को मुख्य रूप से चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
- गीला कचरा: रसोई से निकलने वाला बचा हुआ खाना और सब्जियों के छिलके।
- सूखा कचरा: प्लास्टिक, कांच, कागज और धातु के डिब्बे।
- सैनिटरी कचरा: डायपर, सैनिटरी पैड आदि।
- विशेष देखभाल वाला कचरा: पेंट के डिब्बे, कीटनाशक के कंटेनर, एक्सपायर हो चुकी दवाइयां, टूटे हुए थर्मामीटर और इस्तेमाल की गई सिरिंज या सुई।
वहीं, जिन सोसायटियों का क्षेत्रफल 20 हजार वर्गमीटर से कम लेकिन 5 हजार वर्गमीटर से ज्यादा है, उन्हें भी अपने परिसर में जैविक कचरे के निष्पादन के लिए कम्पोस्टिंग या बायो-मीथेनेशन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करना होगा।
रजिस्ट्रेशन के बाद संस्थानों की जिम्मेदारियां
सिर्फ पोर्टल पर पंजीकरण करा लेना ही काफी नहीं है, बल्कि इसके बाद संस्थानों को अपनी जवाबदेही भी निभानी होगी। बड़े कचरा उत्पादकों को सूखे, सैनिटरी और विशेष कचरे को अलग-अलग जमा करके स्थानीय निकाय या उनकी तरफ से अधिकृत एजेंसी को ही सौंपना होगा। गीले कचरे के प्रोसेसिंग के लिए परिसरों में ही व्यवस्था बनानी होगी। इसके अलावा, हर साल 30 जून तक केंद्रीय पोर्टल पर अपने कचरे के प्रबंधन से जुड़ा वार्षिक रिटर्न (Annual Return) भी ऑनलाइन जमा करना होगा ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई
यदि कोई संस्थान तय नियमों का उल्लंघन करता है, गलत जानकारी साझा करता है या बिना रजिस्ट्रेशन के ही बड़े पैमाने पर कचरा पैदा कर रहा है, तो उस पर भारी पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (Environmental Compensation) लगाई जा सकती है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय निकायों द्वारा ऐसे मामलों में स्पॉट फाइन और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य शहर को स्वच्छ रखना और कचरे के वैज्ञानिक निपटान को शत-प्रतिशत सुनिश्चित करना है।