हरियाणा के हिसार समेत पूरे प्रदेश में सहकारी विपणन समितियों के कर्मचारियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। अपनी विभिन्न लंबित मांगों और घटी हुई कमीशन दरों को लेकर कर्मचारियों ने सरकार और प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राज्यभर के कर्मचारी पिछले दो दिनों से अपने कार्यस्थलों पर काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब कर्मचारियों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है और आगामी 12 अक्टूबर को पंचकूला स्थित हैफेड मुख्यालय का घेराव करने की बड़ी चेतावनी दी है।
काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण ढंग से जताया जा रहा है रोष
'द हरियाणा को-ऑपरेटिव मार्केटिंग सोसाइटी एम्प्लॉइज यूनियन' के आह्वान पर शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन फिलहाल शांतिपूर्ण दायरे में चल रहा है। यूनियन के निर्देशानुसार, प्रदेशभर के सहकारी विपणन समितियों के कर्मचारी अपने दफ्तरों और कार्यस्थलों पर काली पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं। कर्मचारियों का यह विरोध प्रदर्शन 5 अक्टूबर से शुरू हुआ था, जो 11 अक्टूबर तक जारी रहेगा। हालांकि, कर्मचारियों ने यह भी साफ कर दिया है कि यदि इस समयावधि के दौरान उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन का अगला चरण बेहद आक्रामक होगा।
यूनियन के प्रदेश महासचिव हनुमान गोदारा ने मीडिया से बातचीत करते हुए सरकार और हैफेड प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का यह रोष अचानक पैदा नहीं हुआ है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही अनदेखी का परिणाम है। कर्मचारियों का यह विरोध इस बात का प्रमाण है कि धरातल पर काम करने वाले मैदानी अमले की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे उनका आर्थिक और मानसिक शोषण हो रहा है।
प्रमुख मांगें: धान और गेहूं खरीद पर कमीशन बढ़ाने की पुरजोर मांग
कर्मचारियों का मुख्य विवाद कमीशन की दरों को लेकर है। यूनियन नेताओं के अनुसार, 11 सितंबर 2026 को ही प्रबंधन को एक सामूहिक मांग-पत्र सौंपा गया था, जिसमें सभी समस्याओं का स्पष्ट उल्लेख किया गया था। लेकिन, लंबा समय बीत जाने के बाद भी फाइलें धूल फांक रही हैं और जिम्मेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
यूनियन की प्रमुख मांगों में ये बिंदु शामिल हैं:
- धान खरीद कमीशन बहाली: धान की खरीद पर समितियों को मिलने वाले कमीशन को दोबारा से 0.25 प्रतिशत यानी 5.97 रुपये प्रति क्विंटल की दर से तुरंत बहाल किया जाए।
- गेहूं खरीद कमीशन में संशोधन: गेहूं की खरीद पर वर्ष 2011 से मिल रहे महज 1.33 रुपये प्रति क्विंटल कमीशन को आज के इस महंगाई के दौर और वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के हिसाब से पर्याप्त रूप से बढ़ाया जाए।
कर्मचारियों का तर्क है कि आज के समय में ट्रांसपोर्टेशन, लेबर और अन्य ऑपरेशनल लागत कई गुना बढ़ चुकी है, लेकिन सहकारिता समितियों को मिलने वाला कमीशन वर्षों पुराना ही चला आ रहा है। ऐसे में समितियों का कामकाज चलाना और कर्मचारियों को समय पर वेतन देना तक मुश्किल होता जा रहा है।
प्रबंधन की चुप्पी से बढ़ा असंतोष, 12 अक्टूबर को पंचकूला कूच
मांग-पत्र सौंपने के बावजूद हैफेड प्रबंधन की ओर से कोई ठोस या संतोषजनक कार्रवाई न किए जाने से मैदानी स्तर के कर्मचारियों में भारी मायूसी और गुस्सा है। यूनियन ने साफ कर दिया है कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा।
इसी रणनीति के तहत, यूनियन ने अपने आंदोलन के अगले और बड़े चरण की घोषणा कर दी है। तय कार्यक्रम के अनुसार, आगामी 12 अक्टूबर को सुबह ठीक 11 बजे हरियाणा भर के सहकारी विपणन समिति के कर्मचारी पंचकूला पहुंचेंगे और सीधे हैफेड मुख्यालय का घेराव करेंगे। इस प्रदर्शन के माध्यम से सरकार और उच्चाधिकारियों को अपनी ताकत का अहसास कराया जाएगा। यूनियन ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि इसके बाद भी उनकी जायज मांगों को अनसुना किया गया, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक और तीव्र रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
पूरी तरह लोकतांत्रिक रहेगा आंदोलन: हनुमान गोदारा
कानून व्यवस्था और अनुशासन को ध्यान में रखते हुए यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया है कि उनका यह आंदोलन पूरी तरह से लोकतांत्रिक, अनुशासित और शांतिपूर्ण दायरे में रहेगा। किसी भी प्रकार की अराजकता से बचते हुए कर्मचारी अपनी बात को गांधीवादी तरीके से शासन के शीर्ष तक पहुंचाएंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि शांतिपूर्ण होने का मतलब यह नहीं है कि कर्मचारी अपने अधिकारों के हनन को चुपचाप सहते रहेंगे।
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि आने वाले दिनों में हरियाणा का सहकारिता विभाग और हैफेड प्रबंधन एक बड़े प्रशासनिक संकट में घिर सकता है। धान और गेहूं खरीद के पीक सीजन से ठीक पहले इस तरह का कर्मचारी असंतोष सरकारी व्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन सकता है। अब सबकी निगाहें 12 अक्टूबर पर टिकी हैं, जहां पंचकूला में हजारों कर्मचारियों का हुजूम अपनी मांगों के समर्थन में हुंकार भरेगा।