महाराष्ट्र के शहरी विकास और हाउसिंग सेक्टर में एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। बुधवार, 23 सितंबर 2026 को ठाणे शहर में एक ऐसा ऐतिहासिक कदम उठाया गया, जो आने वाले दशकों में मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) की तस्वीर पूरी तरह बदलकर रख देगा। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ठाणे के सिद्धेश्वर नगर और रमाबाई नगर क्लस्टर पुनर्विकास परियोजना का आधिकारिक भूमिपूजन किया। इस मेगा प्रोजेक्ट के साथ ही उन्होंने एक दूरदर्शी घोषणा करते हुए कहा कि अगले 15 से 20 वर्षों के भीतर एमएमआर क्षेत्र में करीब 30 लाख नए और आधुनिक घरों का निर्माण किया जाएगा।
दो दशक के संघर्ष के बाद धरातल पर उतरी योजना
ठाणे जैसे घनी आबादी वाले और तेजी से विकसित हो रहे शहर में अनियोजित निर्माण और पुरानी, जर्जर इमारतें लंबे समय से प्रशासन और आम जनता के लिए सिरदर्द बनी हुई थीं। शहर में कई ऐसी इमारतें थीं जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक हो चुकी थीं। इन जर्जर इमारतों के गिरने से कई बार गंभीर हादसे भी हुए, जिसके बाद से ही स्थानीय नागरिकों द्वारा क्लस्टर डेवलपमेंट की मांग को लेकर लगातार संघर्ष किया जा रहा था।
इस अवसर पर अपने संबोधन में डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने उन तमाम संघर्षों को याद किया। उन्होंने कहा कि लगभग 20 वर्षों के लंबे संघर्ष और कानूनी-प्रशासनिक अड़चनों को पार करने के बाद अब जाकर ठाणे में क्लस्टर विकास योजनाओं को गति मिल पाई है। किसननगर प्रोजेक्ट का पहला चरण अब अपने अंतिम दौर में है और बहुत जल्द वहां के पात्र निवासियों को उनके सपनों के पक्के घरों की चाबियां सौंप दी जाएंगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को केवल छत देना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवनशैली प्रदान करना है।
सिद्धेश्वर नगर-रमाबाई नगर प्रोजेक्ट: एक नजर में आंकड़े
ठाणे के इस विशिष्ट क्लस्टर प्रोजेक्ट का दायरा काफी बड़ा है। आइए जानते हैं इससे जुड़े मुख्य बिंदु:
- क्षेत्रफल: यह परियोजना लगभग 20 हेक्टेयर यानी करीब 50 एकड़ के विशाल भूभाग पर फैली हुई है।
- प्रभावित परिवार: इस योजना के तहत लगभग 6 हजार परिवारों का पुनर्वास किया जाएगा, जिन्हें सुरक्षित, भूकंप-रोधी और गुणवत्तापूर्ण आवास मिलेंगे।
- बुनियादी ढांचा: यह केवल फ्लैटों का निर्माण नहीं है, बल्कि एक संपूर्ण आधुनिक टाउनशिप है जिसमें हर छोटी-बड़ी सुविधा का ध्यान रखा गया है।
'सिटी विद इन द सिटी' की अनूठी अवधारणा
सरकार इस क्लस्टर विकास को एक साधारण हाउसिंग प्रोजेक्ट के रूप में नहीं देख रही है, बल्कि इसे 'सिटी विदइन द सिटी' (शहर के भीतर शहर) के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका मतलब यह है कि निवासियों को अपनी दैनिक जरूरतों के लिए मीलों दूर जाने की आवश्यकता नहीं होगी।
योजना के ब्लूप्रिंट के अनुसार, इस पूरे परिसर में चौड़ी और सुगम सड़कें, पर्याप्त और निर्बाध जलापूर्ति, अत्याधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, उन्नत कचरा प्रबंधन प्रणाली, बड़े-बड़े हरे-भरे उद्यान और बच्चों के लिए खेल के मैदान बनाए जाएंगे। इसके अलावा समुदाय के लिए कम्युनिटी हॉल, आधुनिक जिम, योग केंद्र, इनडोर गेम्स ज़ोन, डिजिटल लाइब्रेरी, बच्चों के लिए डे-केयर सेंटर, वरिष्ठ नागरिकों के लिए मनोरंजन केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, महिला सशक्तिकरण केंद्र और पूरे इलाके में स्मार्ट स्ट्रीट लाइट्स की व्यवस्था की जाएगी।
