हरियाणा के स्वास्थ्य संस्थानों में पिछले कुछ दिनों से चल रहा प्रशासनिक गतिरोध आखिरकार मंगलवार देर शाम समाप्त हो गया। नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने अपनी मांगों को लेकर चल रही दो दिवसीय दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल को फिलहाल स्थगित करने का बड़ा फैसला लिया है। यह निर्णय स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस हेल्थ) डॉ. सुमिता मिश्रा और महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं (डीजीएचएस) डॉ. मनीष बंसल के साथ हुई मैराथन बैठक के बाद लिया गया। इस बैठक में नर्सिंग कैडर से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई, जिसके बाद एसोसिएशन ने हड़ताल वापस लेने की घोषणा की।
सकारात्मक माहौल में हुई उच्चस्तरीय बैठक
मंगलवार शाम को चंडीगढ़ स्थित स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय में बुलाई गई इस उच्चस्तरीय बैठक में नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन का नेतृत्व राज्य प्रधान विनीता बांगड़, राज्य कोषाध्यक्ष सुमन कुंडू और राज्य संयुक्त सचिव संतोष शर्मा ने किया। बैठक के दौरान एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अपनी सभी प्रमुख मांगों को प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष पुरजोर तरीके से रखा।
अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने नर्सिंग संघ की दलीलों को गंभीरता से सुना और समस्याओं के समाधान के लिए खुला रुख अपनाया। चर्चा के दौरान कई बिंदुओं पर तुरंत सहमति बन गई, जिससे प्रदेश के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने का जो खतरा मंडरा रहा था, वह फिलहाल टल गया है। एसोसिएशन की मीडिया कॉर्डिनेटर पूनम सहराय ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों के सकारात्मक रवैये को देखते हुए ही हड़ताल को स्थगित करने का यह निर्णय लिया गया है।
इन चार प्रमुख मांगों पर बनी रजामंदी
एसोसिएशन की प्रधान विनीता बांगड़ ने बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि प्रशासन के साथ हुई चर्चा में मुख्य रूप से चार मांगों पर पूर्ण सहमति बन गई है। इन मांगों के पूरा होने से प्रदेशभर के हजारों नर्सिंग अधिकारियों को बड़ी राहत मिलेगी:
- मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी (MOTP): यह स्पष्ट किया गया है कि एमओटीपी (MOTP) को फिलहाल नर्सिंग कैडर पर लागू नहीं किया जाएगा। इससे कर्मचारियों में ट्रांसफर को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त हो गई है।
- मेवात और पलवल भत्ता: दक्षिण हरियाणा के दूरदराज और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों यानी मेवात (नूंह) और पलवल में अपनी सेवाएं दे रहे नर्सिंग अधिकारियों को विशेष भत्ता दिए जाने पर मुहर लग गई है।
- गृह जिलों में ट्रांसफर का रास्ता साफ: मेवात और पलवल में कार्यरत नर्सिंग ऑफिसर, जो लंबे समय से अपने गृह जिलों में लौकना चाहते थे, वे अब नई नर्सिंग ऑफिसर की भर्ती होने पर अपने पसंद के जिलों में तबादला ले सकेंगे।
- यूनिफॉर्म अलाउंस का एरियर: पिछले एक साल से बंद पड़े यूनिफॉर्म अलाउंस को तुरंत प्रभाव से एरियर (बकाया राशि) सहित भुगतान करने का आदेश दिया गया है।
बाकी मांगों पर जल्द होगी अगली दौर की वार्ता
भले ही चार मुख्य मांगों पर सहमति बन गई हो, लेकिन नर्सिंग कैडर की कुछ अन्य महत्वपूर्ण मांगें अभी भी प्रक्रियाधीन हैं। इनमें नर्सिंग अलाउंस को बढ़ाकर 7,200 रुपये करने और नर्सिंग ऑफिसर के पद को ग्रुप-बी (Group-B) श्रेणी में शामिल करने जैसी बड़ी मांगें शामिल हैं।
अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने एसोसिएशन को आश्वासन दिया है कि इन शेष मांगों पर भी सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और संघ के प्रतिनिधियों के बीच एक अलग बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें इन बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा होगी और व्यावहारिक समाधान निकाला जाएगा।
बुधवार से नियमित कामकाज पर लौटेंगे नर्सिंग ऑफिसर्स
प्रशासन की ओर से मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाने और चार प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनने के बाद नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने अपने सभी सदस्यों से अपील की है कि वे बिना किसी देरी के अपने काम पर वापस लौट जाएं।
एसोसिएशन की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि सभी प्रदेशभर के नर्सिंग ऑफिसर्स बुधवार, 07 अक्टूबर से अपने-अपने अस्पतालों में नियमित रूप से ड्यूटी ज्वाइन करें और मरीजों की सेवा में जुट जाएं। संघ ने इस आंदोलन के दौरान एकजुटता दिखाने और बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले सभी नर्सिंग कर्मियों का आभार भी व्यक्त किया है।
चेतावनी: मांगें लागू न हुईं तो फिर होगा आंदोलन
हालांकि हड़ताल को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है, लेकिन एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि प्रशासन द्वारा सहमति जताई गई बातों को तय समयसीमा के भीतर धरातल पर लागू नहीं किया गया, तो वे एक बार फिर से सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेंगे।
नर्सिंग लीडर्स का कहना है कि वे सरकार के साथ सहयोगात्मक रवैया अपना रहे हैं ताकि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े, लेकिन यदि वादों पर अमल नहीं हुआ तो आंदोलन को और भी उग्र रूप दिया जा सकता है। फिलहाल, इस समझौते से हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग और मरीजों ने बड़ी राहत की सांस ली है।