हरियाणा के हिसार स्थित प्रतिष्ठित गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीजेयू) के प्रांगण में इस समय शैक्षणिक और प्रशासनिक माहौल गर्माया हुआ है। शोधार्थियों (Research Scholars) की विभिन्न वाजिब मांगों और समस्याओं को लेकर पिछले तीन दिनों से चल रहा अनिश्चितकालीन धरना बुधवार को भी पूरी दृढ़ता के साथ जारी रहा। बड़ी संख्या में छात्र और शोधार्थी यूनिवर्सिटी परिसर में डटे हुए हैं और अपनी आवाज को बुलंद कर रहे हैं। हालात तब और अधिक गंभीर हो गए जब विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ हुई दूसरे दौर की उच्चस्तरीय वार्ता भी किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचे बिना ही समाप्त हो गई।
एक घंटे से अधिक चली बैठक, नतीजा सिफर
शोधार्थियों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच गतिरोध को समाप्त करने के लिए बुधवार को दूसरे दौर की बैठक आयोजित की गई थी। यह महत्वपूर्ण बैठक एक घंटे से अधिक समय तक चली, जिसमें शोधार्थियों ने अपनी सभी प्रमुख समस्याओं को पूरी मजबूती के साथ प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष रखा। हालांकि, लंबी चर्चा के बावजूद दोनों पक्षों के बीच किसी भी ठोस समाधान या आम सहमति पर मुहर नहीं लग सकी।
शोधार्थियों का आरोप है कि उनकी समस्याएं कोई नई नहीं हैं, बल्कि लंबे समय से वे प्रशासनिक गलियारों के चक्कर काट रहे हैं। इसके बावजूद धरातल पर समस्याओं का समाधान होने के बजाय स्थिति जस की तस बनी हुई है। छात्रों का कहना है कि वे किसी भी प्रकार के टकराव या अनुशासनहीनता के पक्षधर नहीं हैं, लेकिन अपने उज्ज्वल भविष्य, अकादमिक अधिकारों और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर वे अब चुप बैठने वाले नहीं हैं।
फिस वृद्धि और आर्थिक बोझ से जुड़े मुख्य मुद्दे
धरने पर बैठे शोधार्थियों ने मुख्य रूप से निम्नलिखित समस्याओं को प्रशासन के सामने रखा है:
- फीस में अप्रत्याशित वृद्धि: शोधार्थियों का कहना है कि लगातार बढ़ती फीस के कारण उनके ऊपर भारी आर्थिक बोझ आ रहा है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों के लिए शोध कार्य जारी रखना कठिन होता जा रहा है।
- शोध कार्य से जुड़ी बुनियादी समस्याएं: लैब्स की स्थिति, संसाधनों की कमी और रिसर्च स्कॉलर्स को मिलने वाली सुविधाओं में आ रही बाधाएं।
- प्रशासनिक उदासीनता: छात्रों का यह भी आरोप है कि कुलपति या कुलसचिव स्तर के सक्षम अधिकारियों का सीधे तौर पर संवाद न करना उनकी उपेक्षा को दर्शाता है।
- लंबित मांगें: कई ऐसे प्रशासनिक मामले हैं जो महीनों से फाइलों में अटके पड़े हैं, लेकिन उनका कोई निस्तारण नहीं किया जा रहा है।
गुरुवार सुबह फिर होगी बैठक, इस बार केवल मौखिक आश्वासन मंजूर नहीं
बुधवार की वार्ता विफल होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से यह जानकारी दी गई है कि गुरुवार सुबह 10 बजे एक बार फिर से दोनों पक्षों के बीच बैठक बुलाई गई है। इस घोषणा के बाद शोधार्थियों ने अपना रुख बेहद स्पष्ट कर दिया है।
"अब हमें केवल मौखिक आश्वासन या कोरे भरोसे नहीं चाहिए। विश्वविद्यालय प्रशासन को हमारी प्रत्येक मांग पर स्पष्ट निर्णय और ठोस, लिखित समाधान देना होगा। पिछले तीन दिनों से हम शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि प्रशासन संवेदनशीलता दिखाए।" - शोधार्थी प्रतिनिधि
शोधार्थियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि गुरुवार की बैठक में भी केवल मामले को टालने का प्रयास किया गया और केवल मौखिक वादे दोहराए गए, तो वे अपने इस आंदोलन को और अधिक तीव्र और व्यापक बनाने के लिए विवश हो जाएंगे।
प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठ रहे बड़े सवाल
तीन दिनों से लगातार चल रहे इस धरने और दो दौर की बैठकों के बेनतीजा रहने के बाद अब यूनिवर्सिटी के आम छात्रों और अकादमिक जगत में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। जानकारों का मानना है कि एक केंद्रीय और तकनीकी रूप से उन्नत विश्वविद्यालय में इस तरह का गतिरोध शैक्षणिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। लगातार दो बैठकों का विफल होना विश्वविद्यालय प्रशासन की संकट प्रबंधन क्षमता (Crisis Management) पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा संघर्ष
धरना स्थल पर मौजूद शोधार्थियों ने एकजुटता का परिचय देते हुए साफ किया है कि उनका यह संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष, प्रोफेसर या अधिकारी के व्यक्तिगत विरोध में नहीं है। यह पूरी तरह से शोध संस्कृति को बचाने, शोधार्थियों के मान-सम्मान की रक्षा करने और एक बेहतर तथा पारदर्शी अकादमिक वातावरण स्थापित करने के लिए है। उन्होंने दोहराया कि वे पूरी तरह से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण दायरे में रहकर ही अपनी बात मनवाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
अब सबकी निगाहें गुरुवार सुबह 10 बजे होने वाली उस महत्वपूर्ण बैठक पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि जीजेयू का यह शोधार्थी आंदोलन समाप्त होता है या फिर इसे एक नए और बड़े चरण की ओर कदम बढ़ाना पड़ेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है, यह देखना बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण होगा।