'वॉक टू वर्क' और स्थानीय रोजगार पर जोर
आधुनिक शहरी नियोजन में ट्रैफिक और प्रदूषण सबसे बड़ी समस्याएं हैं। इस समस्या से निपटने के लिए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 'वॉक टू वर्क' (काम पर जाने के लिए पैदल या पास की दूरी) की अवधारणा पर विशेष जोर दिया।
इस प्रोजेक्ट के तहत केवल आवासीय इमारतों का ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक क्षेत्रों (Commercial Spaces) का भी विकास किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्थानीय युवाओं को अपने घर के आसपास ही रोजगार और स्वरोजगार के बेहतरीन अवसर मिल सकें। इसके साथ ही, ऐतिहासिक सिद्धेश्वर तालाब के पुनर्विकास, उसकी स्वच्छता और उसके आसपास के सौंदर्यीकरण का कार्य भी इसी योजना का हिस्सा होगा, जिससे इस क्षेत्र की खूबसूरती में चार चांद लग जाएंगे।
रहिवासियों और दुकानदारों के हितों का पूरा ख्याल
पुनर्विकास परियोजनाओं के दौरान अक्सर विस्थापित होने वाले लोगों और छोटे दुकानदारों के मन में आजीविका को लेकर चिंता बनी रहती है। इस कार्यक्रम के दौरान डिप्टी सीएम ने स्पष्ट संकेत दिए कि सरकार रहिवासियों की सभी वाजिब मांगों पर पूरी संवेदनशीलता के साथ विचार कर रही है।
कॉर्पस फंड (Corpus Fund) के गठन, किफायती दरों पर अतिरिक्त 100 वर्ग फुट जगह उपलब्ध कराने और इलाके के छोटे दुकानदारों के विधिवत पुनर्वास पर गंभीरता से काम चल रहा है। डेवलपर्स और निर्माणकर्ताओं को सख्त हिदायत दी गई है कि निर्माण की गुणवत्ता (Quality) से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नागरिकों को बेहतर और टिकाऊ घर मिलना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
एमएमआर क्षेत्र में 30 लाख घरों का विजन
ठाणे के अलावा मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के अन्य हिस्सों जैसे कि मीरा-भायंदर, भिवंडी, कल्याण-डोंबिवली और उल्हासनगर जैसे तेजी से उभरते शहरों में भी क्लस्टर विकास नीति को आक्रामक रूप से लागू किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि आने वाले 15 से 20 वर्षों में एमएमआर क्षेत्र में लगभग 30 लाख किफायती और आधुनिक घरों का निर्माण होने से यहां के रियल एस्टेट बाजार को एक नई दिशा मिलेगी और आम आदमी के आशियाने का सपना सच होगा। यूनिफाइड डीसीपीआर (Unified DCPR) में हाल ही में किए गए सकारात्मक संशोधनों के कारण ही आज इन तमाम एसआरए और क्लस्टर परियोजनाओं को गति मिल पाई है।
दिग्गज नेताओं और अधिकारियों की रही उपस्थिति
इस भव्य भूमिपूजन समारोह में महाराष्ट्र के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों के कई दिग्गज चेहरे मौजूद रहे। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री एवं विधायक जितेंद्र आव्हाड, सांसद नरेश म्हस्के, विधायक निरंजन डावखरे, रविंद्र फाटक, महापौर शर्मिला पिंपळोलकर, उपमहापौर कृष्णा पाटील, ठाणे महानगरपालिका आयुक्त सौरभ राव, जिलाधिकारी श्रीकृष्ण पांचाल, अतिरिक्त आयुक्त डॉ. राठौड़ और वरिष्ठ पत्रकार दिलीप सपाटे समेत कई गणमान्य अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और भारी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।
यह परियोजना न केवल ठाणे के शहरीकरण के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि यह देश के अन्य महानगरों के लिए भी क्लस्टर डेवलपमेंट का एक बेहतरीन मॉडल पेश करेगी।