यमन के रणक्षेत्र से एक बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। देश के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में नियंत्रण हासिल करने के लिए जारी खूनी संघर्ष के बीच, यमन की सरकारी सेना ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण काहबूब पहाड़ियों (Kahboub mountains) पर हूती विद्रोहियों के एक बड़े और भीषण हमले को सफलतापूर्वक विफल कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से इस इलाके में तनाव लगातार चरम पर था, जिसके बाद यह बड़ा सैन्य टकराव देखने को मिला है।
रणनीतिक तौर पर क्यों अहम हैं काहबूब की पहाड़ियां?
सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, काहबूब की पहाड़ियां यमन के संघर्ष में एक मुख्य भौगोलिक केंद्र बिंदु बनी हुई हैं। यह इलाका ताइज़ (Taiz) और लाहिज (Lahj) गवर्नरेट को यमन के पश्चिमी तट (Western Coast) से जोड़ने वाले एक बेहद संवेदनशील प्रादेशिक त्रिभुज (territorial triangle) के अंतर्गत आता है। जो भी पक्ष इस सामरिक क्षेत्र पर नियंत्रण हासिल कर लेता है, उसे युद्ध के मैदान में भारी रणनीतिक बढ़त मिल जाती है। यही कारण है कि पिछले काफी समय से इस त्रिकोणीय क्षेत्र पर वर्चस्व जमाने के लिए दोनों पक्षों के बीच भीषण खींचतान चल रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, हूती विद्रोहियों ने अचानक से इन पहाड़ियों को अपने कब्जे में लेने के लिए एक समन्वित और भारी सैन्य आक्रमण शुरू किया था। उनका उद्देश्य पश्चिमी तट की ओर जाने वाले प्रमुख आपूर्ति मार्गों को काटना और सामरिक मोर्चे पर अपनी स्थिति मजबूत करना था। हालांकि, यमन की सेना और स्थानीय प्रतिरोध बलों ने इस दुस्साहस का कड़ा मुकाबला किया और दुश्मन के मंसूबों पर पानी फेर दिया।
घमासान जारी: ताइज़ और लाहिज सीमा पर तनाव
काहबूब पहाड़ियों पर हमला नाकाम होने के बावजूद, ताइज़ और लाहिज गवर्नरेट्स की सीमाओं पर अभी भी स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। दोनों ओर से रुक-रुक कर भारी हथियारों की गूंज सुनाई दे रही है। पश्चिमी तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सैन्य बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
- ताइज़ और लाहिज का कनेक्शन: इन दोनों गवर्नरेट्स की भौगोलिक स्थिति युद्ध के मोर्चे पर सबसे संवेदनशील मानी जाती है।
- पश्चिमी तट की सुरक्षा: लाल सागर के करीब होने के कारण पश्चिमी तट पर नियंत्रण रखना दोनों पक्षों के लिए सामरिक प्राथमिकता है।
- मानवीय संकट: इस निरंतर संघर्ष के कारण स्थानीय नागरिकों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं और विस्थापन का खतरा भी गहरा गया है।
क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडराता खतरा
मध्य पूर्व के इस संघर्ष ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बिचौलियों और शांति प्रयासों की राह को कठिन बना दिया है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के आक्रामक अभियान जारी रहे, तो शांति समझौते की बची-खुची उम्मीदें भी धूमिल हो सकती हैं। स्थानीय लोग इस खूनी संघर्ष के बीच अपने घरों को छोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं, जिससे मानवीय सहायता की जरूरतें तेजी से बढ़ रही हैं।
फिलहाल, यमन के रक्षा बलों ने काहबूब के मोर्चे पर स्थिति को नियंत्रण में होने का दावा किया है, लेकिन आने वाले दिनों में इस इलाके में और अधिक सैन्य हलचल देखने को मिल सकती है। सुरक्षा एजेंसियां और क्षेत्रीय मोर्चेबंदी पर पैनी नजर रखने वाले विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह झड़प आने वाले दिनों में एक बड़े संघर्ष की प्रस्तावना साबित हो सकती है।